Wednesday, November 6, 2019

नजर लगना

#नजर_लगना।

आपकी तुलना स्वयं से करने पर जो खुद को नीचा पाता है,
उसी के  #नकारात्मक_भावों_की_ऊर्जा आपको #नुक्सान कर देती है।

वो आपको #टोके_बिना_रह_नहीं_पाता।

जब तक आपकी पर्सनल लाइफ में घुस के सब कुछ पता ना कर ले और कुछ बवाल होता ना देख ले तब तक उनके #कलेजे_को_ठण्डक_भी_नहीं_पड़ती।


[1] मेरा एक दोस्त है उसका एक रिश्तेदार उससे पूछता रहता था कि कितना कमा लेते हो?

दोस्त कहता था कि ऊपर वाले कि दया से रोटी पानी ठीक चला है।


एक दिन दोस्त बैंक से पासबुक पर एण्ट्री करवा के घर आया और पासबुक अभी टेबल पर ही रखी थी।

वही बदतमीज रिश्तेदार संयोग से घर में मेहमान बन के आया था।

उसने जैसे ही टेबल पर पासबुक देखी तो बिल्कुल वैसे उस पासबुक पर टूट पड़ा जैसे कुत्ता हड्डी पर टूट पड़ता जी।

बिना पूछे उसकी पासबुक टेबल से उठाई और खोल के बैठ गया।

[ नोट - बिना किसी आवश्यक कारण कभी किसी की #इनकम पूछना ही एक प्रकार की बदतमीजी है।]

पासबुक देखकर उसकी आँखें फ़टी की फटी रह गई।

( अंदर से पता नहीं कितनी जलन हो गई थी उसको।)

उसने टोक दिया कि आजकल बहुत पैसा कमा रहे हो।

#नजर_लग_गई।


उसके बाद उस दोस्त बीमार हुआ और उसका पैसा बीमारी में लग गया।

जब उससे वो रिश्तेदार कुछ दिनों बाद मिला तो बोला - काफी बीमार हो गया था, बड़ा खर्च हुआ होगा।

अब कितने बचे हैं अकाउंट में?

दोस्त की खराब हालत देखकर #पड़_गई_कलेजे_में_ठण्डक।


आर्टिकल पढ़ने वाले कुछ नमूने भी इस कैटागिरी में शामिल हैं।



[2] एक लड़की ने बहुत सुन्दर ड्रैस खरीदी थी, फंक्शन में एक ऐसी ही एक जलने वाली औरत ने टोक दिया - बड़ी पैसे वाली हो गई हो, बहुत महंगे कपड़े पहनने लगी हो।

थोड़ी देर बाद लड़की की ड्रैस एक कील से फँसी और उधड़ गई।

वो औरत बहुत हँसी, जैसे उसके #कलेजे_को_ठण्डक_पड़_गई।


[3] छोटे बच्चों को भी ऐसे ही नजर लगती है।

कोई उन बच्चों को ही बहुत जलन वाली भावना से देखता है, कभी प्यार से गाल नोचते हैं, कभी चेहरे पर प्यार से थप्पड़ मारते हैं।

ये हरकतें बहुत नकारात्मक होती हैं।

सामने वाले के मन मे जलन की भावना होती है जो जैसे तैसे उसे नोचने और थप्पड़ मारने से रोके रखता/रखती है, इसलिए धीरे धीरे ही थप्पड़ मार देते हैं, उनका वश चले तो बच्चों को उठा के पटक दें।

बहुत देर तक बच्चों को कोई नकारात्मक सोच के साथ घूरता/घूरती रहती है तो भी नजर लगती है क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा का फ्लो उस बच्चे को तरफ बनता है।


आप खुद सोच लें कि जब आपके माता पिता आपको देखते हैं तो आपको कितना अच्छा लगता है।

लेकिन जब कोई पड़ोसी शक की नजर से देखे तो आपको कैसा लगता है?

गंदा फील हो जाता है।

आपका लाइफ़ पार्टनर आपको प्यार देखता है तो उस नजर से आपको कैसा फील होता है?


फील होने का कारण है उसके अन्दर से निकलने वाली सकारात्मक/नकारात्मक ऊर्जा का भाव आपकी तरफ होना।


बच्चों को नजर लगती है।

कोई टोक दे, इतना छोटा है बहुत वजन है इसका, बहुत दूध पीता होगा।

उसी दिन से बच्चा दूध पीना कम कर देता है और कई बार तो स्त्री का दूध भी सूख जाता है।

बच्चा रोता रहता है, दूध नहीं पीता, बीमार हो जाता है, कमजोर हो जाता है।



नजर हमेशा उसी की लगती है जिसकी सोच गन्दी होती है।


आपके माता पिता आपसे पूछते हैं कि आप कितना कमाते हो तो आपकी कमाई में कभी कमी नहीं आएगी।


उपरोक्त प्रकार के नमूने ने जिस दिन पूछ लिया तो समझो पैसा खत्म होने वाला है।


10-12 साल पहले की बात है मेरे पड़ोस के एक आदमी को बैंक से कोई चिट्ठी आई थी तओ डाकिये ने एक गांव वाले से कहा कि मुझे जल्दी है, उसके घर मेये चिट्ठी दे देना।


वो आदमी चिट्ठी खोल के बैठ गया।


उसके बाद उसने वो चिट्ठी मेरे पास दी थी कि अपने पड़ोसी को दे देना।

पड़ोसी मुझे पूछने लगा की ये पैकिंग तुमने फाड़ी है क्या?

मैंने बोल दिया कि उस आदमी ने दी मेरे पास इसी हालत में, मैंने तो झाँका भी नहीं।


उस आदमी ने गाँव मे बात फैला दी कि इस व्यक्ति ने बैंक से इतना लोन लिया था तो उसको जमीन कुर्क करने की वॉर्निंग आई है।


और एक बात मैंने ये देखी है कि वो आदमी आजक वैसा ही है और कभी सुखी नहीं रहता है, उसके जीवन में कोई उन्नति नहीं है, सिर्फ जलन ही जलन भरी पड़ी है, उसके साथ आप बैठो तो आपको सारा दिन दूसरों की सैलरी जमीन रहन सहन की बुराई करता मिलेगा।


एक बार उसने किसी को गाय दुहते हुए देख लिया और टोक दिया कि आपकी गाय तो बड़ा दूध देती है।

खूब पैसा कमाओगे इससे।

दूसरे दिन गाय ने दूध आधा भी नहीं दिया।

जितना  नकारात्मक आदमी/औरत होगा उतना ही जल्दी असर उसकी नकारत्मकता हो जाएगा।


इस आर्टिकल को पढ़ने वाले आधे से ज्यादा पीड़ित लोगों को लगेगा कि मैं उनकी कहानी और उनके पड़ोसियों की मनहूसियत लिख के बैठ गया हूँ।

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