#स्वधनार्जन_योग।
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#परिभाषा - लग्न, द्वितीय, तृतीय तथा एकादश भाव के स्वामी
यदि लग्न, द्वितीय, तृतीय अथवा एकादश भाव में एकसाथ अच्छी स्थिति में हो तो जातक अपने पराक्रम से स्वतन्त्र रूप से धन कमाता है।
।
ऐसा जातक दूसरे का पास नौकरी नहीं कर पाता है।
।
दूसरे के पास काम करना भी चाहे तो भी नहीं कर पाता है और घूम फिर के अपने सामर्थ्य पर ही निर्भर हो जाता है।
।
अपनी कमाई के साधन अपने गुणों के अनुसार स्वयं निर्मित करता है।
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ऐसे जातक को #सैल्फएम्प्लॉइड कहा जाता है।
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ऐसे जातक अच्छे #बिजनसमैन या अच्छे #कलाकार हो सकते हैं।
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लग्न - शरीर
द्वितीय भाव - धन
तृतीय भाव - पराक्रम मेहनत और स्किल्स
एकादश भाव - कमाई
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जब भी इन चारों सबका कॉम्बिनेशन एकसाथ हो या कम से कम 2 भावों का कॉम्बिनेशन उपरोक्त भावों में बने ( कम से कम एक ग्रह धन सम्बन्धित होना आवश्यक है) तो जातक अपने #बलबूते पर धन कमाता है
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प्रस्तुत कुण्डली #मण्डी_हिमाचल_प्रदेश का #युवा_कलाकार Ranjeet Soni की है जिसमें उपरोक्त योग बना है।
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अपनी मेहनत से अभी दूसरा गाना #शनिदेवा रिलीज़ किया है।
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जिसका लिंक - https://youtu.be/NY5H-FlOBBw
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प्रस्तुत कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-
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जन्म - 17 अप्रैल 1995
समय - 00:30 बजे
स्थान - मण्डी हिमाचल प्रदेश।
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[1] धनु लग्न की कुण्डली में द्वितीय तथा तृतीय भाव का स्वामी शनि एकादश भाव के स्वामी शुक्र के साथ मिलकर यह योग बना रहा है।
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[2] धन का स्वामी और पराक्रम का स्वामी एक ही ग्रह शनि है जो पराक्रम भाव में धन का प्रभाव दे रहा है, या यूं कहें कि पराक्रम का प्रभाव धन में दे रहा है जिससे कि जातक अपनी मेहनत से धन कमाएगा।
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[3] एकादश भाव का स्वामी जब धन भाव और तृतीय भाव के स्वामी से साथ तृतीय भाव में बैठा है तो मेहनत से कमाई होगी धन के माध्यम से धन आएगा।
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इसका उदाहरण रणजीत सोनी की स्वयं की लाइफ में है कि पहले म्यूजिक प्रोग्राम्स में #गिटार बजाकर कमाई की।
।
उसके बाद स्वयं ही गाना लिखा और उसकी धुन भी बनाई।
।
स्वयं का कमाया हुआ पैसा लगाकर एक अच्छे संगीत से गाने का संगीत तैयार करवा के गाना रिजिल किया।
।
[4] तृतीय भाव मनोरंजन खेलकूद का भी होता है।
।
तृतीय भाव में मित्र शनि की राशि का शुक्र होने से संगीत की मौज पसन्द है क्योंकि शुक्र गीत संगीत का कारक है, और तृतीय भाव में संगीत बजाने का स्किल और कलाकारी वाला बना रहा है।
।
[5] द्वितीय भाव का स्वामी गाने के लिए देखा जाता है, अतः द्वितीयेश के साथ शुक्र का होना गायकी में भी रुचि दे रहा है।
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[6] जब धन और मेहनत के साथ के साथ कमाई और कलाकारी का सम्बन्ध बन रहा है तो जातक कला के माध्यम से अपना धन कमा रहा है।
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प्रसिद्ध अभिनेता #शशि_कपूर की कुंडली में तृतीय भाव में ही उच्च शुक्र के साथ धन भाव का स्वामी शनि था जिसके कारण उनकी रुचि भी कलाकारी में रही और कला के माध्यम से धन कमाया। ( 18 मार्च 1938 समय 3 बजकर 6 मिनट )
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[7] तृतीय भाव मित्रों भाई बन्धुओं का भी होता है जिसमें स्वराशि का शनि और मित्र राशि में शुक्र है जिसके कारण इनको अपने बहुत से #प्रिय_मित्रों का सहयोग इनके कार्य में मिला है तथा मित्रों को अपने कार्य का सबसे पहले धन्यवाद करते हैं।
।
इसका रीजन ये भी है कि शुक्र और शनि आपस में बहुत अच्छे मित्र ग्रह हैं तथा मित्र की शुक्र की तुला राशि में शनि उच्च हो जाता है।
।
इस फैक्ट के कारण इनकी मित्रता हमेशा बहुत अच्छी रही है।
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[8] कुण्डली में चारों केंद्र खाली हैं, इसलिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है।
।
उपरोक्त योग के कारण अधिक संघर्ष करने के पश्चात एक अच्छे स्तर की कामयाबी मिली है।
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जितनी अधिक मेहनत करेंगे उतना अधिक धन तथा मान सम्मान प्राप्त होगा क्योंकि इनकी कामयाबी भाग्य के भरोसे कम और मेहनत के भरोसे पर अधिक है।
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#परिभाषा - लग्न, द्वितीय, तृतीय तथा एकादश भाव के स्वामी
यदि लग्न, द्वितीय, तृतीय अथवा एकादश भाव में एकसाथ अच्छी स्थिति में हो तो जातक अपने पराक्रम से स्वतन्त्र रूप से धन कमाता है।
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ऐसा जातक दूसरे का पास नौकरी नहीं कर पाता है।
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दूसरे के पास काम करना भी चाहे तो भी नहीं कर पाता है और घूम फिर के अपने सामर्थ्य पर ही निर्भर हो जाता है।
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अपनी कमाई के साधन अपने गुणों के अनुसार स्वयं निर्मित करता है।
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ऐसे जातक को #सैल्फएम्प्लॉइड कहा जाता है।
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ऐसे जातक अच्छे #बिजनसमैन या अच्छे #कलाकार हो सकते हैं।
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लग्न - शरीर
द्वितीय भाव - धन
तृतीय भाव - पराक्रम मेहनत और स्किल्स
एकादश भाव - कमाई
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जब भी इन चारों सबका कॉम्बिनेशन एकसाथ हो या कम से कम 2 भावों का कॉम्बिनेशन उपरोक्त भावों में बने ( कम से कम एक ग्रह धन सम्बन्धित होना आवश्यक है) तो जातक अपने #बलबूते पर धन कमाता है
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प्रस्तुत कुण्डली #मण्डी_हिमाचल_प्रदेश का #युवा_कलाकार Ranjeet Soni की है जिसमें उपरोक्त योग बना है।
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अपनी मेहनत से अभी दूसरा गाना #शनिदेवा रिलीज़ किया है।
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जिसका लिंक - https://youtu.be/NY5H-FlOBBw
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प्रस्तुत कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-
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जन्म - 17 अप्रैल 1995
समय - 00:30 बजे
स्थान - मण्डी हिमाचल प्रदेश।
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[1] धनु लग्न की कुण्डली में द्वितीय तथा तृतीय भाव का स्वामी शनि एकादश भाव के स्वामी शुक्र के साथ मिलकर यह योग बना रहा है।
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[2] धन का स्वामी और पराक्रम का स्वामी एक ही ग्रह शनि है जो पराक्रम भाव में धन का प्रभाव दे रहा है, या यूं कहें कि पराक्रम का प्रभाव धन में दे रहा है जिससे कि जातक अपनी मेहनत से धन कमाएगा।
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[3] एकादश भाव का स्वामी जब धन भाव और तृतीय भाव के स्वामी से साथ तृतीय भाव में बैठा है तो मेहनत से कमाई होगी धन के माध्यम से धन आएगा।
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इसका उदाहरण रणजीत सोनी की स्वयं की लाइफ में है कि पहले म्यूजिक प्रोग्राम्स में #गिटार बजाकर कमाई की।
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उसके बाद स्वयं ही गाना लिखा और उसकी धुन भी बनाई।
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स्वयं का कमाया हुआ पैसा लगाकर एक अच्छे संगीत से गाने का संगीत तैयार करवा के गाना रिजिल किया।
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[4] तृतीय भाव मनोरंजन खेलकूद का भी होता है।
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तृतीय भाव में मित्र शनि की राशि का शुक्र होने से संगीत की मौज पसन्द है क्योंकि शुक्र गीत संगीत का कारक है, और तृतीय भाव में संगीत बजाने का स्किल और कलाकारी वाला बना रहा है।
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[5] द्वितीय भाव का स्वामी गाने के लिए देखा जाता है, अतः द्वितीयेश के साथ शुक्र का होना गायकी में भी रुचि दे रहा है।
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[6] जब धन और मेहनत के साथ के साथ कमाई और कलाकारी का सम्बन्ध बन रहा है तो जातक कला के माध्यम से अपना धन कमा रहा है।
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प्रसिद्ध अभिनेता #शशि_कपूर की कुंडली में तृतीय भाव में ही उच्च शुक्र के साथ धन भाव का स्वामी शनि था जिसके कारण उनकी रुचि भी कलाकारी में रही और कला के माध्यम से धन कमाया। ( 18 मार्च 1938 समय 3 बजकर 6 मिनट )
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[7] तृतीय भाव मित्रों भाई बन्धुओं का भी होता है जिसमें स्वराशि का शनि और मित्र राशि में शुक्र है जिसके कारण इनको अपने बहुत से #प्रिय_मित्रों का सहयोग इनके कार्य में मिला है तथा मित्रों को अपने कार्य का सबसे पहले धन्यवाद करते हैं।
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इसका रीजन ये भी है कि शुक्र और शनि आपस में बहुत अच्छे मित्र ग्रह हैं तथा मित्र की शुक्र की तुला राशि में शनि उच्च हो जाता है।
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इस फैक्ट के कारण इनकी मित्रता हमेशा बहुत अच्छी रही है।
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[8] कुण्डली में चारों केंद्र खाली हैं, इसलिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है।
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उपरोक्त योग के कारण अधिक संघर्ष करने के पश्चात एक अच्छे स्तर की कामयाबी मिली है।
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जितनी अधिक मेहनत करेंगे उतना अधिक धन तथा मान सम्मान प्राप्त होगा क्योंकि इनकी कामयाबी भाग्य के भरोसे कम और मेहनत के भरोसे पर अधिक है।

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