क्या आपने कभी असली चुड़ैल देखी है ?
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आपने सुना होगा कि चुड़ैल के पैर उल्टे होते हैं।
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ऊँगलियाँ पीछे को तरफ और एड़ी आगे की तरफ होती है।
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उसके पैर इस तरह से उल्टे नहीं होते हैं।
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ये कुण्डली मेरे दोस्त की है जिसके साथ चुड़ैल की लड़ाई हुई है।
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उसने चुड़ैल को बहुत गौर से देखा था।
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उसके 3 अनुभव संक्षेप में -
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[1] वो अपने पिता के साथ अपने देवता को लेकर किसी के घर प्रेत बाधा की शान्ति के लिए गया था।
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सिगरेट पीने की आदत है।
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घर से थोड़ा दूर घने पेड़ों के बीच चला गया।
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उसने सिगरेट मुँह में रखी और लाइटर जलाया।
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लाईट में उसके सामने 7-8 फ़ीट को दूरी पर कम्बल में बैठा हुआ कोई दिखा।
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उसने पूछा कि कौन है ?
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कोई जवाब नहीं मिला।
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इसको भूत देखने का बहुत शौक था।
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उसने लाइटर जला के जैसे ही कम्बल हटाया तो एक बहुत भद्दी शक्ल वाली बूढ़ी औरत थी जिसके बाल बिखरे थे और ऐसा लग रहा था वो कई सालों से नहाई नहीं है।
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उसकी आँखें बिल्कुल वैसी थी जैसे कि डॉक्टर पलकें खींच के चैक करता है।
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वो प्रेतनी झल्ला गई और उठ कर खड़ी हो गई।
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ये जंगल मे इतना डरा तो नहीं लेकिन भाग के आया कि इसे भूत मिला है।
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जब ये घर के अन्दर आ गया तो दरवाजा बन्द किया और कुंडी लगा दी।
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जंगल में नहीं डरा लेकिन घर में आने के बाद इसको डर लगा क्योंकि वो बूढ़ी घर के अन्दर दूसरे कमरे से निकल कर इसके सामने आई।
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उसके साथ एक और गन्दा जैसा दिखने वाला आदमी भी था जिसका एक हाथ नहीं था।
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तीसरी औरत भी इसके सामने आई जिसका हुलिया मुझे याद नहीं है।
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ये 3 प्रेत इसके पहले अनुभव में इसने देखे।
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उस घर में सिर्फ इसे और इसके पिता को ही वो दिखे थे और देवता की पूजा समाप्ति के पश्चात वो भस्म हो गए थे।
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[2] ये सुबह 5 बजे के आसपास उठता है और नहाने के लिए घर से थोड़ा दूर बावड़ी से पानी लाता है।
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रास्ते में जाते हुए इसके गांव के एक आदमी ने अपने घर की छत पर से इसको आवाज लगाई और हालचाल पूछा।
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1-2 मिनट बात हुई।
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थोड़ा आगे जाने पर इसको याद आया कि ये आदमी तो 2 दिन पहले मर चुका है।
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जब इसने पीछे मुड़कर देखा तो छत पर कोई नहीं था।
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ये दौड़कर घर वापस आ गया और काफी घबरा गया था।
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[3] ये देवता का पुजारी बन गया है।
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इसे रात को सपना हुआ और एक त्रेखड़ू ( मसाण ) इसके सपने में आया।
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उसने कहा कि मैं तेरे पास आने वाला हूँ, तू मेरी देवी के पास जाकर मेरी निशानी ला।
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उसने किसी देवी का नाम लिया था जो इसने पहले नहीं सुना था।
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उस त्रेखड़ू की हाईट काफी बड़ी थी, भयानक चेहरा था, काले कपड़े पहने थे।
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हाथ पैरों में मोटी मोटी जंजीरें बंधी थी और गले में भी बहुत मोटा लोहे का कड़ा पहना था।
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इसने ये बात अपने पिता को बताई और उन्होंने देवता से सम्पर्क कर के सपने का बारे में पूछा तो देवता ने कहा कि सपने में सही जानकारी मिली है उस देवी का मन्दिर ढूंढो।
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हफ्ते भर की तलाश में इसने वो देवी ढूंढ ली और उसके पुजारी से बात की।
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पुजारी ने देवी से सम्पर्क साध के इसकी बात को कन्फर्म किया।
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देवी के आदेश से पुजारी ने इसे एक फुट का त्रिशूल दिया जो उस मसाण की निशानी बताई।
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इसने त्रिशूल अपने जैकेट में अंदर को तरफ पैंट में फंसा दिया और घर आने लगा।
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रास्ते में इसने बकरे के पंजे खरीद लिए और बैग में डालकर चल पड़ा।
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बस में बैठा और रात के 11-12 बजे के आसपास अपने इलाके में पहुँचा।
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सुनसान इलाका था और ये अकेला ही पैदल चला था।
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कुछ आगे जाने के बाद इसे जोर जोर घुँघरू खनकने की आवाज सुनाई देने लगी।
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पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था।
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इसको आभास हो गया था कि कुछ होने वाला है।
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इसने खुद को तैयार कर लिया कि अब कुछ भी हो सकता है क्योंकि बैग में मांसाहार है।
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थोड़ी देर बाद इसे बहुत बुरी बदबू आने लगी जैसे किसी के बाल जलाए जा रहे हो।
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फिर इसे दोबारा घुँघरू बजने की आवाज सुनाई दी।
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जब ये पीछे मुड़ा तो इसके प्राण पंखेरू उड़ने को हो गए।
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इसके 10-12 फ़ीट दूर एक निर्वस्त्र औरत थी जो हवा में 3-4 फ़ीट ऊपर उड़ी हुई थी।
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हाइट एक सामान्य औरत जितनी थी।
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उसके स्तन लम्बे थे जो उसने दुपट्टे की तरह पीछे की तरफ ओढ़ दिए थे।
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उसकी शक्ल बहुत डरावनी थी ऐसा लग रहा था खून पीकर आई है।
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उसकी आंखे बिल्कुल वैसी ही थी जैसे उस बूढ़ी प्रेतनी की थी।
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चेहरे के हावभाव से ऐसा लग रहा था कि बहुत ज्यादा गुस्से में है और अभी इसको खत्म कर देगी
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उसके बाल ऐसे थे जैसे किसी औरत के बाल भेड़ बकरी के बाल काटने वाली कैंची से बहुत बेढंगे तरीके से काटे हों।
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माथे पर सिन्दूर जैसी चीज लगी थी लेकिन ऐसे लगी थी जैसे लीपा पोती की है।
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उसका शरीर किसी कंकाल की तरह कमजोर था।
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उसके हाथ की उंगलियां और नाखून बहुत लम्बे थी और हाथ पीछे को तरफ ऐसा मुड़े थे जैसे किसी का हाथ मरोड़ के पीछे की तरफ कर दिया हो।
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उसके पैर उल्टे थे।
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लेकिन वैसे नहीं जैसा हम सुनते हैं कि एड़ी आगे की तरफ और उंगलियां पीछे की तरफ होती हैं।
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उसके पैर भी बिल्कुल वैसी ही मरोड़ी हुई अवस्था में थे जैसे हाथ थे।
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उसके तलवे ऊपर की तरफ थे और ऊपर का हिस्सा जमीन को तरफ था।
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पैरों के नाखून भी ऊपर की दिशा में मुड़े थे।
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उस चुड़ैल का लगभग 80 % हुलिया इस फोटो में दी हुई चुड़ैल की तरह ही था।
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फर्क सिर्फ इतना है कि असली चुड़ैल के पास कपड़े नहीं थे।
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वो दोस्त उसको देखकर आधा डैड तो ऐसे ही हो गया था।
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दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया।
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मुँह से जायाबाया ही निकलने लगा, ना चीखा गया न चिल्लाया गया, ना तो स्पष्ट रूप से कोई शब्द निकला।
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चुड़ैल ने चीखना शुरू किया तो उस दोस्त की खैर ना रही।
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उसने जैसा ही मुड़कर भागना शुरू किया तो चुड़ैल ने उसे दबोच दिया और उसकी पीठ पर चढ़ गई।
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चुड़ैल उसे नीचे दबाने का प्रयास करने लगी।
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उस दोस्त को ऐसा लगा जैसे किसी ने 2 क्विंटल वजन पीठ पर रख दिया हो और वो खड़ा भी नहीं रह पाया।
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घुटनों के बल बैठा गया।
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वो चुड़ैल उसके बाल नोचने लगी और चिल्लाने लगी।
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उस चुड़ैल ने उसको 3-4 सैकिण्ड में ही इतना झकझोर दिया कि वो घुटनों के साथ साथ कोहनियाँ भी जमीन पे टिका बैठा।
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इससे उस चुड़ैल का वजन भी नहीं सम्भाला जा रहा था।
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वो चुड़ैल इसके बैग से उन पँजों को निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिन बैग इसके कन्धों पर मजबूती से बन्धा था।
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इतने में उस दोस्त को उस त्रिशूल की थोड़ी सी चुभन लगी।
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इसने जैसे तैसे वो त्रिशूल निकाला और पीछे को तरफ़ चुड़ैल के पेट में दे मारा।
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चुड़ैल उछलकर साईड में गिर गई और जोर जोर से चिल्लाने लगी।
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इसने तुरन्त वो बैग उतार के फैंक दिया और त्रिशूल पकड़ कर 100 को स्पीड से घर पहुँच गया।
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सारी घटना 1 मिनट से भी कम समय में घटित हो गई।
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देवता के मन्दिर में जूतों समेत घुस गया दरवाजे को भी लात की मारी और सीधा देवता के रथ के पास चिपक कर बैठा गया।
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घरवाले परेशान हो गए कि इसको क्या हुआ ?
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अभी 2-3 मिनट भी नहीं हुए थे इसको घर पहुँचे कि इसके अन्दर उस त्रेखड़ू की सवारी आ गई और इसकी बॉडी बहुत बुरी तरह से वाइब्रेट करने लगी।
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इसके अंदर जो शक्ति आई उसने अपना इंट्रोडक्शन दिया कि मैं वही मसाण हूँ जो इसके सपने में आया था।
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इसने उसी सवारी की अवस्था वहाँ पर खुद ही गोबर से लिपाई पुताई की, त्रिशूल गाड़ा और पूजा पाठ कर के अपना स्थान स्थापित किया।
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लड़का इस के बाद बेहोश हो गया।
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जब होश में आया तो कहा कि इसे वही मसाण दिखा और नाभि से लेकर माथे तो ज्योतियाँ जलती हुई नजर आई।
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उसके बाद उन ज्योतियों की एक लाइट बन गई और होश में आने से पहले तक लगातार दिखाई दी।
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ऐसे इसके अनुभव हैं।
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अगर इसके आसपास कोई भूतप्रेत हो तो इसे तुरन्त नजर आ जाता है।
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इसकी कुण्डली के पॉइंट्स जो इसके भूत प्रेतों से सम्पर्क को स्पष्ट करते हैं।
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जन्म - 31 जलाई 1996
।
समय - 06:49 बजे
।
स्थान - मण्डी हिमाचल प्रदेश।
।
।
[1] कर्क लग्न की कुण्डली में लग्न में सूर्य साहसी बना रहा है औऱ देव ग्रह लग्न में होने से धार्मिक पूजा पाठ में रुचि है।
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[2] तृतीय भाव में क्रूर ग्रह राहु है जो साहस दे रहा है।
।
[3] तृतीय भाव पर मंगल की चतुर्थ दृष्टी होने से पराक्रम में वृद्धि है।
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इन 3 कारणों से ये भूत प्रेत आदि से लड़ने का साहस मिल गया।
।
भले ही चुड़ैल के हमले से डरा जरूर लेकिन साहस के साथ सामना कर के त्रिशूल उसके पेट मे घुसेड़ दिया।
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इसके दिमाग ने ये काम किया कि उस बैग को फैंक और भाग जा।
।
[4] अष्टम भाव पर व्ययेश बुध की दृष्टि है जो गुप्त रहस्य खोलने का काम कर रही है।
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[5] द्वादश का स्वामी अष्टम से सम्पर्क करे तो विपरीत परिस्थिति से लाभ मिलता है।
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किसी गुप्त शक्ति का लाभ इसे सामान्य नहीं बल्कि विपरीत परिस्थिति के पश्चात मिला है।
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[6] अष्टम भाव मृत्यु का होता है और शनि मृत्युकारक होता है।
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इस कुण्डली में शनि अष्टम भाव का स्वामी होकर नवम भाव में है जो मृत्यु से सम्बंधित घटना को आध्यात्म और धार्मिकता से जोड़ेगा।
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[7] शनि के साथ केतु का होना कष्टकारी योग तो बना रहा है,और राहु के साथ दृष्टि सम्बन्ध काफी अधिक प्रबलता से प्रेतात्माओं से सम्बन्ध दर्शा रहा है जिसके कारण ये प्रेतात्मा से परेशान हुआ।
।
जब भी कहीं भूत प्रेत पिशाच की बात आएगी तो राहु केतु और शनि उसमें इन्वॉल्व होंगे ही होंगे।
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शनि मृत्यु सम्बन्धित अर्थात मरे हुए लोग।
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राहु भटकती हुई आत्मा या रूह।
।
केतु कष्ट और भय देने वाला।
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ये योग इसका इन प्रेतात्माओं से सम्पर्क बनाते हैं।
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जो ग्रह इन शक्तियों से हमारा सम्पर्क करवाता है, वही हमें इनको झेलने की और सहन करने की हिम्मत देता है।
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ये प्रेत साधना और शमशानी क्रियाओं में अधिक रुचि रखेगा।
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क्योंकि इसके सम्पर्क अभी से प्रेतात्माओं से होने लगे हैं।
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अभी इसको भूत प्रेत देखने की आदत पड़ गई है।
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लेकिन जब भी ये उस चुड़ैल का किस्सा सुनाता है तो इसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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क्या आप जानते थे कि घर मे बाँस और इन्सान का बाल क्यों नहीं जलाते?
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चुड़ैल को इन्सान के जलते हुए बालों की बदबू बहुत पसन्द होती है।
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जहाँ भी इन्सान के बाल जलाए जाते हैं, उसके जगह के आसपास चुड़ैल मण्डराना शुरू कर देती है।
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इसलिए बुजुर्ग कहते थे कि बालों को जलाते नहीं हैं।
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आजतक बाल जलाने की भी कोई फैक्ट्री नहीं है ना तो बालों को डिस्पोज किया जाता है।
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इसकी वजह यही है कि जहाँ बाल जलाए जाते हैं वहाँ चुड़ैल आती है और सब बर्बाद करती है।
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चुड़ैल साधना करने वाले तान्त्रिक साधना के समय उजाड़ स्थान में इन्सान के बाल जलाकर उसका हवन करते हैं।
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जिसकी बदबू चुड़ैल को आकर्षित करती है।
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बाँस की बारीक छड़ी के मनके बनाकर माला बनाई जाती है जिसपर मन्त्र जाप से चुड़ैल जल्दी आकर्षित होती है।
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इन कारणों से बाँस की लकड़ी चूल्हे में नहीं जलाते हैं और इन्सान के बाल भी नहीं जलाए जाते हैं।
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वैसे तो एक साधक ने ऐसा भी कहा है कि 7-8 किलो इन्सानी बाल अमावस की रात को सुनसान उजाड़ इलाके में 12 बजे जलाओ तो चुड़ैल प्रत्यक्ष आ जाती है।
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वचनों में बांध लेती है, अगर वचन तोड़े तो जान से मार देती है।
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हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले में बल्ह घाटी में खांदला में चुड़ैल वंशजों का गाँव है।
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बहुत साल पहले उनके किसी बुजुर्ग ने चुड़ैल को पत्नी बनाकर रखा था।
।
उनके बच्चे भी हुए थे।
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चुड़ैल की इतनी शर्त थी कि जब वो खाना बनाये तो कोई रसोई में ना जाये।
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एक दिन उस कोई आदमी गलती से रसोई के दरवाजा खोलकर अंदर चला गया।
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उसने देखा कि औरत ने अपनी टांगे चूल्हे में डालकर आग जलाई थी और स्तन की कड़छी बनाकर पतीले में तड़का लगा रही थी।
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वो आदमी चिल्लाया और चुड़ैल गायब हो गई।
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जिसकी वो पत्नी बनी थी वो भी मर गया।
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आपने सुना होगा कि चुड़ैल के पैर उल्टे होते हैं।
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ऊँगलियाँ पीछे को तरफ और एड़ी आगे की तरफ होती है।
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उसके पैर इस तरह से उल्टे नहीं होते हैं।
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ये कुण्डली मेरे दोस्त की है जिसके साथ चुड़ैल की लड़ाई हुई है।
।
उसने चुड़ैल को बहुत गौर से देखा था।
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उसके 3 अनुभव संक्षेप में -
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[1] वो अपने पिता के साथ अपने देवता को लेकर किसी के घर प्रेत बाधा की शान्ति के लिए गया था।
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सिगरेट पीने की आदत है।
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घर से थोड़ा दूर घने पेड़ों के बीच चला गया।
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उसने सिगरेट मुँह में रखी और लाइटर जलाया।
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लाईट में उसके सामने 7-8 फ़ीट को दूरी पर कम्बल में बैठा हुआ कोई दिखा।
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उसने पूछा कि कौन है ?
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कोई जवाब नहीं मिला।
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इसको भूत देखने का बहुत शौक था।
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उसने लाइटर जला के जैसे ही कम्बल हटाया तो एक बहुत भद्दी शक्ल वाली बूढ़ी औरत थी जिसके बाल बिखरे थे और ऐसा लग रहा था वो कई सालों से नहाई नहीं है।
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उसकी आँखें बिल्कुल वैसी थी जैसे कि डॉक्टर पलकें खींच के चैक करता है।
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वो प्रेतनी झल्ला गई और उठ कर खड़ी हो गई।
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ये जंगल मे इतना डरा तो नहीं लेकिन भाग के आया कि इसे भूत मिला है।
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जब ये घर के अन्दर आ गया तो दरवाजा बन्द किया और कुंडी लगा दी।
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जंगल में नहीं डरा लेकिन घर में आने के बाद इसको डर लगा क्योंकि वो बूढ़ी घर के अन्दर दूसरे कमरे से निकल कर इसके सामने आई।
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उसके साथ एक और गन्दा जैसा दिखने वाला आदमी भी था जिसका एक हाथ नहीं था।
।
तीसरी औरत भी इसके सामने आई जिसका हुलिया मुझे याद नहीं है।
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ये 3 प्रेत इसके पहले अनुभव में इसने देखे।
।
उस घर में सिर्फ इसे और इसके पिता को ही वो दिखे थे और देवता की पूजा समाप्ति के पश्चात वो भस्म हो गए थे।
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[2] ये सुबह 5 बजे के आसपास उठता है और नहाने के लिए घर से थोड़ा दूर बावड़ी से पानी लाता है।
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रास्ते में जाते हुए इसके गांव के एक आदमी ने अपने घर की छत पर से इसको आवाज लगाई और हालचाल पूछा।
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1-2 मिनट बात हुई।
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थोड़ा आगे जाने पर इसको याद आया कि ये आदमी तो 2 दिन पहले मर चुका है।
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जब इसने पीछे मुड़कर देखा तो छत पर कोई नहीं था।
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ये दौड़कर घर वापस आ गया और काफी घबरा गया था।
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[3] ये देवता का पुजारी बन गया है।
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इसे रात को सपना हुआ और एक त्रेखड़ू ( मसाण ) इसके सपने में आया।
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उसने कहा कि मैं तेरे पास आने वाला हूँ, तू मेरी देवी के पास जाकर मेरी निशानी ला।
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उसने किसी देवी का नाम लिया था जो इसने पहले नहीं सुना था।
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उस त्रेखड़ू की हाईट काफी बड़ी थी, भयानक चेहरा था, काले कपड़े पहने थे।
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हाथ पैरों में मोटी मोटी जंजीरें बंधी थी और गले में भी बहुत मोटा लोहे का कड़ा पहना था।
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इसने ये बात अपने पिता को बताई और उन्होंने देवता से सम्पर्क कर के सपने का बारे में पूछा तो देवता ने कहा कि सपने में सही जानकारी मिली है उस देवी का मन्दिर ढूंढो।
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हफ्ते भर की तलाश में इसने वो देवी ढूंढ ली और उसके पुजारी से बात की।
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पुजारी ने देवी से सम्पर्क साध के इसकी बात को कन्फर्म किया।
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देवी के आदेश से पुजारी ने इसे एक फुट का त्रिशूल दिया जो उस मसाण की निशानी बताई।
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इसने त्रिशूल अपने जैकेट में अंदर को तरफ पैंट में फंसा दिया और घर आने लगा।
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रास्ते में इसने बकरे के पंजे खरीद लिए और बैग में डालकर चल पड़ा।
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बस में बैठा और रात के 11-12 बजे के आसपास अपने इलाके में पहुँचा।
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सुनसान इलाका था और ये अकेला ही पैदल चला था।
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कुछ आगे जाने के बाद इसे जोर जोर घुँघरू खनकने की आवाज सुनाई देने लगी।
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पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था।
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इसको आभास हो गया था कि कुछ होने वाला है।
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इसने खुद को तैयार कर लिया कि अब कुछ भी हो सकता है क्योंकि बैग में मांसाहार है।
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थोड़ी देर बाद इसे बहुत बुरी बदबू आने लगी जैसे किसी के बाल जलाए जा रहे हो।
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फिर इसे दोबारा घुँघरू बजने की आवाज सुनाई दी।
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जब ये पीछे मुड़ा तो इसके प्राण पंखेरू उड़ने को हो गए।
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इसके 10-12 फ़ीट दूर एक निर्वस्त्र औरत थी जो हवा में 3-4 फ़ीट ऊपर उड़ी हुई थी।
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हाइट एक सामान्य औरत जितनी थी।
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उसके स्तन लम्बे थे जो उसने दुपट्टे की तरह पीछे की तरफ ओढ़ दिए थे।
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उसकी शक्ल बहुत डरावनी थी ऐसा लग रहा था खून पीकर आई है।
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उसकी आंखे बिल्कुल वैसी ही थी जैसे उस बूढ़ी प्रेतनी की थी।
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चेहरे के हावभाव से ऐसा लग रहा था कि बहुत ज्यादा गुस्से में है और अभी इसको खत्म कर देगी
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उसके बाल ऐसे थे जैसे किसी औरत के बाल भेड़ बकरी के बाल काटने वाली कैंची से बहुत बेढंगे तरीके से काटे हों।
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माथे पर सिन्दूर जैसी चीज लगी थी लेकिन ऐसे लगी थी जैसे लीपा पोती की है।
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उसका शरीर किसी कंकाल की तरह कमजोर था।
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उसके हाथ की उंगलियां और नाखून बहुत लम्बे थी और हाथ पीछे को तरफ ऐसा मुड़े थे जैसे किसी का हाथ मरोड़ के पीछे की तरफ कर दिया हो।
।
।
उसके पैर उल्टे थे।
।
लेकिन वैसे नहीं जैसा हम सुनते हैं कि एड़ी आगे की तरफ और उंगलियां पीछे की तरफ होती हैं।
।
।
उसके पैर भी बिल्कुल वैसी ही मरोड़ी हुई अवस्था में थे जैसे हाथ थे।
।
उसके तलवे ऊपर की तरफ थे और ऊपर का हिस्सा जमीन को तरफ था।
।
पैरों के नाखून भी ऊपर की दिशा में मुड़े थे।
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।
उस चुड़ैल का लगभग 80 % हुलिया इस फोटो में दी हुई चुड़ैल की तरह ही था।
।
फर्क सिर्फ इतना है कि असली चुड़ैल के पास कपड़े नहीं थे।
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वो दोस्त उसको देखकर आधा डैड तो ऐसे ही हो गया था।
।
दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया।
।
मुँह से जायाबाया ही निकलने लगा, ना चीखा गया न चिल्लाया गया, ना तो स्पष्ट रूप से कोई शब्द निकला।
।
चुड़ैल ने चीखना शुरू किया तो उस दोस्त की खैर ना रही।
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।
उसने जैसा ही मुड़कर भागना शुरू किया तो चुड़ैल ने उसे दबोच दिया और उसकी पीठ पर चढ़ गई।
।
चुड़ैल उसे नीचे दबाने का प्रयास करने लगी।
।
उस दोस्त को ऐसा लगा जैसे किसी ने 2 क्विंटल वजन पीठ पर रख दिया हो और वो खड़ा भी नहीं रह पाया।
।
घुटनों के बल बैठा गया।
।
वो चुड़ैल उसके बाल नोचने लगी और चिल्लाने लगी।
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उस चुड़ैल ने उसको 3-4 सैकिण्ड में ही इतना झकझोर दिया कि वो घुटनों के साथ साथ कोहनियाँ भी जमीन पे टिका बैठा।
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इससे उस चुड़ैल का वजन भी नहीं सम्भाला जा रहा था।
।
वो चुड़ैल इसके बैग से उन पँजों को निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिन बैग इसके कन्धों पर मजबूती से बन्धा था।
।
इतने में उस दोस्त को उस त्रिशूल की थोड़ी सी चुभन लगी।
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इसने जैसे तैसे वो त्रिशूल निकाला और पीछे को तरफ़ चुड़ैल के पेट में दे मारा।
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चुड़ैल उछलकर साईड में गिर गई और जोर जोर से चिल्लाने लगी।
।
।
इसने तुरन्त वो बैग उतार के फैंक दिया और त्रिशूल पकड़ कर 100 को स्पीड से घर पहुँच गया।
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सारी घटना 1 मिनट से भी कम समय में घटित हो गई।
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देवता के मन्दिर में जूतों समेत घुस गया दरवाजे को भी लात की मारी और सीधा देवता के रथ के पास चिपक कर बैठा गया।
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घरवाले परेशान हो गए कि इसको क्या हुआ ?
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अभी 2-3 मिनट भी नहीं हुए थे इसको घर पहुँचे कि इसके अन्दर उस त्रेखड़ू की सवारी आ गई और इसकी बॉडी बहुत बुरी तरह से वाइब्रेट करने लगी।
।
।
इसके अंदर जो शक्ति आई उसने अपना इंट्रोडक्शन दिया कि मैं वही मसाण हूँ जो इसके सपने में आया था।
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इसने उसी सवारी की अवस्था वहाँ पर खुद ही गोबर से लिपाई पुताई की, त्रिशूल गाड़ा और पूजा पाठ कर के अपना स्थान स्थापित किया।
।
लड़का इस के बाद बेहोश हो गया।
।
।
जब होश में आया तो कहा कि इसे वही मसाण दिखा और नाभि से लेकर माथे तो ज्योतियाँ जलती हुई नजर आई।
।
उसके बाद उन ज्योतियों की एक लाइट बन गई और होश में आने से पहले तक लगातार दिखाई दी।
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ऐसे इसके अनुभव हैं।
।
अगर इसके आसपास कोई भूतप्रेत हो तो इसे तुरन्त नजर आ जाता है।
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।
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इसकी कुण्डली के पॉइंट्स जो इसके भूत प्रेतों से सम्पर्क को स्पष्ट करते हैं।
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।
जन्म - 31 जलाई 1996
।
समय - 06:49 बजे
।
स्थान - मण्डी हिमाचल प्रदेश।
।
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[1] कर्क लग्न की कुण्डली में लग्न में सूर्य साहसी बना रहा है औऱ देव ग्रह लग्न में होने से धार्मिक पूजा पाठ में रुचि है।
।
[2] तृतीय भाव में क्रूर ग्रह राहु है जो साहस दे रहा है।
।
[3] तृतीय भाव पर मंगल की चतुर्थ दृष्टी होने से पराक्रम में वृद्धि है।
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इन 3 कारणों से ये भूत प्रेत आदि से लड़ने का साहस मिल गया।
।
भले ही चुड़ैल के हमले से डरा जरूर लेकिन साहस के साथ सामना कर के त्रिशूल उसके पेट मे घुसेड़ दिया।
।
इसके दिमाग ने ये काम किया कि उस बैग को फैंक और भाग जा।
।
[4] अष्टम भाव पर व्ययेश बुध की दृष्टि है जो गुप्त रहस्य खोलने का काम कर रही है।
।
[5] द्वादश का स्वामी अष्टम से सम्पर्क करे तो विपरीत परिस्थिति से लाभ मिलता है।
।
किसी गुप्त शक्ति का लाभ इसे सामान्य नहीं बल्कि विपरीत परिस्थिति के पश्चात मिला है।
।
[6] अष्टम भाव मृत्यु का होता है और शनि मृत्युकारक होता है।
।
इस कुण्डली में शनि अष्टम भाव का स्वामी होकर नवम भाव में है जो मृत्यु से सम्बंधित घटना को आध्यात्म और धार्मिकता से जोड़ेगा।
।
[7] शनि के साथ केतु का होना कष्टकारी योग तो बना रहा है,और राहु के साथ दृष्टि सम्बन्ध काफी अधिक प्रबलता से प्रेतात्माओं से सम्बन्ध दर्शा रहा है जिसके कारण ये प्रेतात्मा से परेशान हुआ।
।
जब भी कहीं भूत प्रेत पिशाच की बात आएगी तो राहु केतु और शनि उसमें इन्वॉल्व होंगे ही होंगे।
।
शनि मृत्यु सम्बन्धित अर्थात मरे हुए लोग।
।
राहु भटकती हुई आत्मा या रूह।
।
केतु कष्ट और भय देने वाला।
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ये योग इसका इन प्रेतात्माओं से सम्पर्क बनाते हैं।
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जो ग्रह इन शक्तियों से हमारा सम्पर्क करवाता है, वही हमें इनको झेलने की और सहन करने की हिम्मत देता है।
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ये प्रेत साधना और शमशानी क्रियाओं में अधिक रुचि रखेगा।
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क्योंकि इसके सम्पर्क अभी से प्रेतात्माओं से होने लगे हैं।
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अभी इसको भूत प्रेत देखने की आदत पड़ गई है।
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लेकिन जब भी ये उस चुड़ैल का किस्सा सुनाता है तो इसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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क्या आप जानते थे कि घर मे बाँस और इन्सान का बाल क्यों नहीं जलाते?
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चुड़ैल को इन्सान के जलते हुए बालों की बदबू बहुत पसन्द होती है।
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जहाँ भी इन्सान के बाल जलाए जाते हैं, उसके जगह के आसपास चुड़ैल मण्डराना शुरू कर देती है।
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इसलिए बुजुर्ग कहते थे कि बालों को जलाते नहीं हैं।
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आजतक बाल जलाने की भी कोई फैक्ट्री नहीं है ना तो बालों को डिस्पोज किया जाता है।
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इसकी वजह यही है कि जहाँ बाल जलाए जाते हैं वहाँ चुड़ैल आती है और सब बर्बाद करती है।
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चुड़ैल साधना करने वाले तान्त्रिक साधना के समय उजाड़ स्थान में इन्सान के बाल जलाकर उसका हवन करते हैं।
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जिसकी बदबू चुड़ैल को आकर्षित करती है।
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बाँस की बारीक छड़ी के मनके बनाकर माला बनाई जाती है जिसपर मन्त्र जाप से चुड़ैल जल्दी आकर्षित होती है।
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इन कारणों से बाँस की लकड़ी चूल्हे में नहीं जलाते हैं और इन्सान के बाल भी नहीं जलाए जाते हैं।
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वैसे तो एक साधक ने ऐसा भी कहा है कि 7-8 किलो इन्सानी बाल अमावस की रात को सुनसान उजाड़ इलाके में 12 बजे जलाओ तो चुड़ैल प्रत्यक्ष आ जाती है।
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वचनों में बांध लेती है, अगर वचन तोड़े तो जान से मार देती है।
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हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले में बल्ह घाटी में खांदला में चुड़ैल वंशजों का गाँव है।
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बहुत साल पहले उनके किसी बुजुर्ग ने चुड़ैल को पत्नी बनाकर रखा था।
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उनके बच्चे भी हुए थे।
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चुड़ैल की इतनी शर्त थी कि जब वो खाना बनाये तो कोई रसोई में ना जाये।
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एक दिन उस कोई आदमी गलती से रसोई के दरवाजा खोलकर अंदर चला गया।
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उसने देखा कि औरत ने अपनी टांगे चूल्हे में डालकर आग जलाई थी और स्तन की कड़छी बनाकर पतीले में तड़का लगा रही थी।
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वो आदमी चिल्लाया और चुड़ैल गायब हो गई।
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जिसकी वो पत्नी बनी थी वो भी मर गया।

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