#मारण_तन्त्र
।
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यदि सामने शेर है और आपके प्राण संकट में है तो शेर को मारना भी सही है।
।
लेकिन क्या किसी व्यक्ति पर तन्त्र क्रिया कर के मारना सही है?
।
।
#चाणक्य बहुत खतरनाक #तान्त्रिक भी था और एक उत्कृष्ट #ज्योतिषी भी था।
।
उसने #तन्त्रसिद्धि से #तीर पर लगाने के लिए ऐसा पॉइजन बनाया था कि जिसे भी वो तीर लगेगा वो पागल हो जाएगा और लोगों को काटना शुरू करेगा।
।
अगर इस पागल व्यक्ति को कोई भी काटने को ना मिले तो वो स्वयं को काटना शुरू कर देता और मर जाता।
।
जिन लोगों को वो पागल काटेगा वो भी उसी की तरह दूसरों को काटना शुरू कर देते और यदि कोई काटने का ना मिले तो स्वयं को काटकर मर जाते।
।
कारण - तीर में लगा हुआ #सिद्ध_रसायन जिसके असर से उन सबका ऐसा व्यवहार हो जाता।
।
।
सरल भाषा मे कहें तो शत्रु की पूरी सेना को मारने के लिए 1 तीर ही काफी था।
।
उसके बाद #चेन_रिएक्शन शुरू हो जाता।
।
1 तीर मारो और खुद भाग जाओ।
।
सब आपस एक दूसरे को काटना शुरू कर देते और जब कोई ना बचता तो खुद को काटते और मर जाते।
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#युद्ध_में_मारना_धर्म_है।
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फौजी को भी मारना बाद में सिखाते हैं, पहले खुद की जान बचाना सिखाया जाता है।
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डिफेंस में मारना पाप नहीं है।
।
।
लेकिन लोग युद्ध में कम और कहा सुनी में ही मारने पर उतर जाते हैं।
।
आगे हाथ पैर से ना मार सके तो छोटे मोटे #टोने_टोटके कर के दूसरों को परेशान किया जाता है।
।
ये बहुत ही ज्यादा गलत काम है।
।
मार ना पाए तो उस पर टोटके कर के दूसरी क्रियाएं करते हैं या किसी तान्त्रिक से करवाते हैं।
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#सतम्भन - गति रोक देना।
।
किसी का कारोबार ही ठप कर देते हैं।
।
उसकी जमीन या घर के आसपास कोई तन्त्र संबन्धी वस्तु या ताबीज गाड़ दिया जाता है, दुकान के बाहर गाड़ दो, या कोई अभिमन्त्रित वस्तु पर कार्यस्थल के आसपास फैंक फि जाती है।
।
सामने वाले का धन्धा चौपट तो कंगाली शुरु।
।
।
अपने कार्यस्थल के भीतर बाहर सफाई रखें, पूजा पाठ करें।
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#विद्वेषण - लड़ाई डाल देना।
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भाई भाई लड़े, पति पत्नी लड़े, बेटा बाप लड़े।
।
परिवार तितर बितर होना शुरू।
।
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#उच्चाटन - मन भटकाना।
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किसी का भी दिमाग अनबैलेंस कर देना और उसकी बुद्धिभ्रष्ट हो जाती है, वो आदमी भटकता रहता है, दिमाग से कमजोर हो जाता है, नशेड़ी बन जाता है, अब बर्बाद होने लगता है, पागल भी हो जाते हैं।
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कुछ तन्त्र प्रयोग तो ऐसे भी होते हैं कि पूरा परिवार उजड़ जाता है।
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#मारण - मारने के उद्देश्य से #भूत_प्रेत भी लगा दिए जाते हैं, वक़्त पे इलाज ना कराओ तो वो आदमी मरणासन हो जाता है।
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पुतली बना के जहाँ सुई या कांटा चुभा दो, वहीं आदमी को दर्द शुरू हो जाते हैं।
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किसी की पुतली बना के हाथपैर पर सुई, कील या कांटा चुभा देते हैं तो उस व्यक्ति के हाथ पैर में भारी चोट आती है या दर्द समाप्त नहीं होता।
।
हार्ट पर कील या सुई चुभा दो, आदमी को हार्ट अटैक भी हो सकता है या हार्ट में दर्द बढ़ेगी।
।
इसी प्रकार शमशानी कोयला होता है कि सामने वाला का चित्र बना के जहां जलता कोयला लगाओ वहीं पर बेहिसाब जलन शुरू हो जाती है।
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तन्त्र प्रयोग तगड़ा हुआ तो मौत भी हो सकती है।
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ऐसा ही चौकी चढाने वाला तन्त्र है जिसके मन्त्र में ये लाइन आती है -
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हिये फाड़ चोटी चढ़े, काया माही जीव रहे।
साँस ना आवे पड़यो रहै।
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मतलब ये कि दर्द के मारे कलेजा फटने को हो जाये और आत्मा शरीर में ही रहनी चाहिए, साँस भी आनी चाहिए और ज्यों का त्यों पड़ा रहे।
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आप खुद सोच सकते हैं कि कितनी अधिक दुःख वाली स्थिति हो जाएगी उसकी।
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किसी को इतना दुख देना कितना बड़ा पाप है?
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कुछ तान्त्रिकों के पास किसी भूत प्रेत मसाण की सिद्धि होती है जिसकी हैल्प से भी शॉर्टकट में मार सकते हैं या बहुत ज्यादा बीमार कर सकते हैं।
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जब तान्त्रिक किसी के कहने पर पैसे लेकर किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा तन्त्र यूज करता है तो दूसरा व्यक्ति अपने ट्रीटमैंट के लिए किसी अन्य तान्त्रिक के पास भी चला जाता है।
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यदि आपका करवाया हुआ तन्त्र प्रयोग वहाँ रिटर्न कर दिया तो समझो आपकी वाट पक्की लगेगी।
।
क्योंकि करने वाला तान्त्रिक अपने बचाव का उपाय पहले ही कर चुका होता है।
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रिटर्न तन्त्र सीधा आप पर असर दिखायेगा।
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एक तान्त्रिक ने अपने भूत से कहा कि दूसरे तान्त्रिक को मार दो मैं तुम्हें मुर्गा दूँगा।
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दूसरे तान्त्रिक के पास जब भूत मारने के लिए आया तो उस तान्त्रिक ने अपने भूत की हैल्प से पूछा कि तू मारने क्यों आया है, और तुझे बदले में क्या मिलेगा ?
।
भूत ने कहा मेरे मालिक ने मुझे कहा है कि अगर तेरे को मारूँगा तो वो मुझे 1 मुर्गा देगा
।
तान्त्रिक ने अपनी खोपड़ी चलाई और बोला -
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तू उस तान्त्रिक को मार के आ जा जिसने तुझे मेरा मारण करने के लिए भेजा है, मैं बदले में तेरे को 3 बकरे दे दूंगा।
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भूत को 3 बकरों का लालच पड़ा और अपने मालिक को खत्म कर दिया।
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इसलिए कभी ऐसा काम मत करो।
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#मूठबाण -
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ये बहुत खतरनाक मारण क्रिया है।
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इसमें किसी भूत प्रेत मसाण भैरो या कलवे की सहायता से मारने का इंतजाम किया जाता है।
।
इन प्रेतों को माँस मदिरा आदि चढ़ाकर बाण तैयार किया जाता है।
।
कुछ उसे झाड़ू के तिनको से बनाई टोकरी में सामग्री रख के तैयार करते हैं तो कुछ मिट्टी की हांडी में तैयार करते हैं और जमीन में दबाते हैं।
।
उसके बाद सरसों या उड़द के दाने चौराहे पर जमीन पर पटक कर मारे जाते हैं।
।
उसके बाद कोई शक्ति उस टारगेट किये हुए व्यक्ति को मारने चली जाती है।
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ऐसा बोलते हैं कि जब मूठबाण किसी पर आता है तो हांडी उड़ती हुई आती है या झाड़ू के तिनके वाली टोकरी उड़ती हुई आती है।
।
लेकिन उसको देख पाना उसी के लिए सम्भव है जिसके पास कोई सिद्धि हो, वो ही उसको पहचान पाता है।
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जिस व्यक्ति के ऊपर बाण छोड़ा गया है उसे दिन के समय आतिशबाजी जैसा साउंड या किसी बड़े पक्षी के पंखों के फड़फड़ाने जैसा साउंड सुनाई देगा और अचानक ही तबियत बिगड़ जाएगी, हो सकता है मर भी जाये।
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रात के समय जब मूठबाण आता है तो नाम लेकर आवाज लगाता है।
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या घुं घुं की तरह आवाज होती रहती है जैसे मधुमक्खी उड़ती है।
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यदि रात के समय किसी ने आवाज लगाई तो मत सुनो।
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मूठबाण सिर्फ 3 बार आवाज लगाता है, उस समय कमरे से बाहर मत निकलो, क्योंकि ये सिर्फ खुले माहौल में अटैक करता है।
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अगर आप अंदर हैं तो इसका प्रभाव बहुत कम होगा।
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लेकिन अगर आपने अंदर ही उसकी पुकार का जवाब हाँ में दे दिया तो समझो गए काम से।
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अच्छे तान्त्रिक इसे वापस लौटा देते हैं।
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जब ये लौटता है तो भेजने वाले पर दुगने वेग से अटैक करता है।
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किसी एक आदमी पर से बाण 2 बार रिटर्न आ जाता है तो तीसरी बार बाण भेजने की गलती कोई भी तान्त्रिक नहीं करता है।
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तीसरी बार लौटने पर तान्त्रिक की मौत निश्चित है।
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मेरे दोस्त पर ऐसा हुआ था।
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उस पर बिजनस में ही जेलिसी में किसी पास वाले ने मूठबाण चलवाया था।
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एक दिन उसके पड़ोस वाले बिजनसमैन से कुछ कहासुनी हुई थी।
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रात के टाइम उसे अपने कार्यस्थल पर ऐसा लगा कि घुं घुं की आवाज हुई और किसी ने छाती पर बहुत जबरदस्त मुक्का मारा और वो थोड़ी देर के लिए अनबैलैंस हो गया।
।
उसने किसी देवता का कवच पहना था जिसके कारण उस पर असर नहीं पड़ पाया।
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सुबह खबर आई कि पड़ोस वाला बिजनसमैन रात को हार्ट में दर्द होने के कारण हॉस्पिटल में एडमिट हो गया है।
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मारण के ऐसे ही एक से बढ़कर एक तरीके हैं।
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इधर ज्यादा लिखूंगा तो कम से कम 35-40 टाइप तो मारने के तरीके लिख दूँगा।
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ऐसे भी मारण कर्म हैं कि जिनका असर पीढ़ियों तक खत्म नहीं होता।
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जो भी पैदा होगा वो किसी असाध्य रोग से ग्रसित पैदा होगा।
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पर हमने इसका करना क्या है?
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ऐसे पापकर्म कमा के क्या करेंगे।
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जहाँ किसी को मारने के लिए 51000 या 100000 मन्त्र जप करना है।
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उससे अच्छा है कि वो वक़्त अपने इष्टदेवी या या देवता की पूजा में लगाएं।
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कुछ अच्छा फल मिलेगा, बुद्धि सकारात्म होगी।
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आत्मा दुर्गति में जाने से बचेगी।
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आप देख लेना अपने आसपास कि जो भी या तान्त्रिक ऐसी क्रियाएं करता है, उसका जीवन अधिक समय तक सुखी नहीं रहता।
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या तो वो अंत समय में पागल हो जाते हैं या कोढ़ फटने के कारण मृत्यु होती है या अंग सड़ने लगते हैं, कैन्सर जैसी बीमारियाँ लगती हैं।
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यहां तक कि अंदर बने ट्यूमर्स में या बाहर ही सड़न पैदा होती है जिसमें कीड़े पड़ जाते हैं
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दूसरों को नीचा दिखाने के लिए समय बर्बाद करने से अच्छा है उस समय को अपनी उन्नति में लगा दो।
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गायत्री मन्त्र श्रेष्ठ है, महामृत्युंजय मन्त्र श्रेष्ठ है।
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यदि सामने शेर है और आपके प्राण संकट में है तो शेर को मारना भी सही है।
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लेकिन क्या किसी व्यक्ति पर तन्त्र क्रिया कर के मारना सही है?
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#चाणक्य बहुत खतरनाक #तान्त्रिक भी था और एक उत्कृष्ट #ज्योतिषी भी था।
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उसने #तन्त्रसिद्धि से #तीर पर लगाने के लिए ऐसा पॉइजन बनाया था कि जिसे भी वो तीर लगेगा वो पागल हो जाएगा और लोगों को काटना शुरू करेगा।
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अगर इस पागल व्यक्ति को कोई भी काटने को ना मिले तो वो स्वयं को काटना शुरू कर देता और मर जाता।
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जिन लोगों को वो पागल काटेगा वो भी उसी की तरह दूसरों को काटना शुरू कर देते और यदि कोई काटने का ना मिले तो स्वयं को काटकर मर जाते।
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कारण - तीर में लगा हुआ #सिद्ध_रसायन जिसके असर से उन सबका ऐसा व्यवहार हो जाता।
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सरल भाषा मे कहें तो शत्रु की पूरी सेना को मारने के लिए 1 तीर ही काफी था।
।
उसके बाद #चेन_रिएक्शन शुरू हो जाता।
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1 तीर मारो और खुद भाग जाओ।
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सब आपस एक दूसरे को काटना शुरू कर देते और जब कोई ना बचता तो खुद को काटते और मर जाते।
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#युद्ध_में_मारना_धर्म_है।
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फौजी को भी मारना बाद में सिखाते हैं, पहले खुद की जान बचाना सिखाया जाता है।
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डिफेंस में मारना पाप नहीं है।
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लेकिन लोग युद्ध में कम और कहा सुनी में ही मारने पर उतर जाते हैं।
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आगे हाथ पैर से ना मार सके तो छोटे मोटे #टोने_टोटके कर के दूसरों को परेशान किया जाता है।
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ये बहुत ही ज्यादा गलत काम है।
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मार ना पाए तो उस पर टोटके कर के दूसरी क्रियाएं करते हैं या किसी तान्त्रिक से करवाते हैं।
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#सतम्भन - गति रोक देना।
।
किसी का कारोबार ही ठप कर देते हैं।
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उसकी जमीन या घर के आसपास कोई तन्त्र संबन्धी वस्तु या ताबीज गाड़ दिया जाता है, दुकान के बाहर गाड़ दो, या कोई अभिमन्त्रित वस्तु पर कार्यस्थल के आसपास फैंक फि जाती है।
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सामने वाले का धन्धा चौपट तो कंगाली शुरु।
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अपने कार्यस्थल के भीतर बाहर सफाई रखें, पूजा पाठ करें।
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#विद्वेषण - लड़ाई डाल देना।
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भाई भाई लड़े, पति पत्नी लड़े, बेटा बाप लड़े।
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परिवार तितर बितर होना शुरू।
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#उच्चाटन - मन भटकाना।
।
किसी का भी दिमाग अनबैलेंस कर देना और उसकी बुद्धिभ्रष्ट हो जाती है, वो आदमी भटकता रहता है, दिमाग से कमजोर हो जाता है, नशेड़ी बन जाता है, अब बर्बाद होने लगता है, पागल भी हो जाते हैं।
।
कुछ तन्त्र प्रयोग तो ऐसे भी होते हैं कि पूरा परिवार उजड़ जाता है।
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#मारण - मारने के उद्देश्य से #भूत_प्रेत भी लगा दिए जाते हैं, वक़्त पे इलाज ना कराओ तो वो आदमी मरणासन हो जाता है।
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पुतली बना के जहाँ सुई या कांटा चुभा दो, वहीं आदमी को दर्द शुरू हो जाते हैं।
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किसी की पुतली बना के हाथपैर पर सुई, कील या कांटा चुभा देते हैं तो उस व्यक्ति के हाथ पैर में भारी चोट आती है या दर्द समाप्त नहीं होता।
।
हार्ट पर कील या सुई चुभा दो, आदमी को हार्ट अटैक भी हो सकता है या हार्ट में दर्द बढ़ेगी।
।
इसी प्रकार शमशानी कोयला होता है कि सामने वाला का चित्र बना के जहां जलता कोयला लगाओ वहीं पर बेहिसाब जलन शुरू हो जाती है।
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तन्त्र प्रयोग तगड़ा हुआ तो मौत भी हो सकती है।
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ऐसा ही चौकी चढाने वाला तन्त्र है जिसके मन्त्र में ये लाइन आती है -
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हिये फाड़ चोटी चढ़े, काया माही जीव रहे।
साँस ना आवे पड़यो रहै।
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मतलब ये कि दर्द के मारे कलेजा फटने को हो जाये और आत्मा शरीर में ही रहनी चाहिए, साँस भी आनी चाहिए और ज्यों का त्यों पड़ा रहे।
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आप खुद सोच सकते हैं कि कितनी अधिक दुःख वाली स्थिति हो जाएगी उसकी।
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किसी को इतना दुख देना कितना बड़ा पाप है?
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कुछ तान्त्रिकों के पास किसी भूत प्रेत मसाण की सिद्धि होती है जिसकी हैल्प से भी शॉर्टकट में मार सकते हैं या बहुत ज्यादा बीमार कर सकते हैं।
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जब तान्त्रिक किसी के कहने पर पैसे लेकर किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा तन्त्र यूज करता है तो दूसरा व्यक्ति अपने ट्रीटमैंट के लिए किसी अन्य तान्त्रिक के पास भी चला जाता है।
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यदि आपका करवाया हुआ तन्त्र प्रयोग वहाँ रिटर्न कर दिया तो समझो आपकी वाट पक्की लगेगी।
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क्योंकि करने वाला तान्त्रिक अपने बचाव का उपाय पहले ही कर चुका होता है।
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रिटर्न तन्त्र सीधा आप पर असर दिखायेगा।
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एक तान्त्रिक ने अपने भूत से कहा कि दूसरे तान्त्रिक को मार दो मैं तुम्हें मुर्गा दूँगा।
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दूसरे तान्त्रिक के पास जब भूत मारने के लिए आया तो उस तान्त्रिक ने अपने भूत की हैल्प से पूछा कि तू मारने क्यों आया है, और तुझे बदले में क्या मिलेगा ?
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भूत ने कहा मेरे मालिक ने मुझे कहा है कि अगर तेरे को मारूँगा तो वो मुझे 1 मुर्गा देगा
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तान्त्रिक ने अपनी खोपड़ी चलाई और बोला -
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तू उस तान्त्रिक को मार के आ जा जिसने तुझे मेरा मारण करने के लिए भेजा है, मैं बदले में तेरे को 3 बकरे दे दूंगा।
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भूत को 3 बकरों का लालच पड़ा और अपने मालिक को खत्म कर दिया।
।
इसलिए कभी ऐसा काम मत करो।
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#मूठबाण -
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ये बहुत खतरनाक मारण क्रिया है।
।
इसमें किसी भूत प्रेत मसाण भैरो या कलवे की सहायता से मारने का इंतजाम किया जाता है।
।
इन प्रेतों को माँस मदिरा आदि चढ़ाकर बाण तैयार किया जाता है।
।
कुछ उसे झाड़ू के तिनको से बनाई टोकरी में सामग्री रख के तैयार करते हैं तो कुछ मिट्टी की हांडी में तैयार करते हैं और जमीन में दबाते हैं।
।
उसके बाद सरसों या उड़द के दाने चौराहे पर जमीन पर पटक कर मारे जाते हैं।
।
उसके बाद कोई शक्ति उस टारगेट किये हुए व्यक्ति को मारने चली जाती है।
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।
ऐसा बोलते हैं कि जब मूठबाण किसी पर आता है तो हांडी उड़ती हुई आती है या झाड़ू के तिनके वाली टोकरी उड़ती हुई आती है।
।
लेकिन उसको देख पाना उसी के लिए सम्भव है जिसके पास कोई सिद्धि हो, वो ही उसको पहचान पाता है।
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जिस व्यक्ति के ऊपर बाण छोड़ा गया है उसे दिन के समय आतिशबाजी जैसा साउंड या किसी बड़े पक्षी के पंखों के फड़फड़ाने जैसा साउंड सुनाई देगा और अचानक ही तबियत बिगड़ जाएगी, हो सकता है मर भी जाये।
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रात के समय जब मूठबाण आता है तो नाम लेकर आवाज लगाता है।
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या घुं घुं की तरह आवाज होती रहती है जैसे मधुमक्खी उड़ती है।
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यदि रात के समय किसी ने आवाज लगाई तो मत सुनो।
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मूठबाण सिर्फ 3 बार आवाज लगाता है, उस समय कमरे से बाहर मत निकलो, क्योंकि ये सिर्फ खुले माहौल में अटैक करता है।
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अगर आप अंदर हैं तो इसका प्रभाव बहुत कम होगा।
।
लेकिन अगर आपने अंदर ही उसकी पुकार का जवाब हाँ में दे दिया तो समझो गए काम से।
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अच्छे तान्त्रिक इसे वापस लौटा देते हैं।
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जब ये लौटता है तो भेजने वाले पर दुगने वेग से अटैक करता है।
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किसी एक आदमी पर से बाण 2 बार रिटर्न आ जाता है तो तीसरी बार बाण भेजने की गलती कोई भी तान्त्रिक नहीं करता है।
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तीसरी बार लौटने पर तान्त्रिक की मौत निश्चित है।
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मेरे दोस्त पर ऐसा हुआ था।
।
उस पर बिजनस में ही जेलिसी में किसी पास वाले ने मूठबाण चलवाया था।
।
एक दिन उसके पड़ोस वाले बिजनसमैन से कुछ कहासुनी हुई थी।
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रात के टाइम उसे अपने कार्यस्थल पर ऐसा लगा कि घुं घुं की आवाज हुई और किसी ने छाती पर बहुत जबरदस्त मुक्का मारा और वो थोड़ी देर के लिए अनबैलैंस हो गया।
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उसने किसी देवता का कवच पहना था जिसके कारण उस पर असर नहीं पड़ पाया।
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सुबह खबर आई कि पड़ोस वाला बिजनसमैन रात को हार्ट में दर्द होने के कारण हॉस्पिटल में एडमिट हो गया है।
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मारण के ऐसे ही एक से बढ़कर एक तरीके हैं।
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इधर ज्यादा लिखूंगा तो कम से कम 35-40 टाइप तो मारने के तरीके लिख दूँगा।
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ऐसे भी मारण कर्म हैं कि जिनका असर पीढ़ियों तक खत्म नहीं होता।
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जो भी पैदा होगा वो किसी असाध्य रोग से ग्रसित पैदा होगा।
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पर हमने इसका करना क्या है?
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ऐसे पापकर्म कमा के क्या करेंगे।
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जहाँ किसी को मारने के लिए 51000 या 100000 मन्त्र जप करना है।
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उससे अच्छा है कि वो वक़्त अपने इष्टदेवी या या देवता की पूजा में लगाएं।
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कुछ अच्छा फल मिलेगा, बुद्धि सकारात्म होगी।
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आत्मा दुर्गति में जाने से बचेगी।
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आप देख लेना अपने आसपास कि जो भी या तान्त्रिक ऐसी क्रियाएं करता है, उसका जीवन अधिक समय तक सुखी नहीं रहता।
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या तो वो अंत समय में पागल हो जाते हैं या कोढ़ फटने के कारण मृत्यु होती है या अंग सड़ने लगते हैं, कैन्सर जैसी बीमारियाँ लगती हैं।
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यहां तक कि अंदर बने ट्यूमर्स में या बाहर ही सड़न पैदा होती है जिसमें कीड़े पड़ जाते हैं
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दूसरों को नीचा दिखाने के लिए समय बर्बाद करने से अच्छा है उस समय को अपनी उन्नति में लगा दो।
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गायत्री मन्त्र श्रेष्ठ है, महामृत्युंजय मन्त्र श्रेष्ठ है।

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