Friday, August 30, 2019

दिग्बल योग

#दिग्बल_योग
जन्म कुण्डली में यदि 3-5 ग्रह अपने दिग्बल स्थान में हो तो दिग्बली योग बनता है।
ऐसा जातक #बड़ा_पदाधिकारी बनता है।
समाज मे प्रतिष्ठित माना जाता है।
धन सम्पति सभी कुछ पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
लग्न में - बृहस्पति तथा बुध।
चतुर्थ में - चन्द्रमा तथा शुक्र।
सप्तम में - शनि।
दशम में सूर्य तथा मंगल दिग्बली होते हैं।
इस योग में #शनि_को_इग्नोर किया जाता है, क्योंकि शनि विछेदात्मक है।
सप्तम भाव का शनि दिग्बली बेशक है लेकिन स्त्री से वियोग करवाता है, उस समय कष्ट होता है इसलिए शनि को दिग्बली होते हुए भी इस योग में नहीं गिना जाता है।
दिग्बली योग वाले सफल क्यों होते हैं?
क्योंकि ग्रह #केन्द्र_के_भावों में ही दिग्बली होते हैं।
जब भी महादशा अंतर्दशा आती है तो मैक्सिमम केन्द्र के ग्रहों की आती यही और केंद्र के ग्रह एक दूसरे से चतुर्थ, सप्तम और दशम में होते हैं जिसके कारण बहुत अच्छा फल मिलता है।
ये कुण्डली एक #हार्ट_स्पेशलिस्ट_डॉक्टर की है।
इस कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-
जन्म - 28 अप्रैल 1991 
समय - 11:43 बजे 
स्थान - अम्बाला
[1] लग्न में बृहस्पति उच्च राशि का है तथा दिग्बली है।
[2] चतुर्थ भाव में लग्न का स्वामी चन्द्रमा केन्द्र में मित्र शुक्र की राशि में दिग्बली है।
[3] दशम भाव में द्वितीय भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में अपनी उच्च राशि मे दिग्बली है।
[4] सप्तम भाव में शनि अपनी मकर राशि मे दिग्बली है लेकिन इसे इस योग में इग्नोर किया जा रहा है।
[5] परिभाषा के अनुसार 3 ग्रह इस कुण्डली में दिग्बली हैं।
[6] 5 ग्रह इसमें तब दिग्बली हो सकते थे जब हो सकते थे यदि लग्न में बुध तथा बृहस्पति, चतुर्थ में शुक्र तथा चन्द्रमा, दशम में मंगल हो।
इस स्थिति के अलावा कोई भी स्थिति ऐसी नहीं होगी जो 5 ग्रहों का दिग्बल योग बना दे।
इसलिए कम से कम 3 और अधिक से अधिक 5 ग्रह दिग्बल योग में माने जाते हैं।
[7] धन का स्वामी सूर्य दशम भाव में सरकार द्वारा धन लाभ दे रहा है, करियर भाव में मेडिकल का कारक ग्रह सूर्य डॉक्टरी करियर दे रहा है।
[8] सप्तम भाव में मेडिसिन और मेडिकल का कारक ग्रह शनि लग्न को दृष्टि देकर डाक्टरी के गुण दे रहा है।
[9] चतुर्थ का दिग्बली चन्द्रमा चतुर्थ भाव में है जिससे हार्ट सम्बन्धित रुचि पैदा हुई है।
[10] लग्न का दिग्बली बृहस्पति पंचम को देख रहा है तथा एकादश भाव से शुक्र भी पंचम को देख रहा है जिसके कारण शिक्षा अच्छी हुई है।
[11] पंचम का स्वामी मंगल केतु के साथ है, शिक्षा में कुछ रुकावट रही है लेकिन केतु मंगल दोनों ही सर्जन ग्रह हैं, इन दोनों की युति वाला जाता चीरफाड़ में एक्सपर्ट होता है।
तृतीय भाव पर मंगल को दृष्टि से ऑपरेशन करने में सधा हुआ हाथ बना है।
ग्रह बहुत अच्छे हैं इसलिए डॉक्टरी चीरफाड़ में एक्सपर्ट बना रहा है।
यदि ग्रह खराब होते तो कसाई वाली चीरफाड़ भी होती है या कातिल वाली वृति भी होती है जो किसी को भी चाकू, तलवार या छुरे से फाड़ काट दे।
जो सरकारी जॉब का योग भी स्पष्ट है, धन भी पर्याप्त है।
ज्ञान पर्याप्त है।
[12] राहु छठे भाव में हो और केंद्र में बृहस्पति हो तो #अष्टलक्ष्मी_योग बनता है, चन्द्रमा बृहस्पति से केन्द्र में है जो #गजकेसरी_योग बना रहा है, चन्द्रमा से दशम बृहस्पति #अमलकीर्ति_योग बना रहा है।
 इसलिए यह जातक धन से समृद्ध, समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति और बड़ा पदाधिकारी बनेगा 
इसलिए कुण्डली बहुत अच्छी कह सकते हैं।

गूँगेपन का योग

#गूँगेपन का योग।
द्वितीय भाव से वाणी का विचार किया जाता है।
वाणी कारक ग्रह बुध से भी विचार किया जाता है।
यदि कुण्डली में द्वितीय भाव का स्वामी नीच हो
या द्वितीय भाव में नीच ग्रह हो
तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि ना हो।
द्वितीय का स्वामी वक्री अथवा अस्त हो 
तो वाणी में कोई ना कोई विकार निकलता है।
चाहे जातक हकलाता हो या तुतलाता हो या गूँगा भी हो सकता है।
यदि द्वितीय भाव का स्वामी कुछ अच्छी अवस्था में हो
तो समय के साथ वाणी में सुधार भी हो जाता है
लेकिन पूर्णतया निर्दोष वाणी नहीं बन पाती।
ये जिस बच्चे मि कुण्डली है वो बच्चपन में थोड़ा बहुत बोलता था लेकिन 3-4 साल बाद इसकी आवाज बन्द हो गई।
बच्चा अब नहीं बोल पायेगा।
इस कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।
जन्म - 4 मार्च 2010 
समय - 21:26 बजे
स्थान - जैफरसन सिटी ( यूनाइटेड स्टेट ) 
[1] बच्चा क्यों बोला ?
(1) वाणी स्थान का स्वामी मंगल दशम भाव में वक्री तथा नीच है लेकिन चन्द्रमा का केन्द्र में जाने से मंगल का नीच भंग होने के कारण बच्चे में बोलने की कुछ हद तक सामर्थ्यता थी।
(2) वाणी का स्वामी दिग्बली है जिसके कारण स्थानबल मिला है लेकिन मंगल को कोई दूसरा शुभ बल प्राप्त नहीं है इसलिए ये कम बोल पाया।
[2] बच्चा क्यों नहीं बोलेगा ?
(1) द्वितीय भाव पर वक्री शनि की शत्रु दृष्टि से।
(2) #भावात_भावम का सूत्र लगाने पर द्वितीय से द्वितीय भाव अर्थात तृतीय भाव का स्वामी बृहस्पति अस्त है तथा तृतीय भाव में राहु नीच राशि का नकारात्मक फल दे रहा है।
(3) वाणी कारक बुध भी अस्त है।
(4) द्वितीय भाव पर वक्री ग्रह शनि की दृष्टि तथा द्वितीय का स्वामी नीच राशि का वक्री होकर अपने से पिछले भाव मे बैठे नीच केतु का फल भी दे रहा है, वाणी में विकृति या दोष रहेगा।
(5) द्वितीय भाव पर तथा द्वितीयेश पर किसी भी प्रकार के शुभ ग्रह का दृष्टिबल नहीं है।
(6) मंगल भिनाष्टक वर्ग में वाणी के स्वामी मंगल की द्वितीय भाव पर शून्य रेखा है।
(7) वाणी कारक बुध अस्त है तथा नीच द्वितीयेश मंगल से दृष्ट है वाणी विकृत कर रहा है, बोलने की क्षमता कम होगी।
। 
#निष्कर्ष -
बोल पाने के पॉजिटिव पॉइंट्स कम है तथा ना बोल पाने के नकारात्मक पॉइंट्स अधिक हैं।
यदि बालक पहले बोलता था तो अब नहीं बोल पायेगा क्योंकि बोलने वाले सकारात्मक बिंदु का फल मिल चुका है।
आयु के साथ बढ़ते हुए नकारात्मक बिन्दु का प्रभाव मिलता रहेगा। किसी बड़े पूजा अनुष्ठान आदि से यदि बालक बोल पाया तो भी वाणी कारक बुध अस्त होने के कारण हकलाहट बहुत अधिक रहेगी तथा स्पष्ट वाणी नहीं निकलेगी।
#अतः_बालक_नहीं_बोल_पायेगा।

Wednesday, August 7, 2019

झूठ से कमाया धन या लाभ बहुत अधिक हानि देता है।

 आपने #झूठ_बोलकर_कमाया है तो वो #पैसा_या_लाभ आपको #बहुत_ज्यादा_दुःख_देकर_समाप्त_होगा।


कुण्डली में #द्वितीय_भाव #वाणी_तथा_धन_संचय का होता है।

#एक्सपीरियंस

कुछ बातें जो मैंने कुण्डली और लोगों के व्यवहार  में देखी है।


आपकी वाणी भले ही कड़वी है लेकिन अगर वो सच्ची है तो किसी की मजाल नहीं जो आपका चवन्नी का भी नुक्सान कर जाए या व्यर्थ हो जाये।


मीठी वाणी अगर झूठी है तो आप जितना मर्जी अपना पैसा बचाने की कोशिश करो, जितना मर्जी पूजा पाठ उसके लिए कर दो तो भी आप उस झूठ से मिले धन को संचय नहीं कर सकते।

वो धन आपसे बीमारी या दुर्घटना में खर्च हो जाएगा।

कोई आपसे मांगे तो आप मुकर जाओगे लेकिन जब शरीर टूटेगा तो धन निकालना ही पड़ेगा।


आपका धन ईमानदारी का है, सच बोल के कमाया है वो आपको छोड़कर नहीं जायेगा, किसी ने उधार लिया तो सही सलामत सही समय पर वापस आएगा।

द्वितीय भाव में शुभग्रह हो अच्छा हो तो आपको कभी झूठ बोलने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और धन की कमी भी नहीं आएगी।
 ।

कुछ अपनी वाणी की चतुराई दिखाने के चक्कर में आपका यूज करेंगे, लेकिन जब भी आपको एहसास हो कि ये वाणी की चतुराई से मेरा इस्तेमाल कर गया तो समझ जाना उसका राहु अब धड़ाका करने वाला है।

उसे कुछ मत बोलो, उसे कुछ ही समय में खुद ही सब नजर आ जायेगा।

कोई झूठ बोलकर आपका समय बर्बाद करेगा, आपको यूँ ही परखता रहेगा झूठ बोल के।

ऐसा आदमी पैसे का बहुत धोखा खायेगा इसमें शक नहीं है।


आजकल लोग चैक भर के दे देते हैं और उनके अकाउंट में पैसा नहीं होता है, सामने वाला चैक को कोर्ट में लगा देता है।

उम्मीद से दुगना तिगुना नुक्सान ऐसे फ्रॉड चैक के लिए झेलना पड़ता है।


ऐसा क्यों होता है ?

द्वितीय भाव में राहु केतु या नीच ग्रह होना इसका कारण है, धन के मामले में पहले तो झूठ बुलवाया।

सामने वाले ने कोर्ट में लगा दिया, उसके बाद जो उसका समय बर्बाद किया आदि जैसे नुक्सान किये उसका जुर्माना भी भरना पड़ा।

राहु ने छल से अमृत पी लिया था लेकिन हजम नहीं हुआ।

सिर कटवा दिया ख़ामख़ा में।

राहु भले ही झूठ बोल दे लेकिन सूर्य (सरकार) उस झूठ को पकड़ के दण्ड दे देगा।


आँखों देखी बात है।


एक व्यक्ति की कुण्डली में द्वितीय भाव का नीच राहु था।

उसने ने अपने भाई के साथ पैसे के मामले में ₹70000/- की हेराफेरी की थी और ये बात मुझे स्पष्ट रूप से पता थी।

उसके भाई को मैंने इतना ही कहा था कि इसका राहु चला है, 8 महीने रुक जा।


4-5 महीने बाद ही उसके बेटे ने गाड़ी चलाते हुए स्कूटी पर जाने वाली लड़की को टक्कर लगा दी।

लड़की की टांग और पसलियाँ टूटी।


गाड़ी चलाने वाला लड़का 15-16 साल का।

बिना लाइसेंस के गाड़ी चला रहा था।


जैसे ही घर में फोन आया तो उन बन्दे के होश उड़ गए।

जब तक वहाँ पहुँचा तब तक लड़की के माँ बाप ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी थी।

लड़की हॉस्पिटल में ट्रॉमा वार्ड में एडमिट हो गई।

पुलिस के मामले में #व्हीकल_एक्ट  आदि का पंगा।

लड़की के इलाज का सारा खर्च उठाने को राजी हो गया।


इस मामले से उलझते सुलझते 3-4 महीने लगे, लड़की की टाँग ठीक होने में भी 5-8 महीने लगे।


सिर्फ ₹70000/- का ही चूना अपने भाई को लगाया था।

4-5 लाख तक देना पड़ गया।


वो 4-5 लाख पता नहीं किस किस को झूठ बोलकर कमाया था।

जब वो पैसा गया तो मानसिक रूप से बहुत ज्यादा दुख देकर गया।

उम्मीद से ज्यादा घातक नुक्सान के साथ समाप्त हुआ।