Saturday, July 27, 2019

कातिल हाथ का अध्ययन Analysis of killer Hand


#कत्ल


हस्तरेखा से कत्ल करने की वृत्ति का अनुमान बहुत बेहतरीन तरीके से लग जाता है।


कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने कहा कि उसकी कुण्डली का डेट टाइम कन्फर्म नहीं है, सिर्फ जजमेंट के अनुसार ही पता है।


व्यक्ति ने कत्ल किया था और जेल में सजा काटकर आया था।


उस डेट टाइम पे बनी कुण्डली की परिस्थितियां इनसे मैच नहीं हुई क्योंकि डेट टाइम गलत था।


फिर इनका हाथ देखा।

हाथ के अनुसार ये व्यक्ति प्रोफेशनल कातिल नहीं था।


साधु वृति वाला हाथ था।


सन्यास लेने की इच्छा थी, कत्ल अनजाने में गुस्से में हो गया, गुस्सा बहुत अधिक है, घबराहट बहुत ज्यादा होती है।


इनके साधु वृति का कारण और कत्ल होने का कारण हाथ से स्पष्ट हो गया।


कत्ल करना और अनजाने में कत्ल हो जाना।

दोनों अलग अलग परिस्थितियां हैं।


#कातिल_हाथ की पहचान -

[1] जिसका का हाथ कटी फ़टी रेखाओं वाला हो।

[2] मंगल और मंगल वद दोनों पर्वत अत्यधिक दबे या उठे हुए हो।

[3] हृदय रेखा राहु पर्वत की तरफ जाती हो या बिल्कुल सीधे आरपार हो जाती हो।

[4] शनि पर्वत राहु की तरफ बढ़ा हो।

[5] हाथ का अंगूठा मोटा भद्दा और गदा के जैसा हो, भारी नाखून हो।

[6] मस्तिष्क रेखा कटी हुई या बिखरी हुई शाखाओं युक्त हो।

[7] रेखाएं बहुत काली या चटकीले लाल रंग की होती हैं।

जिसकी रेखाएं काले रंग वाली होंगी वो जहर देकर या बन्दूक से कत्ल कर देगा और  चटकीली रेखाओं वाला चाकू छुरे तलवार आदि से कत्ल करेगा।


ऐसी हस्तरेखा और हाथ वाला जातक कत्ल कर सकता है।

क्योंकि इसकी वृति कत्ल की होती है।



किसी मीट शॉप में कसाईयों के हाथ देखना, आपको 10 में से 7 कसाई भद्दे अंगूठे वाले मिलेंगे।


उन भद्दे अंगूठों वाले कसाईयों में भी 3-4 ऐसे निकलेंगे जो बकरे की गर्दन खुद काटेंगे।

बाकी कसाई सिर्फ मरे हुए बकरे को काटकर बेचने वाले होंगे और जो मरे हुए बकरे का मीट काटकर बेचेंगे, उनके हाथ के अंगूठे आपको ज्यादा भद्दे नहीं मिलेंगे, वो सामान्य लोगों जैसे ही होंगे।


किसी की गर्दन काटने के लिए क्रूरता चाहिये।

किसी की मौत का प्लान बनाने के लिए कितना अधिक चिन्तन चाहिये?

उससे अंजाम देने के लिए हिम्मत चाहिए, मन मजबूत होना चाहिए।


क्रूरता खराब मंगल से आती है, बिगड़ी हुई हृदय रेखा से आती है।



#औरत भी कत्ल कर सकती है।


औरत किसी की गर्दन काट दे, ऐसा सुनने में शायद ही मिले।


#जहर देकर कत्ल करने की वृति औरतों में होती है।



जहर देने के लिए भी बहुत ज्यादा निर्दयी दिल चाहिए जो किसी के खाने में जहर मिला के उसके हाथ में थमा दे कि खाना खाओ।


कत्ल बड़े पैमाने पर भी किये जाते हैं।


कहीं पर बम विस्फोट करना भी कत्ल का ही एक प्रकार है।

बन्दूक लेकर भीड़ को छलनी कर देना भी बड़े पैमाने का कत्ल है।


किसी की पानी की टँकी में जहर मिला के भाग जाना भी कत्ल का प्रकार है।


मिलाने वाला जहर मिला के चला जायेगा और पीने वाले सो जाएंगे।


[अपनी छत पर रखी पानी की टँकी को लॉक लगाया करें। ]



इस व्यक्ति ने कत्ल क्यों किया और अनजाने में क्यों हुआ ?


[1] इस व्यक्ति का बुध पर्वत कनिष्ठा ऊँगली का पास से अन्दर को तरफ धँसा है और पर्वत पर हार्डवर्क के कारण छाला भी बना है।

मतलब बुध खराब स्थिति में है।

आदमी का तर्क उसका साथ छोड़ देता है।


[2] बुध के नीचे मंगल पर्वत जरूरत से ज्यादा उठा हुआ है, बाहर की तरफ भी निकला हुआ है।

गुस्सा बहुत अधिक है, लड़ाई करने पर बात आ जाती है, ऐसा जातक मारपीट के कारण थाने के चक्कर लगाता है और पुलिस के हाथों से पिटता भी है।


[3] मंगल के नीचे चन्द्र पर्वत अन्दर की तरफ धँसा हुआ है।

ऐसा तब होता है जब चन्द्रमा पर शनि, केतु, और राहु का प्रभाव पड़ता है।

इस स्थिति से मानसिक सन्तुलन बिगड़ गया, घबराहट होती है।


जहाँ तक मुझे सम्भावना लगी तो इनके चन्द्रमा पर केतु का प्रभाव है क्योंकि शनि का पर्वत कुछ ज्यादा ही उठा हुआ है और राहु की तरफ बढ़ता हुआ नीचे की तरफ आ रहा है।

यदि कुण्डली में शनि राहु एक साथ होंगे तो जाहिर से बात है कि चन्द्रमा केतु के साथ ही आएगा और ग्रहण योग तथा विषयोग का प्रभाव बनेगा, उसी के प्रभाव से मानसिक सन्तुलन बिगड़ना और घबराहट होती है।

कोर्टकेस मुकद्दमे भी इसी कारण अधिक चलते हैं।


शनि पर्वत का अधिक उठना वैरागी बना देता है, सन्यास की भावना अधिक आने लगती है।



[4] तर्जनी ऊँगली के नीचे बृहस्पति बहुत अच्छे तरीके से उभरा है इसलिए ये जातक एक धार्मिक सोच वाला है।

लेकिन बृहस्पति भी थोड़ा अधिक बड़ा होकर राहु की तरफ बढ़ गया है जो कुण्डली में बृहस्पति राहु द्वारा बने गुरु चाण्डाल योग की संभावना बना रहा है।


गुरु चाण्डाल योग वाले आध्यात्मिक पक्ष में अधिक उन्नति करते हैं।


इसलिए भी साधु वृति की बढ़ोतरी हो रही है।


[5] मस्तिष्क रेखा भी चन्द्रमा की तरफ झुक रही है।

जातक भावुक हो गया जिस वक्त झगड़ा हो रहा था उस और गुस्से में कत्ल कर दिया।

खराब चन्द्रमा पर जब मस्तिष्क रेखा जाती है तो मानसिक रोगी होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।


[6] बृहस्पति के नीचे मंगल वद भी ऊबड़खाबड़ है, इस पर्वत की बिगड़ी हुई स्थिति भी गुस्सा अधिक बढ़ा देती है और हिंसा हो जाती है।


[7] हृदय रेखा बृहस्पति पर जाकर रुक रही है जिसका मतलब है कि यह व्यक्ति प्रोफेशनल कातिल नहीं हो सकता है, ये अनजाने में हुआ।


[8] पूरे हाथ की शेप देखें तो साफ हथेली है, अच्छी उंगलियाँ हैं और अच्छा अंगूठा है।


कुण्डली में खराब ग्रहस्थिति के कारण इस व्यक्ति से कत्ल हुआ और जेल जाना पड़ा।


किसी वक़्त है जातक घरेलू परिस्थितियों से अधिक दुःखी हो गया तो घर बार छोड़कर साधु सन्यासी भी बन सकता है क्योंकि मंगल वद जब बिगड़ी स्थिति में हो तो अपनी जमीन का सुख अधिक नहीं होता है।


[ नोट - ये हस्तरेखा मैंने इसलिए देखी क्योंकि इस व्यक्ति की कुण्डली मौजूद नहीं थी।


मैं हस्तरेखा पर ज्यादा फोकस भी नहीं करता हूँ क्योंकि 6-7 साल पहले छोड़ दी है। ]

आय भंग योग

#आय_भंग_योग


एकादश भाव आय का भाव होता है।

यदि एकादश भाव का स्वामी छठे या आठवें भाव में चला जाये तो आय भँग हो जाती है।

बड़े स्तर पर होने वाली कमाई छोटे स्तर पर सीमित हो जाती है।

एकादश का स्वामी नीच राशि में हो तब भी ऐसा होता है कि आय का साधन अच्छा नहीं बन पाता है।



जातक को एस्ट्रोलॉजर्स ने कहा कि आपका #विपरीत_राजयोग है, आपको #अरबपति होना चाहिए।


लेकिन ऐसा नहीं है।


जातक ने 25 लाख का ट्रेलर खरीदा था और कुछ समय बाद दूसरा  ट्रेलर भी खरीदा था।

दूसरे ट्रेलर के कारण हानि हो गई और 7-8 लाख का कर्ज टाइमली ना चुकाने के कारण बैंक ने #डिफॉल्टर बना दिया।


अब किसी भी बैंक से लोन नहीं मिलेगा।



जिसके पॉइंट्स-


जन्म - 25 अगस्त 1979
समय - 20:20 बजे, हिसार हरियाणा



[1] इनका छठे और बारहवें भाव का स्वामी षष्टम भाव मे षष्टम भाव के स्वामी के साथ ही है।

विपरीत राजयोग की स्थिति बनती है लेकिन इनका शुक्र और शनि दोनों ही #अस्त हैं।

अस्त ग्रह विपरीत राजयोग में सफलता नहीं देते।

यदि विपरीत राजयोग वाले ग्रह उग्र और क्रूर हो तो अधिक सफलता देते हैं क्योंकि छठे आठवें भाव मे क्रूर और उग्र ग्रह बड़े काण्ड करने वाले होते हैं।


[2] शनि एकादश भाव और द्वादश भाव का स्वामी है और छठे भाव में गया है।


द्वादशेश होने से शनि विपरीत राजयोग बना रहा है लेकिन एकादशेश होने से आय भँग कर रहा है।


जिस व्यक्ति की कमाई ही खड्डे में चली जाए तो अरबपति कैसे बने ?



[3] राहु के साथ एकादश भाव का स्वामी कर्ज में में है इसलिए राहु महादशा समाप्त होते होते आय भँग का फल मिल गया।

अब अपने कार्य को बड़े स्तर पर करने के लिए लोन नहीं मिलेगा।


छोटा कार्य करना पड़ेगा लेकिन उससे पैसा इतना कमाएंगे कि किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

[4] धन और भाग्य भाव का स्वामी मंगल है और चतुर्थ केन्द्र में है जिसके कारण जातक का धन अच्छा रहेगा और कर्ज सिर पे आये तो पूरा उतार देगा।



  • मंगल की स्थिति के कारण ही बैंक का जो 7-8 लाख का कर्ज था वो उतार पाए।

अबू बकर अल बगदादी की कुण्डली Horoscope Analysis of ISIS Abu Bakar Al Bagi hdad



#ISIS_चीफ

#अबू_बकर_अल_बगदादी



ये कुण्डली मुझे एक #POLICE_SUB_INSPECTOR मित्र जी ने दी है और #एनालिसिज के लिए कहा है।


वो खुद एक #एस्ट्रोलॉजर भी हैं, सरकारी ऑफिसर हैं इसलिए उनको यहाँ #मैंशन नहीं कर सकता हूँ।


अबू बकर अल बगदादी ISIS का चीफ है।


#इस्लामिक_विज्ञान में #डॉक्टर_ऑफ_फिलॉसफी की डिग्री की है।

 #इमाम की उपाधि उसके पास है।

2003 में वो आतंकी संगठनों में जुड़ा और अमेरिका के खिलाफ लड़ा था पकड़ा गया।

2010 में #अलकायदा का लीडर बन गया।


कुण्डली से उसकी ये स्थितियाँ स्पष्ट हो जाती हैं और ये भी स्पष्ट हो जाता है कि वो किसी के हाथों नहीं मरेगा।



अब आप शायद ये सोचेंगे कि उसकी कुण्डली में कोई बहुत नीच योग होगा कि वो #आतंकवादी है।

वो आतंकवादी हमारे लिए है, उनके लिए नहीं है जिस देश के लोगों का वो भला चाहता है।


जैसे कि हमारा #विंग_कमाण्डर_अभिनन्दन हमारे लिए #वीर_सिपाही है लेकिन #पाकिस्तान वाले उसे आतंकवादी कहेंगे क्योंकि उसने पाकिस्तान पर हमला किया था।


#देश_काल_और_पात्रता के कारण व्यक्ति के लिए #सम्बोधन बदल जाते हैं।



कोई #सर्कस में जाकर #जगलिंग करे तो #बाजीगर कहलायेगा।

#सड़क पर जगलिंग करे तो #मदारी कहेंगे।




अबू बकर की कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 28 जलाई 1971
समय - 00:10 बजे
जगह - बगदाद ईराक़


[1] मेष लग्न की कुण्डली है तो #अग्नि_तत्व का लग्न सीधे ही गर्म दिमाग बता रहा है।

[2] लग्न का स्वामी मंगल दशम भाव में उच्च राशि का दिग्बली है और #पृथ्वी_तत्व की राशि में बैठकर बहुत ज्यादा गुस्सैल अड़ियल बना रहा है।

ताकत पाने की इच्छा तो जन्म से ही है।

[3] मंगल के साथ राहु भी है जो राजयोग निर्मित कर रहा है।

राजयोग वो अबू बकर के लिए है क्योंकि वो अपने #गिरोह का #सरग़ना है।

दशम का उच्च मंगल #सेनापती बना रहा है।

राहु मंगल के कारण उसकी मारकाट की वृत्ति बन रही है।

[4] मन का कारक चन्द्रमा षष्टम भाव में है जो शत्रु का चिन्तन दे रहा है।

जिस व्यक्ति के मन में शत्रु गूंजे और शरीर मारकाट करने वाला लड़ाक हो तो वो किसी का मर्डर करने से पीछे क्यों हटे ?

[5] पंचम भाव में तर्क का स्वामी बुध है जो छठे भाव का भी स्वामी है।

दिमाग मे शत्रु के प्रति नीति रचने वाली बुद्धि बनी है, तभी तो यव #बम_ब्लास्ट या #नर_संहार जैसी तगड़ी प्लानिंग करते हैं और  अंजाम भी दे देते हैं।

[6] अष्टम भाव में द्वादश भाव का स्वामी बृहस्पति #विपरीत_राजयोग बना रहा है और दशम एकादश के स्वामी शनि से दृष्टी सम्बन्ध है जिसके कारण इसको विपरीत स्थिति से लड़कर सत्ता मिली है।

अबू बकर ने सारी प्रसिद्धि बृहस्पति की महादशा में विपरीत काण्ड करने से पाई है।

[7] अष्टम का बृहस्पति उसे इस्लामिक विज्ञान का स्कॉलर बना रहा है और इमाम की उपाधि मिली है।

हमारे लिए वो #उग्रवाद फैला रहा है लेकिन अपने लिए वो जिहादी बना है।

इण्डिया में अष्टम में बृहस्पति भाव वाले को आध्यात्मिक का ज्ञानी कहेंगे।

वहाँ अबू बकर को आध्यात्मिक कहेंगे क्योंकि वो इस्लाम का एक फिलॉस्फर है।

[8] उसके चतुर्थ भाव में सूर्य केतु से सूर्य ग्रहण बना है जिसके कारण वो अपने घर से दूर ही है क्योंकि विछेदात्मक केतु ने उसे अलग किया है।


शुक्र मारकेश है और मारकेश मंगल से दृष्टि सम्बन्ध है।


सूर्य केतु शुक्र मंगल राहु का दृष्टि सम्बन्ध है।

लेकिन फिर भी इसको राहु में मंगल की दशा में ये आतंकवाद से जुड़ा और 2010 में ISIS का चीफ बना।

क्योंकि इसने इन ग्रहों की दशाओं में सीखा बहुत कुछ था जिसका कारण भाग्य के स्वामी बृहस्पति की अष्टम भाव से चतुर्थ भाव को दृष्टि है।


[9] ये विपरीत राजयोग वाला आदमी है इसको जितना रगड़ोगे ये उतना ही चमकेगा।


इसपे हमले करो ये चालाक बनेगा।

[10] मंगल राहु के कारण शस्त्राघात होगा लेकिन मरेगा नहीं।

गोली मार दो तो जख्मी होगा मरेगा नहीं।

बम फैंक दो तो भी बच निकलेगा।

क्योंकि अष्टम भाव का बृहस्पति इसके भाग्य का स्वामी है, मौत से लड़ेगा भाग्य चमकेगा।


अष्टम में अकेले बृहस्पति या बृहस्पति के साथ शुभग्रह वाले जातक की मौत हत्याकाण्ड में नहीं होती है।


ये भी नहीं मरेगा किसी हत्याकाण्ड में।

रूचक महापुरुष योग Ankesh Chaudhary Athlete's Horoscope Analysis






#रूचक_महापुरुष_योग।


रूचक महापुरुष के बारे में लिखा गया है -

दीर्घस्यो बहुसाहसाप्तविभवः शूरोऽरिहन्ता वाली
गर्विष्ठो रुचके प्रतितगुणवान् सेनापतिर्जित्वरः।


#मंगल यदि #केंद्र_या_त्रिकोण में #स्वराशिस्थ अथवा #उच्च_राशिस्थ हो तो रूचक महापुरुष योग बनता है।

ऐसे जातक जोशीले, बहादुर, निडर और शूरवीर होते हैं।

किसी भी हालात में ये हार नहीं मानते हैं।

फौजी, पुलिसकर्मी या खिलाड़ी मुख्यरूप से इस योग वाले मिलते हैं।

ये किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से नहीं डरते हैं।

रिस्क लेना तो इनके लिए मक्खन में छुरी घूमने जितना आसान काम होता है।

ऐसे जातक की दुबली पतली बॉडी होने के बाद भी दमखम की कमी नहीं होती।

जैसे कि ब्रूसली की बॉडी थी, ब्रूसली मंगल प्रधान व्यक्ति था।
ब्रूसली सबसे अधिक फुर्तीला व्यक्ति था।

मौत के कुएं में काम करने वाले कलाबाज भी मंगल प्रधान होते हैं।




प्रस्तुत कुण्डली हिमाचल प्रदेश के युवा एथिलीट Ankesh Chaudhary की है।

#अंकेश_हिमाचल_प्रदेश में 800M रेस का
🏅#गोल्ड_मेडलिस्ट🏅 🏃🏃🏃#धावक 🏃🏃 है।

जनवरी 2019 में होने वाले #KHEL_INDIA_YOUTH_GAMES में अंकेश ने 800M रेस में #प्रथम_स्थान प्राप्त कर 🏅🏅गोल्डमेडल 🏅🏅 जीता है।


हमारे एरिया में 800M रेस के आयोजन में अंकेश आया था।

रेस में कम से कम 150 धावक भाग ले रहे थे।

ठण्ड के मौसम में सवेरे के समय मैदान में सभी धावक आग सेक रहे थे तो किसी ने बात उठा दी कि आज कौन जीतेगा?


अंकेश ने टेंशन फ्री होकर कहा कि आज मैं जीतूँगा।

चैलेंज भी कर दिया कि कोई जीत के दिखा दे।


दूसरे धावकों ने पूछा कि तुम किस बेस पे कह रहे हो।

अंकेश ने अपने मोबाइल पर उनको अपना गोल्डमेडल और सर्टिफिकेट का फोटो बताया।

उसके रिकॉर्ड की टाइमिंग देखकर उन 150 से ज्यादा धावकों में से  सिर्फ 35-40 धावक ही बचे, बाकी तो ये बोल के निकल गए कि हमारे दौड़ने का कोई फायदा नहीं है अब।


बन्दे का खौफ ही इतना हो गया सबको।


रेस के अंत में अंकेश ही विनर था।


अंकेश से उसकी सक्सेस का राज पूछा गया तो अंकेश ने कहा -

मेहनत जी जान लगाकर करो।

मैं जब दौड़ता हूँ तो कमर पर पैराशूट बाँध के दौड़ लगाता हूँ।

हवा का भाव अंकेश को पीछे की तरफ धकेलता है और अंकेश आगे की तरफ दम लगाता है।


इसी तरह अंकेश ने खेलो इण्डिया यूथ गेम्स 2019 में गोल्डमेडल जीता है।


अंकेश की कुण्डली का 1 ही पॉइन्ट बहुत कुछ कह रहा है -


जन्म - 24 सितम्बर 1997
समय - 11:30 बजे सुबह
जन्मस्थान - कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।



[1] वृश्चिक लग्न और लग्न में लग्न का स्वामी मंगल स्वराशिस्थ होकर रूचक महापुरुष योग बना रहा है।

ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है, वीडियो ही देख लीजिए।

इसका शरीर कितना लचीला है, ब्रूसली की तरह दुबला पतला है लेकिन जोश खरोश कूट कूट के भरा है।


जैसे इसके अन्दर जोश और जुनून का कोई ज्वालामुखी उफान मार के बाहर निकल गया हो।

रेस जीतने के बाद इसकी खुशी देखिए, बरसों की मेहनत का फल है वो।


ऐसा धावक मंगल के प्रभाव से ही बना है।


भविष्य में अंकेश अपना नाम बनाएगा खेल में।

खेल जगत में अपना नाम बनाने के बाद अंकेश प्रशिक्षक बन जायेगा या सरकारी जॉब करेगा।

भगवान श्री कृष्ण की जन्मकुण्डली Horoscope of Lord Shri Krishna




भगवान_श्रीकृष्ण

शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मकुण्डली इस प्रकार कही है -

उच्‍चास्‍था: शशिभौमचान्द्रिशनयो लग्‍नं वृषो लाभगो जीव: सिंहतुलालिषु क्रमवशात्‍पूषोशनोराहव:।
नैशीथ: समयोष्‍टमी बुधदिनं ब्रह्मर्क्षमत्र क्षणे श्रीकृष्‍णाभिधमम्‍बुजेक्षणमभूदावि: परं ब्रह्म तत्।।

[श्रीमद्भागवत महापुराण - दशम स्कन्द, अध्याय तीन]


वृषभ लग्न में उच्च चन्द्रमा, मंगल, शनि, बुध उच्च हैं
एकादश स्थान में बृहस्पति है।
सिंह राशि का स्वामी सूर्य अपने स्थान पर है तथा तुला का स्वामी भी अपने स्थान पर है।

तुला का स्वामी शुक्र है और वृषभ का स्वामी भी शुक्र है।

शुक्र की दूरी सूर्य से अधिकांशतः आगेअथवा पीछे तीसरे भाव तक ही रहती है।

इसलिए शुक्र छठे भाव में शनि के साथ आएगा।

शनि और राहु क्रम में हैं।

शनि का बाद राहु वृश्चिक राशि में आएगा और राहु से सातवाँ केतु लग्न में आएगा।

( रोहिणी नक्षत्र में जन्म हुआ है जिसका स्वामी चन्द्रमा है इसलिए बच्चपन में चन्द्रमा की दशा थी )

इस तरह से श्रीकृष्ण की कुण्डली स्पष्ट होती है।


#सन्त_सूरदास ने भी इसी तरह का वर्णन किया है -


नन्‍दजू मेरे मन आनन्‍द भयो, मैं सुनि मथुराते आयो।

लगन सोधि ज्‍योतिष को गिनी करि, चाहत तुम्‍हहि सुनायो।

सम्‍बत्‍सर ईश्‍वर को भादों, नाम जु कृष्‍ण धरयो है।

रोहिणी, बुध, आठै अंधियारी, हर्षन जो परयो है।

वृष है लग्‍न, उच्‍च के उडुपति, तनको अति सुखकारी,

दल चतुरंग चलै संग इनके, व्हैहैं रसिकबिहारी।

चौथी रासि सिंह के दिनमनि, महिमण्‍डल को जीतैं।

करिहैं नास कंस मातुल को, निहचै कछु दिन बीतै।

पंचम बुध कन्‍या के सोभित, पुत्र बढैंगे सोई।

छठएं सुक्र तुला के सुनिजुत, सत्रु बचै नहिं कोई।

नीच-ऊंच जुवती बहुत भोगैं, सप्‍तम राहू परयो है।

केतू मुरति में श्‍याम बरन, चोरी में चित्त धरयो है।

भाग्‍य भवन में मकर महीसुत, अति ऐश्‍वर्य बढैगो।

द्विज, गुरुजन को भक्‍त होइकै, कामिनी चित्त हरैगो।

नवनिधि जाके नाभि बसत है, मीन बृहस्‍पति केरी।

पृथ्‍वी भार उतारे निहचै, यह मानो तुम मेरी।

तब ही नन्‍द महर आनन्‍दे, गर्ग पूजि पहरायो।

असन, बसन, गज बाजि, धेनु, धन, भूरि भण्‍डार लुटायो।

बंदीजन द्वारै जस गावै, जो जांच्‍यो सो पायो।

ब्रज में कृष्‍ण जन्‍म को उत्‍सव, सूर बिमल जस गायो।



जब भी भगवान ने इन्सान की देह धारण की है तो भगवान को भी सृष्टि के नियमों से बन्धना ही पड़ा है।


जिसके पास भी इन्सान का शरीर है, उस पर ज्योतिष लागू होगा ही।

भगवान भी ग्रहों के प्रभाव से नहीं बच सकता है अगर इन्सान का शरीर धारण करता है।


चाहे भगवान श्री राम का जीवन ले लो या भगवान श्रीकृष्ण का।

ग्रहों के अच्छे बुरे फल भुगतने पड़े।


अब कुछ पॉइंट्स -


[1] वृषभ लग्न में उच्च चन्द्रमा शरीर सुन्दर बना रहा है, श्रीकृष्ण की सुन्दरता का सबको ही पता है।

[2] तृतीय भाव का स्वामी लग्न में उच्च होकर मित्र बन्धुओं और भाई का सहयोग बहुत अच्छा दे रहा है, श्रीकृष्ण के बाल ग्वाल सखा आदि स्पष्ट हो जाते हैं।

[3] चन्द्रमा बच्चपन का कारक है, और सबसे ज्यादा कारनामें बच्चपन में किये हैं चन्द्रमा की महादशा में, चन्द्रमा उच्च है इसलिए शरारतें पसन्द की गई।

[4] चन्द्रमा के साथ केतु है जो ग्रहण योग बना रहा है।

लग्न में केतु के कारण कुटिलता कूट कूट के भरी थी, चोरी करने और झूठ बोलने की आदत केतु के कारण थी।

माता का कारक चन्द्रमा है जो केतु द्वारा खराब होने से माता की दूरी का कारण बना तथा भावात भावम का सूत्र लगाने पर चतुर्थ से चतुर्थ भाव अर्थात सप्तम भाव में नीच राहु भी माता से दूरी का कारण बना।

[5] केतु के साथ उच्च चन्द्रमा था इसलिए चन्द्रमा का प्रभाव अधिक होने के कारण केतु के कारण की गई खुराफाती हरकतें भी लीला बन गई।

[6] लग्न में चन्द्र ग्रहण योग है जो शरीर में विकृति या नुक्सान दे रहा है।

भगवान श्री कृष्ण का शरीर थोड़ा सा टेढ़ा था अगर ध्यान से देखें।

सीधे खड़े होकर बाँसुरी नहीं बजाते पैर हमेशा क्रॉस की स्थिति में रखे हैं।

बाँसुरी बजाने वाला कोई भी आर्टिस्ट हो, उसकी गर्दन में थोड़ा टेढ़ापन आ जाता है या होंठों को टेढ़ापन आ जाता है।

जब श्री कृष्ण ने कुब्जा के टेढ़े शरीर को सीधा कर दिया तो उसका दुःख अपने शरीर पर ले लिया जिसके बाद श्रीकृष्ण के शरीर में टेढ़े खड़े होने की विकृति आ गई थी।

[7] चन्द्रमा वृषभ राशि में है जिसका स्वामी शुक्र है और शुक्र संगीत, भोग विलास आदि का कारक है।

इसी कारण श्रीकृष्ण को संगीत पसन्द था बाँसुरी बजाने की कला थी और गोपियों में भी बहुत रुचि थी क्योंकि चन्द्रमा शुक्र की राशि मे है जो स्त्री के प्रति आकर्षण देता है।

[8] सप्तम भाव का राहु नीच है जिसके कारण श्रीकृष्ण का पहले प्यार राधा के साथ ब्रेकप हो गया।

राहु या केतु सप्तम भाव में असामान्य प्रेमसंबंध जैसे लड़की बड़ी उम्र की होना, या लड़का छोटी उम्र का होना या बहुत ही बड़ी उम्र के पार्टनर होना या इंटरकास्ट अफेयर होना आदि की स्थिति बनती है।

राधा कृष्ण से बड़ी थी।

कृष्ण की सभी गोपियाँ कृष्ण से या तो बड़ी थी या छोटी थी, कोई बराबर भी थी।

कृष्ण का विवाह रुक्मणि के साथ हुआ तो भाग कर हुआ।

कृष्ण की 16108 पत्नियां थी, राहु के कारण थी, क्योंकि सप्तम का राहु किसी एक के साथ सम्बन्ध निश्चित नहीं करता है, मल्टीरिलेशन का योग बनता है।

[9] एकादश भाव से बृहस्पति की नवम दृष्टि सप्तम भाव पर है इसलिए कृष्ण ने किसी भी स्त्री के साथ छल नहीं किया, धोखा नहीं दिया, आदरपूर्वक सभी को बराबर प्यार किया।

बृहस्पति की दृष्टि के कारण श्रीकृष्ण का प्यार एक लॉयल्टी वाला प्यार था।

जिस भी गोपी से शादि की उसे कभी दुःख नहीं होने दिया।

[10] पँचम भाव में उच्च बुध और उसके साथ अष्टमेश तथा लाभेश  बृहस्पति का दृष्टिसम्बन्ध होने के कारण श्रीकृष्ण की बुद्धि का कोई तोड़ नहीं था।

बहुत ज्यादा बुद्धिमान और आध्यात्मिक चरित्र था।

[11] अष्टमेश गूढ़ और रहस्यमयी बातों का कारक भी होता है, अष्टमेश बृहस्पति के साथ द्वितीयेश बुध का सम्बंध बता रहा है कि कृष्ण की वाणी हमेशा सीक्रेट्स को ओपन करने वाली थी, गूढ़ बात कहने वाली वाणी थी।

#श्रीमद्भागवत_गीता का ज्ञान बुध और बृहस्पति के कारण कहा गया था।

[12] नवम में उच्च मंगल के कारण पत्नियां हमेशा सुन्दर मिली और धार्मिक ज्ञान की कमी कोई नहीं रही, सांदीपन जैसा गुरु मिला और उच्च मंगल के कारण इतना जोश था कि 64 दिन में 64 विद्याएँ सीख ली।

[13] भाग्य का स्वामी शनि षष्टम भाव में शुक्र के साथ है।

कृष्ण का भाग्य शत्रुओं से ही चलता था, कृष्ण के जीवन में देखें तो बच्चपन से मृत्यु तक शत्रु ही जुड़े रहे।

छठा भाव मामा का होता है और कंस मामा ही सबसे बड़ा शत्रु निकला, उसी मामा से कृष्ण की किस्मत चमकना शुरू हो गई।

मामा ने जितना पंगा लिया, कृष्ण लीला उतनी ही बढ़ती गई।

महाभारत के युद्ध मे सबसे बड़ी चतुराई कृष्ण की थी।

द्वादश भाव भोगों का होता है जिस पर शुक्र की दृष्टि होने के कारण श्रीकृष्ण को गोपियों की कमी नहीं थी।

शुक्र चतुराई का कारक है, कुटिलता और चतुराई का तालमेल कृष्ण के अंदर बहुत ज्यादा था इसलिए कृष्ण से बड़ा राजनीतिज्ञ कोई नहीं हुआ, साम दाम दण्ड भेद छल बल सब कुछ कृष्ण ने इस्तेमाल किया।

जो मर्जी युद्ध हो, जीत हमेशा कृष्ण की हुई।


पैदा होने से लेकर मृत्यु तक कृष्ण के शत्रु खत्म नहीं हुए।

पैदा भी शत्रु के घर में हुए और 119 वर्ष की आयु में पूर्वजन्म के शत्रु के हाथों ही मारे गए।


कृष्ण की कुण्डली के पॉइंट्स बहुत सारे निकल जाएंगे, लेकिन अब लिखने का मन नहीं कर रहा है


श्रीकृष्ण की कुण्डली जैसे योग बहुतों की कुण्डली में मिल जाएंगे और उनकी आदतें भी कुछ हद तक वैसी ही होंगी।

लेकिन परफैक्ट कृष्ण कोई नहीं है।

कृष्ण की रासलीला समझने के लिए आध्यात्म की समझ चाहिए।

औरतों के साथ सोने से कोई कृष्ण नहीं बन जाता।

कुटिलता करने से कोई कृष्ण जैसा राजनीतिज्ञ नहीं बन जाता है।



वो मत करो जो कृष्ण करता है।

वो करो जो कृष्ण कहता है।


हो सके तो श्रीमद्भागवत गीता पढ़ लें।

Wednesday, July 3, 2019

गूढ़भावी योग

#गूढ़_भावी_योग।


इस योग वाला जातक #छिपी हुई बातों और #रहस्यों को समझ के उनको #उजागर करता है।


#गूढ़ता किसी भी प्रकार की हो सकती है।

एक #इंटेलिजेंस_ब्यूरो वाला भी किसी केस की गूढ़ता को समझ कर उसे #सॉल्व करता है।

एक #वैज्ञानिक भी किसी ना किसी चीज की खोज कर के किसी ना किसी #सिद्धांत को उजागर करता है।

विज्ञान के क्षेत्र में खोज अष्टम भाव से और अविष्कार पँचम भाव से देखे जाएंगे।


एक तान्त्रिक किसी के बारे में उसकी छिपी हुई बातों को उजागर करता है।

किसी तान्त्रिक की बॉडी में कोई देवी देवता आकर बोलता है तो वो भी किसी व्यक्ति के छुपे रहस्य खोल देता है।


किसी सिद्ध पीठ या मन्दिर में ऐसे व्यक्ति मिल जाते हैं जिनकी बॉडी में कोई शक्ति आकर बोलती है और ऐसी ऐसी बातें बताती है कि जो उस व्यक्ति के अलावा किसी को मालूम ना हो।

उस पर किये गए तन्त्र मन्त्र आदि की जानकारी भी उस शक्ति का माध्यम से मिल जाती है।

भविष्य सम्बन्धी घटना का भी जिक्र उस शक्ति का द्वारा किया जाता है जो बॉडी में आकर बोलती है।



ये एक लड़का टाइगर मलिक है जिसके अंदर भी एक शक्ति आकर बोलती है और इसी प्रकार की गूढ़ जानकारी  को किसी के सामने बोलती है।

इसके अन्दर #लखदाता_पीर आता है और बोलता है।

कुछ तान्त्रिक इन शक्तियों की साधनाओं के जरिये साध कर अपनी बॉडी में बुलाते हैं तो कुछ लोगों पर ये शक्तियाँ खुद ही आना शुरू कर देती हैं।

जैसे इस लड़के के साथ हुआ है, इसने की साधना नहीं की, लेकिन इसके सन्दर खुद लखदाता आता है।


लड़कियों के साथ भी ऐसा होता है कि उन पर भी कोई भूत, प्रेत, यक्ष, जिन्न आदि फिदा होता है और उनके साथ रहने लगता है।

उनसे या तो बात कर के सब बताता है या उनकी बॉडी में आकर बोलता है।

ये शक्तियाँ साधक के साथ बात कर के उसे तान्त्रिक क्रिया का विधान भी सिखाती हैं।

बहुत से गूढ़ रहस्य बताती है।


अगर किसी की आँखों में आपको अपना प्रतिबम्ब उल्टा दिखे तो समझो कि उसके ऊपर किसी नेगिटिव शक्ति का साया है।

इतनी छोटी चीज कोई नोटिस नहीं करता कि आँखों मे प्रतिबिंब देखे।

लेकिन ये भी एक गूढ़ बात है जो सबको पता नहीं होती।


बहुत ही शॉर्टकट जैसी चीजें इन शक्तियों के द्वारा बताई जाती है।


इस प्रकार ये किसी के बारे में उसकी बहुत सारी बातें बताती हैं चाहे वो भूत भविष्य से सम्बन्धित हो।


किसी को भूत लगना और भूत कंट्रोल करना, दोनों अलग अलग स्थितियाँ हैं।

जिसको भूत लगता है उसे भूत का असर आने पर कुछ पता नहीं लगता है, और जिसको भूत या कोई दूसरी शक्ति कंट्रोल करना आती है तो उसे शक्ति का असर आने पर सब क्लियर दिखता भी है और समझ भी आता है।


इस लड़के की बात आप इसके मैसेज में पढ़ सकते हैं।


गूढ़ता और रहस्य अष्टम भाव से देखे जाते हैं।


अष्टम भाव में कोई ग्रह हो तो एक तरफ से वो ग्रह परेशान करेगा लेकिन दूसरी तरफ से किसी ना किसी माध्यम से सीक्रेट्स को ओपन करेगा।

किसी ग्रह की दृष्टि अष्टम भाव पर होगी तो भी वह सीक्रेट्स ओपन करेगा।


रहस्य का सबसे बड़ा कारक राहु है इसका प्रभाव अष्टम में हो तो जातक गुप्त शक्तियों की साधना करता है, तन्त्र मन्त्र का ज्ञान रखता है।

अन्य ग्रह भी इसमें सहायक होते हैं, ग्रह स्थिति के अनुसार सबकी स्थिति गूढ़ता पर अलग अलग होगी।


जैसे कि चाणक्य का उदाहरण लें तो उसके लिखे नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र में बहुत बड़ी गूढ़ता है।


#आचार्य_रजनीश #ओशो के अष्टम भाव में 5 ग्रह थे, उसकी गूढ़ता के आध्यत्मिक दर्शन शास्त्र देख लो।

इस लड़के की कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 17 नवम्बर 1997
समय - 02:47 बजे मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] कन्या लग्न की कुंडली में अष्टमेश मंगल और भाग्येश शुक्र एक साथ चतुर्थ केन्द्र में बैठे हैं।

गूढ़ता और भाग्य एक साथ है, मतलब धार्मिक ज्ञान और सीक्रेट्स आपस मे जुड़े हैं।

जो भी गूढ़ता उजागर होगी वो धार्मिक माध्यम से उजागर होगी।

इस लड़के में लखदाता पीर आता है और बोलता है।

[2] दशम भाव के चन्द्रमा से मंगल शुक्र का दृष्टिसम्बन्ध है।

मन के कारक चन्द्रमा से जब भाग्य औए गूढ़ता मिश्रित हो रही है तो इसका मन कुदरती तौर पे ऐसी शक्तियों की तरफ खींचा जाएगा और ऐसा ही इसने लिखा भी है।

[3] इसको शायरी का शौक है जो चन्द्रमा और शुक्र के दृष्टिसम्बन्ध से स्पष्ट हो जाता है।

[4] भावात भावम सूत्र के अनुसार अष्टम से अष्टम अर्थात तृतीय भाव भी अष्टम भाव का फल दर्शायेगा।

तृतीय भाव में बुधादित्य योग बना है और इसकी दृष्टि नवम भाव पर धार्मिक ज्ञान में वृद्धि कर रही है, आधयात्मिक चमत्कार दर्शा रही है।

[5] अष्टम भाव पर राहु की नवम दृष्टि है और अष्टमेश मंगल, भाग्येश शुक्र पर भी राहु की पँचम दृष्टि है।

रहस्य का सबसे बड़ा कारक राहु इसको ऐसा प्रभाव दे रहा है कि ये रहस्यों को समझने में सक्षम हो जाएगा।


[6] ये सारे पॉइंट्स इसको ऐसा बना रहे हैं कि इसमें आकर कोई शक्ति बोलेगी भी और ये उसको कंट्रोल भी करेगा।

प्रेतबाधा योग

#प्रेत_बाधा


प्रेत बाधा के अलग अलग प्रभाव देखे जा सकते हैं।


कोई हमेशा बीमार ही रहता है, दवाई असर नहीं करती है।

कोई पागलों की तरफ बड़बड़ाता है, कोई सुधबुध खोकर बावला बना रहता है।

कोई झगड़ा करता है तो किसी की बॉडी में प्रेत आकर बोलना शुरू करता है।

प्रेत बाधा वालों में #शनि, #राहु और #केतु का प्रभाव देखा गया है।


ये दो कुण्डलियाँ एक लड़के और एक लड़की की है।


दोनों ने प्रेत बाधा का सामना किया है।


दोनों को ही किसी अदृश्य शक्ति के साथ शारीरक सम्बन्ध बनते हुए महसूस हुए हैं।


लड़के की हालत तो इतनी खराब थी कि उसकी बॉडी पर दाँतो के निशान भी मिलते थे।

कोई अदृश्य शक्ति उसे दाँतो से काटती थी।


बहुत से जातक ऐसे देखे हैं जिनकी अलग अलग कंडीशन
एक जातक को देखा था जिसे पूरी बॉडी पर नाखून की खरोंचें लगी होती थी।

एक जातक को दाँतों तैर पूरी बॉडी में के जॉइंट्स में बहुत ज्यादा पेन होता था।

ना डैंटिस्ट को कोई बीमारी दिखती दाँतों में और ना डॉक्टर को जॉइंट्स में प्रॉब्लम नजर आती थी।


एक लड़के को किसी ने भूतनी, डाकिनी, शाकिनी टाइप की कोई फीमेल चीज लगाई थी और उसे लड़के को ऐसा फील होता था जैसे कोई औरत जबरदस्ती उसे साथ शारीरक सम्बन्ध बना रही है।


जब वो लड़का रात को सोता था तो उसके सारे शरीर मे दर्द शुरू हो जाता था जैसे कोई उसकी बॉडी को जकड़ के दबा रहा है।

उसके सैक्सुअल ऑर्गन में खुद ही इरेक्शन हो जाती थी और ऐसा लगता था जैसे कोई स्त्री उसके साथ जबरदस्ती सम्भोग कर रही है, लेकिन वो उस लड़के को बहुत ज्यादा तकलीफदायक लगता था।

थोड़ी देर बाद लड़के की बॉडी से जब स्पर्म निकलता था तो ऐसा लगता कि जैसे किसी ने सिरिंज डाल के जबरदस्ती स्पर्म निकाल दिया हो।

रोज ही उसके कपड़े गन्दे हो जाते थे और लड़का कमजोर होना शुरू हो गया था।


रात के समय लड़के को जब ऐसा होता था तो उसे कोई औरत ही उसके साथ जबरदस्ती सम्भोग करती हुई दिखती थी जो बुरी तरह से हँसती थी।



सेम ऐसा ही मेरी एक क्लासमेट लड़की के साथ हुआ था।

उसको ऐसा लगता था जैसे रात को जबर्दस्ती उसका बलात्कार हो रहा है, जबरदस्ती उसकी ऑर्गन में मेल ऑर्गन का पेनिट्रेशन महसूस होता था और वो चिल्लाती थी।

[ उसका कुण्डली ऐनालिसिस लिंक नीचे दिया है ]


जाहिर सी बात है जब बिना इच्छा किसी प्रेत शक्ति से शारीरक सम्बन्ध बनता हुआ महसूस हो तो तकलीफ़ हो जाएगी और मानसिक सन्तुलन बिगड़ जाएगा।



2 कुण्डलियाँ हैं जिनके एक्सपीरियंस लिखे हैं।


कुण्डली नम्बर 1 -

9 मार्च 1996 समय 8:15 बजे [मण्डी]


[1] लग्न में शनि ही प्रेत बाधा कारक शनि और केतु मानसिक परेशानी तथा प्रेत बाधा दे रहे हैं।

[2] सप्तम भाव में राहु है जो प्रेत शक्ति के साथ अनैच्छिक शारीरक सम्बन्धो से मिलने वाली तकलीफ दर्शा रहा है।


कुण्डली 2 -

1 फरवरी 1995 समय 00:15 बजे

[1] लग्न में राहु ने ही प्रेत बाधा दे दी है, बुरे बुरे सपने आते हैं।

[2] सप्तम भाव में केतु है तथा शनि की दृष्टि है जो प्रेत शक्ति द्वारा बनाये जा रहे अनैच्छिक शारीरक सम्बन्धों के कष्ट के दर्शा रहा है।


प्रेत बाधा आपको डायरेक्ट या इनडायरेक्ट दोनों तरीकों से परेशान कर सकती है।


[1] डायरेक्ट - आपको स्वयं को परेशानी है प्रेत बाधा के कारण।

[2] इनडायरेक्ट - आपके किसी पारिवारिक सदस्य को प्रेत बाधा होगी तो भी आप परेशान ही होंगे।


अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएं -
। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2154264401457432&id=100006216785535

शस्त्राघात योग [उरी ]

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳#जय_हिन्द🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳


आज की कुंडली एक🇮🇳💣💥 #वीर_जाँबाज_फौजी 💥💣🇮🇳की है।


सरकारी मामलों की वजह से फौजी को टैग नहीं किया गया है और ना फौजी के अकाउंट का लिंक दिया गया है।

फौजी का नाम - #विक्रम_सिंह

💣【 #आर्म्ड_कोर 】💣

🇮🇳🇮🇳#भारतीय_सेना🇮🇳🇮🇳 में 🚀#टैंकर🚀 चलाता है।




जब 12 अप्रैल 2017 को शाम 3:03 बजे आतंकियों ने #उरी में हमला किया तो इस जवान की ड्यूटी भी उरी में ही थी।


सेना पर अचानक #आतंकी_हमला हुआ और #जंग शुरू हो गई।


4 घण्टे की उस जंग में विक्रम सिंह भी फौजियों के साथ जंग में डटा रहा।

जब आखिर के #डेढ़_घण्टे की जंग बाकी थी तो विक्रम सिंह की  #दाईं_जांघ पर #गोली लग गई।

लेकिन विक्रम सिंह ने गोली की परवाह ना करते हुए भी लगतार #फायरिंग जारी रखी।

4 घण्टे की उस जंग में शुरू से आखिर तक आतंकियों पर #ताबड़तोड़_फायरिंग जारी रखी।


टाँग जख्मी हो गई लेकिन बन्दे का #दम नहीं टूटा।


#लँगड़ी हालत में भी डेढ़ घण्टे तक #मैदान में डटा रहा।


गोली ने लगने के बाद भी अपने पैरों पर खड़ा रहा।

जब अपनी जांघ को देखा तो गोली लगने की जगह से #पैंट_के_परखच्चे उड़ गए थे और जाँघ से #पट्ट_का_माँस भी #उखड़ गया था।


हौंसला देखो फौजी का - कहता है कि बिगड़ा क्या है ?


जंग खत्म होते होते सारे कपड़े खून से लथपथ थे जूता भी खून से भर गया था।


जंग खत्म हो गई थी।


विक्रम सिंह को चक्कर आने लगा था क्योंकि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण कमजोरी आ गई थी।


विक्रम सिंह को हॉस्पिटल ले जाया गया और ट्रीटमैंट शुरू हुआ।


घर में ये बताया गया कि लम्बे समय के लिए ड्यूटी कहीं बाहर लगी है।

1 साल लगे इस जवान को ठीक होने में।


तब तक घर से दूर।


आजकल ये जवान इण्डियन आर्मी में देश के लिए अपनी सेवाएँ दे रहा है।


उसी #दमखम के साथ #भारत_माता_का_लाल #सरहद पर #सीना_तान_के_खड़ा है।


🙏धन्य हैं वो माता पिता जिनके घर एक फौजी जन्म लेता है🙏



इस बहादुर की कुण्डली के कुछ पॉइंट्स जो #शस्त्राघात को स्पष्ट करते हैं।


जन्म - 18 सितम्बर 1992
समय - सुबह 9:00 बजे
स्थान - नंगल


#अंगारक_योग का दूसरा रूप #शस्त्राघात_योग है।


मंगल के साथ राहु केतु हो तो अंगारक योग बनता है, इसी योग को आप शस्त्राघात योग भी कहेंगे।

मंगल रक्त होता है और केतू चीरे चोट का कारक होता है।

जब चीरा या चोट लगेगी तो रक्त बहेगा ही।


इस योग वाले व्यक्तियों को हथियारों के साथ विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।


ऐसे लोगों को कभी कैंची से चीरे लगते हैं कभी ब्लेड से तो कभी छुरी से



शस्त्राघात किस प्रकार का होगा इसका अनुमान कुण्डली में स्थित ग्रहों के भाव तथा राशियों के तत्व को देखकर स्पष्ट हो सकता है।


अंगारक योग अग्नितत्व की राशि मे हो तो बम से जख्मी हो सकते हैं क्योंकि आग बम से ही निकलेगी।

यदि यह योग जल तत्व की राशि मे हुआ तो लचीले हथियार से हमला हो सकता है जैसे कि किसी को चाबुक से मारा जाए।

यदि योग पृथ्वी तत्व की राशि में हुआ तो पैने हथियार जैसे तलवार,छुरा आदि मारा जा सकता है या डण्डे से सिर फोड़ दिया जाए।

वायु तत्व की राशि में हो तो हवा में गति करने वाले हथियार जैसे बाण या बन्दूक की गोली आदि से हमला होगा।


जिस भाव में यह योग बने उस भाव का अंग कालपुरूष की कुण्डली में देखकर शरीर के भाग का अनुमान लगाया जा सकता है।



[1] तुला लग्न की कुंडली में मंगल और केतु नवम भाव में अंगारक और शस्त्राघात योग बना रहे हैं।

[2] नवम भाव कालपुरूष की कुण्डली में जाँघ का होता है।

[3] नवम भाव में वायु तत्व की मिथुन राशि बनी है।


सीधा स्पष्ट हो रहा है कि शस्त्र का आघात जाँघ पर होगा और हवा में गति करने वाले शस्त्र से आघात होगा और बन्दूक की गोली लगी है


[4] चतुर्थ भाव में स्वगृही शनि से शशक महापुरुष राजयोग बना है।

[5] षष्टम भाव का स्वामी बृहस्पति द्वादश भाव में जाकर विपरीत राजयोग बना रहा है।

[6] द्वादश का स्वामी बुध द्वादश में ही उच्च राशि में है।

[7] अष्टम भाव का स्वामी भी द्वादश में ही है नीच राशि का है लेकिन बुध के कारण नीचभंग होकर विपरीत राजयोग बना है।

जब इतने विपरीत राजयोग बने हैं तो व्यक्ति दुश्मनों से वीरता के साथ जंग करेगा ही।



जब तक देश में पुलिस और सरहद पर फौजी हैं तब तक हम सुरक्षित हैं।


🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिन्द जय भारत🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳