छाती, फेफड़े, हृदय, साँस के रोग।
।
।
जब भी चतुर्थ भाव के स्वामी की स्थिति खराब हो, चतुर्थ भाव में पाप ग्रह हो तो इस प्रकार के रोग लगते हैं।
।
हार्टअटैक वालों में सूर्य सबसे ज्यादा खराब मिलेगा क्योंकि सूर्य हृदय का कारक है।
।
हृदय रोग में (I.S.T.) इनएप्रोप्रियेट साइनस टेककोर्डिया नाम की बीमारी में चन्द्रमा की स्थिति खराब देखी गई है।
।
इसमें धड़कन की गति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
।
।
सिंह लग्न की एक कुण्डली ऐसी देखी जिसमें चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल पंचम भाव में बिल्कुल सही था लेकिन चन्द्रमा व्यय भाव का स्वामी होकर एकादश भाव में था।
।
सप्तम भाव में राहु था और जातक अविवाहित था।
।
।
जातक को आईएसटी की बीमारी थी।
।
चन्द्रमा केमद्रुम में था।
।
घबराहट होती थी और धड़कन बढ़ जाती थी।
।
।
घबराहट का कारण ये थी कि लोगों का लाखों रुपया मारा था ठगी से।
।
जब कोई फोन कर के धमका देता तो सीधे CCU में पहुंचता था।
।
मेरे सामने ही 3 बार ऐसा हुआ है उस जातक को।
।
लोग धमकी देते हैं कि जहाँ मिलेगा वहीं मार देंगे।
।
चन्द्रमा मन का कारक होता है और कालपुरुष राशियों में चन्द्रमा चतुर्थ भाव अर्थात छाती के भाग का स्वामी बनता है।
।
केमद्रुम का चन्द्रमा मानसिक रोग देता है, मन में भय पैदा हुआ तो घबराहट हुई।
।
जब घबराहट बढ़ गई तो धड़कन अपने आप बढ़ गई।
।
इसी तरह ये एक रोग बन गया।
।
बेईमानी और हरामखोरी का हजम नहीं होता।
।
।
केतु से ग्रस्त चन्द्रमा वाले घबराहट के रोगी देखे गए हैं क्योंकि केतु भय कारक ग्रह है।
।
राहु केतु से ग्रस्त सूर्य हार्टअटैक देता है।
।
सूर्य एक विस्फोटक ग्रह है और केतु भी मंगल का स्वभाव रखने वाला विस्फोटक ग्रह है।
।
दोनों शत्रु जब इक्कठे होंगे तो विस्फोट ही होगा और हृदयाघात का कारण बनेंगे।
।
।
चन्द्रमा जल तत्व ग्रह है, जब पानी में विस्फोट होगा तो कम्पन पैदा होगा, तरंगे निकलेंगी।
।
हृदय की धड़कन बढ़ेगी, घबराहट की तरंगे उठेंगी।
।
।
एक जातक के हृदय में छेद था।
।
उसकी कुण्डली के शनि केतु चतुर्थ भाव में थे।
।
केतु के कारण हार्ट में छेद कह सकते हैं क्योंकि वेध का कारक केतु है।
।
।
चतुर्थ भाव में अलग अलग ग्रह अलग अलग तरीके से रोग देगा।
।
।
सूर्य, मंगल विस्फोटक ग्रह हैं जो दुष्प्रभाव में आने से हृदयाघात देंगे।
।
शनि एक धीमी गति वाला ग्रह तथा ठण्डा ग्रह है,
।
चतुर्थ भाव में शनि के कारण कफ के रोग, छाती जाम हो जाना, अस्थमा के रोग लगेंगे और ऐसा जातक मैंने इन्हेलर यूज करते देखा है।
।
पहले उस जातक को टीबी की बीमारी भी हुई थी।
।
।
वृश्चिक लग्न में अष्टम भाव के शनि वाले जातक को भी टीबी की बीमारी लगी हुई देखी है।
।
वृश्चिक लग्न में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया है तो चतुर्थ भाव का फल बिगड़ गया और शनि के कारण टीबी की बीमारी लगी।
।
।
चतुर्थ भाव में बृहस्पति के साथ केतु कारण कफ की समस्या देखी गई है
।
एक जातक के सूर्य केतु चतुर्थ भाव में थे और बाइक से गिरने पर जातक की पसलियां टूटी थी।
।
सूर्य हड्डी का कारक है और केतु चोट का कारक है और चतुर्थ भाव में होने के कारण पसलियाँ टूटी।
।
।
मीन लग्न में बुध के साथ केतु था जिसपे शनि की दृष्टि थी, उस महिला को स्तन कैन्सर हुआ था, स्तन में गांठे बनी थी।
।
अलग अलग ग्रह अलग अलग समस्या उत्पन्न करेगा।
।
।
एक बात और भी देखी गई है कि जिनकी शादि नहीं हो पाती है और उम्र काफी अधिक हो जाती है, वो भी हृदय रोगी होते हैं।
।
ब्रह्मचारी पुरुष और स्त्रियाँ हृदय के रोग से ग्रसित मिलेंगे।
।
।
अब आप समझेंगे कि हृदय रोग का शादि से क्या लेना देना है ?
।
अकेला पुरुष या स्त्री अपनी फीलिंग्स शेयर नहीं कर पाता है किसी से, ना ही दिल बहलाने के लिए लाइफपार्टनर और बच्चे होते हैं।
।
ना किसी से कोई विशेष लगाव होता है ना कहीं आना जाना होता है।
।
गैर जिम्मेवार होते हैं और 2-3 बातों के अलावा उनकी जिन्दगी में कुछ विशेष नहीं होता है।
।
और उसके मन मे बहुत सी बातें बोझ बनकर उसे चिंताग्रस्त करती हैं, मानसिक रोग उत्पन्न होने से घबराहट और हार्टअटैक जैसी समस्या आती है।
।
सप्तम भाव से भी हृदय रोग प्रभावित होते हैं।
।
जब आप कुण्डली में "भावात भावम" का सूत्र लगाएंगे तो चतुर्थ भाव से चतुर्थ भाव अर्थात सप्तम भाव का विश्लेषण करने से भी चतुर्थ भाव का फल निकलेगा।
।
।
इसलिए चतुर्थभाव के फल के लिए सप्तम भाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
।
।
ये कुण्डली पाकिस्तान की एक महिला की है जिसे छाती के रोग की समस्या है।
।
उर्दू पढ़ने वाला पढ़ लेगा कि मैंने इससे उर्दू में क्या लिखा है।
।
इसने कहा - हाँ इसे सीने के रोग हैं सांस और हार्ट की समस्या है।
।
।
कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -
।
।
जन्म - 7 अप्रैल 1979
समय - सुबह 9:30 बजे कराची पाकिस्तान।
।
।
[1] वृषभ लग्न में चतुर्थ भाव में सिंह राशि बनती है जिसमें शत्रु ग्रह राहु और शनि बैठे हैं।
।
[2] राहु सिंह राशि में होने से सूर्य का प्रभाव ले रहा है और विस्फोटक नेचर अपनाकर शत्रु के घर में ही विस्फोट करने का योग बना रहा है लेकिन राहु का स्वभाव शनि वाला होता है जिसके कारण बड़ा विस्फोट ना कर के सुलगती आग वाला काम करेगा।
।
[3] शनि ठण्डक वाला ग्रह है और राहु के साथ, हृदय रोग एकदम से हानि वाला नहीं हो पायेगा, धीरे धीरे नुकसान करने वाला लम्बे समय तक चलने वाला रोग लगेगा।
।
[4] शनि वायु की तरह ग्रह है, वातरोगी प्रकृति का रूखा बंजर ग्रह है इसलिए साँस की बीमारी भी देगा क्योंकि साँस की बीमारी एक वायु तत्व की बीमारी है।
।
[5] इस महिला को हार्ट की प्रॉब्लम है, हार्ट अटैक नहीं हुआ है लेकिन धड़कन बढ़ती है।
।
[6] सूर्य की अग्नि तत्व राशि में कैंसर के कारक पाप ग्रह चतुर्थ भाव से सम्बंधित हिस्सो में कैन्सर भी बना सकते हैं।
।
।
जब भी चतुर्थ भाव के स्वामी की स्थिति खराब हो, चतुर्थ भाव में पाप ग्रह हो तो इस प्रकार के रोग लगते हैं।
।
हार्टअटैक वालों में सूर्य सबसे ज्यादा खराब मिलेगा क्योंकि सूर्य हृदय का कारक है।
।
हृदय रोग में (I.S.T.) इनएप्रोप्रियेट साइनस टेककोर्डिया नाम की बीमारी में चन्द्रमा की स्थिति खराब देखी गई है।
।
इसमें धड़कन की गति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
।
।
सिंह लग्न की एक कुण्डली ऐसी देखी जिसमें चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल पंचम भाव में बिल्कुल सही था लेकिन चन्द्रमा व्यय भाव का स्वामी होकर एकादश भाव में था।
।
सप्तम भाव में राहु था और जातक अविवाहित था।
।
।
जातक को आईएसटी की बीमारी थी।
।
चन्द्रमा केमद्रुम में था।
।
घबराहट होती थी और धड़कन बढ़ जाती थी।
।
।
घबराहट का कारण ये थी कि लोगों का लाखों रुपया मारा था ठगी से।
।
जब कोई फोन कर के धमका देता तो सीधे CCU में पहुंचता था।
।
मेरे सामने ही 3 बार ऐसा हुआ है उस जातक को।
।
लोग धमकी देते हैं कि जहाँ मिलेगा वहीं मार देंगे।
।
चन्द्रमा मन का कारक होता है और कालपुरुष राशियों में चन्द्रमा चतुर्थ भाव अर्थात छाती के भाग का स्वामी बनता है।
।
केमद्रुम का चन्द्रमा मानसिक रोग देता है, मन में भय पैदा हुआ तो घबराहट हुई।
।
जब घबराहट बढ़ गई तो धड़कन अपने आप बढ़ गई।
।
इसी तरह ये एक रोग बन गया।
।
बेईमानी और हरामखोरी का हजम नहीं होता।
।
।
केतु से ग्रस्त चन्द्रमा वाले घबराहट के रोगी देखे गए हैं क्योंकि केतु भय कारक ग्रह है।
।
राहु केतु से ग्रस्त सूर्य हार्टअटैक देता है।
।
सूर्य एक विस्फोटक ग्रह है और केतु भी मंगल का स्वभाव रखने वाला विस्फोटक ग्रह है।
।
दोनों शत्रु जब इक्कठे होंगे तो विस्फोट ही होगा और हृदयाघात का कारण बनेंगे।
।
।
चन्द्रमा जल तत्व ग्रह है, जब पानी में विस्फोट होगा तो कम्पन पैदा होगा, तरंगे निकलेंगी।
।
हृदय की धड़कन बढ़ेगी, घबराहट की तरंगे उठेंगी।
।
।
एक जातक के हृदय में छेद था।
।
उसकी कुण्डली के शनि केतु चतुर्थ भाव में थे।
।
केतु के कारण हार्ट में छेद कह सकते हैं क्योंकि वेध का कारक केतु है।
।
।
चतुर्थ भाव में अलग अलग ग्रह अलग अलग तरीके से रोग देगा।
।
।
सूर्य, मंगल विस्फोटक ग्रह हैं जो दुष्प्रभाव में आने से हृदयाघात देंगे।
।
शनि एक धीमी गति वाला ग्रह तथा ठण्डा ग्रह है,
।
चतुर्थ भाव में शनि के कारण कफ के रोग, छाती जाम हो जाना, अस्थमा के रोग लगेंगे और ऐसा जातक मैंने इन्हेलर यूज करते देखा है।
।
पहले उस जातक को टीबी की बीमारी भी हुई थी।
।
।
वृश्चिक लग्न में अष्टम भाव के शनि वाले जातक को भी टीबी की बीमारी लगी हुई देखी है।
।
वृश्चिक लग्न में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया है तो चतुर्थ भाव का फल बिगड़ गया और शनि के कारण टीबी की बीमारी लगी।
।
।
चतुर्थ भाव में बृहस्पति के साथ केतु कारण कफ की समस्या देखी गई है
।
एक जातक के सूर्य केतु चतुर्थ भाव में थे और बाइक से गिरने पर जातक की पसलियां टूटी थी।
।
सूर्य हड्डी का कारक है और केतु चोट का कारक है और चतुर्थ भाव में होने के कारण पसलियाँ टूटी।
।
।
मीन लग्न में बुध के साथ केतु था जिसपे शनि की दृष्टि थी, उस महिला को स्तन कैन्सर हुआ था, स्तन में गांठे बनी थी।
।
अलग अलग ग्रह अलग अलग समस्या उत्पन्न करेगा।
।
।
एक बात और भी देखी गई है कि जिनकी शादि नहीं हो पाती है और उम्र काफी अधिक हो जाती है, वो भी हृदय रोगी होते हैं।
।
ब्रह्मचारी पुरुष और स्त्रियाँ हृदय के रोग से ग्रसित मिलेंगे।
।
।
अब आप समझेंगे कि हृदय रोग का शादि से क्या लेना देना है ?
।
अकेला पुरुष या स्त्री अपनी फीलिंग्स शेयर नहीं कर पाता है किसी से, ना ही दिल बहलाने के लिए लाइफपार्टनर और बच्चे होते हैं।
।
ना किसी से कोई विशेष लगाव होता है ना कहीं आना जाना होता है।
।
गैर जिम्मेवार होते हैं और 2-3 बातों के अलावा उनकी जिन्दगी में कुछ विशेष नहीं होता है।
।
और उसके मन मे बहुत सी बातें बोझ बनकर उसे चिंताग्रस्त करती हैं, मानसिक रोग उत्पन्न होने से घबराहट और हार्टअटैक जैसी समस्या आती है।
।
सप्तम भाव से भी हृदय रोग प्रभावित होते हैं।
।
जब आप कुण्डली में "भावात भावम" का सूत्र लगाएंगे तो चतुर्थ भाव से चतुर्थ भाव अर्थात सप्तम भाव का विश्लेषण करने से भी चतुर्थ भाव का फल निकलेगा।
।
।
इसलिए चतुर्थभाव के फल के लिए सप्तम भाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
।
।
ये कुण्डली पाकिस्तान की एक महिला की है जिसे छाती के रोग की समस्या है।
।
उर्दू पढ़ने वाला पढ़ लेगा कि मैंने इससे उर्दू में क्या लिखा है।
।
इसने कहा - हाँ इसे सीने के रोग हैं सांस और हार्ट की समस्या है।
।
।
कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -
।
।
जन्म - 7 अप्रैल 1979
समय - सुबह 9:30 बजे कराची पाकिस्तान।
।
।
[1] वृषभ लग्न में चतुर्थ भाव में सिंह राशि बनती है जिसमें शत्रु ग्रह राहु और शनि बैठे हैं।
।
[2] राहु सिंह राशि में होने से सूर्य का प्रभाव ले रहा है और विस्फोटक नेचर अपनाकर शत्रु के घर में ही विस्फोट करने का योग बना रहा है लेकिन राहु का स्वभाव शनि वाला होता है जिसके कारण बड़ा विस्फोट ना कर के सुलगती आग वाला काम करेगा।
।
[3] शनि ठण्डक वाला ग्रह है और राहु के साथ, हृदय रोग एकदम से हानि वाला नहीं हो पायेगा, धीरे धीरे नुकसान करने वाला लम्बे समय तक चलने वाला रोग लगेगा।
।
[4] शनि वायु की तरह ग्रह है, वातरोगी प्रकृति का रूखा बंजर ग्रह है इसलिए साँस की बीमारी भी देगा क्योंकि साँस की बीमारी एक वायु तत्व की बीमारी है।
।
[5] इस महिला को हार्ट की प्रॉब्लम है, हार्ट अटैक नहीं हुआ है लेकिन धड़कन बढ़ती है।
।
[6] सूर्य की अग्नि तत्व राशि में कैंसर के कारक पाप ग्रह चतुर्थ भाव से सम्बंधित हिस्सो में कैन्सर भी बना सकते हैं।

No comments:
Post a Comment