#दिग्बल_योग
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जन्म कुण्डली में यदि 3-5 ग्रह अपने दिग्बल स्थान में हो तो दिग्बली योग बनता है।
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ऐसा जातक #बड़ा_पदाधिकारी बनता है।
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समाज मे प्रतिष्ठित माना जाता है।
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धन सम्पति सभी कुछ पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
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लग्न में - बृहस्पति तथा बुध।
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चतुर्थ में - चन्द्रमा तथा शुक्र।
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सप्तम में - शनि।
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दशम में सूर्य तथा मंगल दिग्बली होते हैं।
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इस योग में #शनि_को_इग्नोर किया जाता है, क्योंकि शनि विछेदात्मक है।
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सप्तम भाव का शनि दिग्बली बेशक है लेकिन स्त्री से वियोग करवाता है, उस समय कष्ट होता है इसलिए शनि को दिग्बली होते हुए भी इस योग में नहीं गिना जाता है।
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दिग्बली योग वाले सफल क्यों होते हैं?
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क्योंकि ग्रह #केन्द्र_के_भावों में ही दिग्बली होते हैं।
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जब भी महादशा अंतर्दशा आती है तो मैक्सिमम केन्द्र के ग्रहों की आती यही और केंद्र के ग्रह एक दूसरे से चतुर्थ, सप्तम और दशम में होते हैं जिसके कारण बहुत अच्छा फल मिलता है।
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ये कुण्डली एक #हार्ट_स्पेशलिस्ट_डॉक्टर की है।
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इस कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-
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जन्म - 28 अप्रैल 1991
समय - 11:43 बजे
स्थान - अम्बाला
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[1] लग्न में बृहस्पति उच्च राशि का है तथा दिग्बली है।
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[2] चतुर्थ भाव में लग्न का स्वामी चन्द्रमा केन्द्र में मित्र शुक्र की राशि में दिग्बली है।
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[3] दशम भाव में द्वितीय भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में अपनी उच्च राशि मे दिग्बली है।
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[4] सप्तम भाव में शनि अपनी मकर राशि मे दिग्बली है लेकिन इसे इस योग में इग्नोर किया जा रहा है।
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[5] परिभाषा के अनुसार 3 ग्रह इस कुण्डली में दिग्बली हैं।
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[6] 5 ग्रह इसमें तब दिग्बली हो सकते थे जब हो सकते थे यदि लग्न में बुध तथा बृहस्पति, चतुर्थ में शुक्र तथा चन्द्रमा, दशम में मंगल हो।
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इस स्थिति के अलावा कोई भी स्थिति ऐसी नहीं होगी जो 5 ग्रहों का दिग्बल योग बना दे।
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इसलिए कम से कम 3 और अधिक से अधिक 5 ग्रह दिग्बल योग में माने जाते हैं।
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[7] धन का स्वामी सूर्य दशम भाव में सरकार द्वारा धन लाभ दे रहा है, करियर भाव में मेडिकल का कारक ग्रह सूर्य डॉक्टरी करियर दे रहा है।
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[8] सप्तम भाव में मेडिसिन और मेडिकल का कारक ग्रह शनि लग्न को दृष्टि देकर डाक्टरी के गुण दे रहा है।
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[9] चतुर्थ का दिग्बली चन्द्रमा चतुर्थ भाव में है जिससे हार्ट सम्बन्धित रुचि पैदा हुई है।
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[10] लग्न का दिग्बली बृहस्पति पंचम को देख रहा है तथा एकादश भाव से शुक्र भी पंचम को देख रहा है जिसके कारण शिक्षा अच्छी हुई है।
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[11] पंचम का स्वामी मंगल केतु के साथ है, शिक्षा में कुछ रुकावट रही है लेकिन केतु मंगल दोनों ही सर्जन ग्रह हैं, इन दोनों की युति वाला जाता चीरफाड़ में एक्सपर्ट होता है।
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तृतीय भाव पर मंगल को दृष्टि से ऑपरेशन करने में सधा हुआ हाथ बना है।
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ग्रह बहुत अच्छे हैं इसलिए डॉक्टरी चीरफाड़ में एक्सपर्ट बना रहा है।
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यदि ग्रह खराब होते तो कसाई वाली चीरफाड़ भी होती है या कातिल वाली वृति भी होती है जो किसी को भी चाकू, तलवार या छुरे से फाड़ काट दे।
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जो सरकारी जॉब का योग भी स्पष्ट है, धन भी पर्याप्त है।
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ज्ञान पर्याप्त है।
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[12] राहु छठे भाव में हो और केंद्र में बृहस्पति हो तो #अष्टलक्ष्मी_योग बनता है, चन्द्रमा बृहस्पति से केन्द्र में है जो #गजकेसरी_योग बना रहा है, चन्द्रमा से दशम बृहस्पति #अमलकीर्ति_योग बना रहा है।
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इसलिए यह जातक धन से समृद्ध, समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति और बड़ा पदाधिकारी बनेगा
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इसलिए कुण्डली बहुत अच्छी कह सकते हैं।


