Wednesday, July 3, 2019

शस्त्राघात योग [उरी ]

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳#जय_हिन्द🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳


आज की कुंडली एक🇮🇳💣💥 #वीर_जाँबाज_फौजी 💥💣🇮🇳की है।


सरकारी मामलों की वजह से फौजी को टैग नहीं किया गया है और ना फौजी के अकाउंट का लिंक दिया गया है।

फौजी का नाम - #विक्रम_सिंह

💣【 #आर्म्ड_कोर 】💣

🇮🇳🇮🇳#भारतीय_सेना🇮🇳🇮🇳 में 🚀#टैंकर🚀 चलाता है।




जब 12 अप्रैल 2017 को शाम 3:03 बजे आतंकियों ने #उरी में हमला किया तो इस जवान की ड्यूटी भी उरी में ही थी।


सेना पर अचानक #आतंकी_हमला हुआ और #जंग शुरू हो गई।


4 घण्टे की उस जंग में विक्रम सिंह भी फौजियों के साथ जंग में डटा रहा।

जब आखिर के #डेढ़_घण्टे की जंग बाकी थी तो विक्रम सिंह की  #दाईं_जांघ पर #गोली लग गई।

लेकिन विक्रम सिंह ने गोली की परवाह ना करते हुए भी लगतार #फायरिंग जारी रखी।

4 घण्टे की उस जंग में शुरू से आखिर तक आतंकियों पर #ताबड़तोड़_फायरिंग जारी रखी।


टाँग जख्मी हो गई लेकिन बन्दे का #दम नहीं टूटा।


#लँगड़ी हालत में भी डेढ़ घण्टे तक #मैदान में डटा रहा।


गोली ने लगने के बाद भी अपने पैरों पर खड़ा रहा।

जब अपनी जांघ को देखा तो गोली लगने की जगह से #पैंट_के_परखच्चे उड़ गए थे और जाँघ से #पट्ट_का_माँस भी #उखड़ गया था।


हौंसला देखो फौजी का - कहता है कि बिगड़ा क्या है ?


जंग खत्म होते होते सारे कपड़े खून से लथपथ थे जूता भी खून से भर गया था।


जंग खत्म हो गई थी।


विक्रम सिंह को चक्कर आने लगा था क्योंकि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण कमजोरी आ गई थी।


विक्रम सिंह को हॉस्पिटल ले जाया गया और ट्रीटमैंट शुरू हुआ।


घर में ये बताया गया कि लम्बे समय के लिए ड्यूटी कहीं बाहर लगी है।

1 साल लगे इस जवान को ठीक होने में।


तब तक घर से दूर।


आजकल ये जवान इण्डियन आर्मी में देश के लिए अपनी सेवाएँ दे रहा है।


उसी #दमखम के साथ #भारत_माता_का_लाल #सरहद पर #सीना_तान_के_खड़ा है।


🙏धन्य हैं वो माता पिता जिनके घर एक फौजी जन्म लेता है🙏



इस बहादुर की कुण्डली के कुछ पॉइंट्स जो #शस्त्राघात को स्पष्ट करते हैं।


जन्म - 18 सितम्बर 1992
समय - सुबह 9:00 बजे
स्थान - नंगल


#अंगारक_योग का दूसरा रूप #शस्त्राघात_योग है।


मंगल के साथ राहु केतु हो तो अंगारक योग बनता है, इसी योग को आप शस्त्राघात योग भी कहेंगे।

मंगल रक्त होता है और केतू चीरे चोट का कारक होता है।

जब चीरा या चोट लगेगी तो रक्त बहेगा ही।


इस योग वाले व्यक्तियों को हथियारों के साथ विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।


ऐसे लोगों को कभी कैंची से चीरे लगते हैं कभी ब्लेड से तो कभी छुरी से



शस्त्राघात किस प्रकार का होगा इसका अनुमान कुण्डली में स्थित ग्रहों के भाव तथा राशियों के तत्व को देखकर स्पष्ट हो सकता है।


अंगारक योग अग्नितत्व की राशि मे हो तो बम से जख्मी हो सकते हैं क्योंकि आग बम से ही निकलेगी।

यदि यह योग जल तत्व की राशि मे हुआ तो लचीले हथियार से हमला हो सकता है जैसे कि किसी को चाबुक से मारा जाए।

यदि योग पृथ्वी तत्व की राशि में हुआ तो पैने हथियार जैसे तलवार,छुरा आदि मारा जा सकता है या डण्डे से सिर फोड़ दिया जाए।

वायु तत्व की राशि में हो तो हवा में गति करने वाले हथियार जैसे बाण या बन्दूक की गोली आदि से हमला होगा।


जिस भाव में यह योग बने उस भाव का अंग कालपुरूष की कुण्डली में देखकर शरीर के भाग का अनुमान लगाया जा सकता है।



[1] तुला लग्न की कुंडली में मंगल और केतु नवम भाव में अंगारक और शस्त्राघात योग बना रहे हैं।

[2] नवम भाव कालपुरूष की कुण्डली में जाँघ का होता है।

[3] नवम भाव में वायु तत्व की मिथुन राशि बनी है।


सीधा स्पष्ट हो रहा है कि शस्त्र का आघात जाँघ पर होगा और हवा में गति करने वाले शस्त्र से आघात होगा और बन्दूक की गोली लगी है


[4] चतुर्थ भाव में स्वगृही शनि से शशक महापुरुष राजयोग बना है।

[5] षष्टम भाव का स्वामी बृहस्पति द्वादश भाव में जाकर विपरीत राजयोग बना रहा है।

[6] द्वादश का स्वामी बुध द्वादश में ही उच्च राशि में है।

[7] अष्टम भाव का स्वामी भी द्वादश में ही है नीच राशि का है लेकिन बुध के कारण नीचभंग होकर विपरीत राजयोग बना है।

जब इतने विपरीत राजयोग बने हैं तो व्यक्ति दुश्मनों से वीरता के साथ जंग करेगा ही।



जब तक देश में पुलिस और सरहद पर फौजी हैं तब तक हम सुरक्षित हैं।


🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिन्द जय भारत🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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