Sunday, October 20, 2019

काव्य योग

#काव्य_योग

चन्द्रमा, शुक्र, बुध और बृहस्पति का प्रभाव
कुण्डली में लग्न, तृतीय, पँचम दशम भावों में हो
तो काव्य योग बनता है।

ऐसा जातक काव्य के गुणों वाला होता है।
लेखन कला अच्छी होती है।

लेखन कला की रुचि कुण्डली के ग्रहों पर निर्भर होती है
कि जातक को कैसा लेखन पसन्द है।

जातक को दार्शनिकता पसन्द है या कल्पना पसन्द है।

इन सब गुणों का निर्णय कुण्डली के ग्रहों के अनुसार होता है।

कुछ मंगल द्वारा प्रभावित व्यक्ति वीर रस से भरे होंगे
तो शनि वाले उदासीन कवि या लेखक होंगे।

शुक्र वाले श्रृंगार रस वाले होंगे तथा चन्द्रमा वाले कल्पना वाले होंगे।

बुध वाले मजकिया और तार्किक कटाक्ष वाले कवि या लेखक होते हैं।


#लेखक के लिए #तृतीय_भाव तथा #पँचम_भाव देखा जाता है।

जब दिमाग (पँचम भाव) में कुछ अच्छा होगा तभी तो हाथ (तृतीय भाव) कुछ लिखेंगे।

आपके हाथ क्या पसन्द पसन्द करते हैं?

यह तृतीय भाव तथा पँचम भाव पर निर्भर करता है।

अगर खुद का दिमाग इस्तेमाल करना ना आये और तृतीय भाव में लेखन वाले ग्रह का गुण हो तो जातक खुद को रचना ना लिखकर दूसरों के द्वारा लिखा गया ही कॉपी पेस्ट कर देता है।


लेखन या रचना के लिए #बृहस्पति (दार्शनिकता), #चन्द्रमा (कल्पना), #बुध (तर्क, व्यंग), #शुक्र ( सौंदर्य और सजावट ) की आवश्यकता होती है।


जिसके लग्न, तृतीय, पँचम, दशम भाव में इनका प्रभाव हो जाये तो जातक अच्छे सोच विचार से लिखता है।


प्रस्तुत कुण्डली DrAkhil Jain जी की है जो एक #डॉक्टर भी हैं तथा एक बहुत अच्छे #कवि भी हैं जो अक्सर #न्यूज_चैनल्स में अपनी कविताओं की प्रस्तुति देते हैं तथा #कवि_सम्मेलनों में #हास्यात्मक प्रस्तुति देते हैं।


इनकी कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -

जन्म - 9 अक्तूबर 1980
समय - दोपहर 12:06 बजे
स्थान - सागर मध्यप्रदेश


[1] सबसे पहली बात कि ये स्वयं एक डॉक्टर हैं और #टीवी_चैनल पर प्रस्तुति क्यों दे पाते हैं?

इसका कारण है इनकी कुण्डली में बहुत जबरदस्त राजयोग बना है जिसे #शँख_राजयोग कहते हैं।

शँख राजयोग के बारे में एक आर्टिकल लिख चुका हूँ जिसका लिंक ये है -

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2191600584390480&id=100006216785535

धनु लग्न की कुण्डली में दशम भाव में सूर्य बृहस्पति की युति से ये राजयोग बना है जिसके कारण इनको न्यूजचैनल्स में प्रस्तुति का अवसर मिलता है।

[2] दशम भाव में सूर्य और शनि दोनों मैडिकल वाले ग्रह हैं जो इनको डॉक्टर बना रहे हैं।


[3] अब बात आती है कवित्व की, तो इनके दशम भाव में बृहस्पति और चन्द्रमा का गजकेसरी योग है जिसके कारण चन्द्रमा की कल्पना को दार्शनिकता मिल गई।

दशम से बृहस्पति चन्द्रमा की चौथे भाव को सीधी दृष्टि जा रही है जो मन को मजबूत बना रही है क्योंकि चतुर्थ भाव मन से सम्बंधित होता है।

मन मजबूत होगा तभी तो कुछ स्थिरता आएगी और कुछ क्रिएट करने का मन करेगा।

[4] पँचम भाव बुद्धि का होता है जिस पर तर्क, व्यंग्य और हास्यात्मक रचना वाले बुध ग्रह की दृष्टि है जो मस्तिष्क में ऐसे ही तर्क वाले विचार, व्यंग्य वाले विचार उत्पन करेगा।

[5] नवम भाव में बैठे शुक्र की दृष्टि तृतीय भाव पर पड़ रही है जो कि हाथों और बाजुओं का होता है।

जब भुजाओं में कलात्मक ग्रह देखेगा तो बाजुओं में कला होगी, रचना होगी, मनोरंजन होगा, ऐसा जातक वाद्य बजाने में एक्सपर्ट, लेखन में एक्सपर्ट तथा चित्रकारी में भी एक्सपर्ट होता है।

[6] तृतीय भाव का स्वामी शनि द्वितीय भाव का स्वामी भी है जो दशम भाव में है।

द्वितीय भाव वाणी का होता है तृतीय भाव लेखन का होता है जिसका दशम भाव में जाकर लग्नेश बृहस्पति की युति सहित वाणी और पराक्रम से भी प्रसिद्धि दे रहा है।

तृतीय भाव के कारण कविता लिखी और द्वितीय भाव के कारण बोली।

[7] कवियों के कटाक्ष बहुत जबरदस्त होते हैं, कई बार तो सामने वाला नाराज भी हो जाता है।

इसका कारण वाणी स्थान में केतु होना है क्योंकि केतु वाणी स्थान में बहुत कड़वी और चुभने वाले वाक्यात निकालने में एक्सपर्ट बनाता है।

[8] इस प्रकार का योग अगर किसी और की कुण्डली में होता तो आवश्यक नहीं है कि वो कवि ही होता।

कला दूसरा क्षेत्र भी अपनाया जा सकता है।

लेखनकला, काव्यात्मकता, वादनकला, चित्रकला आदि कलाओं के प्रकार हैं।

देश, काल और पात्रता के अनुसार व्यक्ति कला की अन्य फील्ड भी चुन सकता है।

[9] ये स्वयं एक पत्रिका प्रकाशन के एडिटर भी हैं, इनके गुणों के कारण बहुत से लेखक या कवि इनसे अपनी रचनाओं में सुधार भी करवाते हैं।

कविता, दोहा, सवैया, छंद आदि कुछ भी हो, तुरन्त सुधार हो भी जाता है और तुरन्त क्रिएशन भी हो जाती है।

कारण यह है कि इन सब ग्रहों के कारण बुद्धि अच्छी है जिसमें रचनाओं को समझने की काबिलियत है और उसका सही उपयोग करना आता है।

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