Saturday, April 27, 2019

राहु द्वारा निर्मित राजयोग

#राहु_द्वारा_निर्मित_राजयोग।
राहु और केतु को बाधा कारक और नुक्सान दायक ग्रह कहा गया है और इनके प्रभाव से अधिकतर संकट आते ही देखे गए हैं।
लेकिन कुछ परिस्थितियों में ये राजयोग का निर्माण कर देते हैं।
शास्त्रों में ये कहा गया है -
यदि केन्द्रे त्रिकोणे वा निवसेतां तमोग्रहौ।
नाथेनान्यतरस्यैव सम्बन्धाद्योगकारक:।।
अर्थ - तमोग्रह राहु अथवा केतु केन्द्र या त्रिकोण के स्वामी का साथ केन्द्र या त्रिकोण में हो तो वह योगकारक बनता है।
शास्त्रों में वैसे राहु और केतु दोनों के द्वारा निर्मित राजयोग के बारे में कहा गया है लेकिन मैंने राहु द्वारा निर्मित राजयोग में सफलता अधिक और केतु द्वारा निर्मित राजयोग में नुक्सान और अधिक देखे गए हैं।
क्योंकि केतु बाधा कारक है और हर काम मे अड़ंगा पैदा होता है।
राहु द्वारा सफलता इसलिए देखी गई क्योंकि ये गुप्त युक्तियाँ बहुत बनाता है अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए।
राहु बहुत बड़ा ठग है, कोई इसको ठगना चाहे तो आसानी से नहीं ठग सकता है।
जिसे #भगवान_विष्णु का #मोहिनी रूप नहीं ठग सका, उसे कोई क्या ठगेगा ?
कोई राहु को ठगने आये, तो ये उल्टा उसे ठग दे।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण मिस्टर नटवर लाल है जिसने ताजमहल और लाल किला भी विदेशियों को बेच दिया था।
जेल से फरार हो जाता था।
जेल से फरार होने के पीछे उसकी युक्ति ये थी -
किसी कमजोर सोच वाले पहरेदार सन्तरी को पकड़ा और उसे लालच दे दिया कि मेरे पास तो वैसे भी अरबों रुपये हैं।
तुम्हें 1000 की नौकरी कर के फायदा भी क्या है ?
अगर मुझे यहां से भागने में मदद करो तो 3-4 लाख तुम्हें दे दूँगा।
तुम्हारी नौकरी भी नहीं जाएगी और पैसा भी खूब मिलेगा।
छोटी और कमजोर सोच पैसे के बोझ तले बड़ी खूबी के साथ दफन हो जाती है।
इसी तरह 2-4 पहरेदारों की मदद से वो युक्तियाँ बनाकर भाग जाता और पहरेदारों को बाद में कुछ भी नहीं देता था, पहरेदार की नौकरी जाए तो जाए।
पकड़े जाने पर उसने ये ऑफर तक दे दिया कि भारत सरकार उसे परमिशन दे तो वो विदेशियों को ठग कर भारत का सारा कर्ज उतार सकता है।
या तो ये उसका बहुत बड़ा विश्वास था या बहुत बड़ी ठगी थी जिसे वो भारत सरकार के साथ करना चाहता था।
राहु की इसी चतुराई के कारण सफलता अधिक देखी है।
बड़े से बड़ा ठग हो तो वो भी पकड़ा जाता है क्योंकि राहु का भेद सूर्य और चन्द्रमा ने खोल दिया था।
आज भी सूर्य अर्थात राजा से ठग नहीं बच पाते।
दशम भाव का राहु अगर किसी जातक को CID, इंटेलीजेंस ब्यूरो, RAW एजेंट जैसे बड़े बड़े सरकारी जासूसी कामों में लगा देता है और ये सरकारी जासूस विदेश में जाकर लोगों को ठग ठग के ही तो जानकारी निकालते हैं क्योंकि दशम भाव में राहु राजयोग देता है, राजदण्ड नहीं देता है।
इसका उदाहरण #अजीत_डोवाल हैं जो पाकिस्तान में RAW एजेंट बनकर रहे और पकड़े भी नहीं गए।
सब दशम भाव के राहु का कमाल है, अजीत डोवाल की कुण्डली में भी दशम का राहु है।
[ अजित डोवाल - 20 जनवरी 1945 को 23:15 बजे पौड़ी गढ़वाल ]
ये कुण्डली जिनकी है वो इस वक़्त ये दिल्ली में #TIMES_OF_INDIA न्यूजपेपर में डिप्युटी मैनेजर हैं।
इनकी कुण्डली में भी राहु द्वारा निर्मित राजयोग है।
जॉब की तलाश शुरू कर दी।
 #दैनिक_जागरण से फोन आया कि जॉब पक्की है, जॉइन करो।
कुछ समय तक वहाँ जॉब की और #टाइम्स_ऑफ_इण्डिया से #असिस्टैंट_मैनेजर के लिए जॉब ऑफर आया।
वहाँ पर कुछ समय जॉब करने के बाद मन वैरागी हो गया और जॉब छोड़कर सन्त सन्यासी अघोरियों की संगति भी पकड़ ली
जब नोटबन्दी हुई 2016 में तो राहु ने लाभ दिया।
सारा देश #नोटबन्दी से परेशान था और ये सज्जन जी उस वक़्त #नोट कमा रहे थे।
दिसम्बर 2016 में इनको दोबारा टाइम्स ऑफ इण्डिया ने जॉब ऑफर किया लेकिन इस बार #असिस्टैंट नहीं #DEPUTY_MANAGER के लिए ऑफर दिया।
राहु की ही करामत है जो ऑफिस में जाकर अपने काम का ऐसा डंका बजा की असिस्टेंट की जॉब छोड़ने के बाद सीधे ही डिप्टी का ऑफर हाथ में आया।
इन्होंने इतने कम समय मे प्रॉपर्टी भी खरीदी और अपने लिए घर भी बनाया।
मैंने इनसे पूछा कि आपने अपने खराब वक़्त में उपाय कौन सा किया ?
तो इनका उत्तर ये था -
#रावणकृत_शिवताण्डव_स्तोत्र का पाठ रोज करता था।
जिस तकलीफ में रावण ने वो गाया था, वैसी ही हालत मेरी थी और मैं अपनी तकलीफ में पूजा के बाद इसे गाकर करता था।
यही हर स्थिति में इनका सबसे बड़ा उपाय रहा है और इनसे जिसने भी उपाय पूछा तो इन्होंने यही सजेशन दी।
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2237096983174173&id=100006216785535
इनकी कुण्डली में राहु द्वारा निर्मित राजयोग सीधा से देखने को मिल रहा है जिसकी अधिक व्याख्या देने की आवश्यकता ही नहीं है-
जन्म - 31 मई 1988
समय - सुबह 04:00 बजे 
स्थान - मैनपुरी
[1] वृषभ लग्न की कुण्डली में दशम भाव में सप्तम केंद्र का स्वामी मंगल है।
[2] केन्द्र का स्वामी केन्द्र में हो तो राजयोग बनता है, मंगल सप्तम का स्वामी होकर दशम भाव में दिग्बली है और राजयोग बना है।
[3] राहु का दशम भाव में गर्म ग्रह मंगल के साथ होना राहु द्वारा राजयोग निर्मित कर रहा है।
[4] केतु चतुर्थ भाव में है जिसने महादशा प्रारम्भ होते है माता को भी कष्ट में डाल दिया और स्वयं भी घर से बेघर हो गए।
[5] दशम के राहु मंगल से बने अंगारक योग ने पिता से झगड़ा करा के सब कुछ एकदम शून्य कर दिया।
[6] लेकिन राहु ने कामयाबी देना शुरू किया तो जितना खोया था, उससे 10 गुणा ज्यादा वापस दिया।
[7] राहु गुप्त युक्तियाँ बनाने में अव्वल होता है और सबसे ज्यादा लाभ राहु ने नोटबन्दी के समय में दिया था।
युक्तियाँ सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं।
ये कुण्डली राहु द्वारा निर्मित राजयोग का बहुत स्पष्ट सटीक उदाहरण है।

मदनगोपाल योग पॉर्नस्टार मिया खलीफा

#मदनगोपाल_योग


#पॉर्नस्टार_मिया_खलिफ़ा का नाम मेरी उम्र के लड़कों में बड़े आदर सम्मान से लिया जाता है।

करोड़ो युवाओं की भावनाएं मिया ख़लीफ़ा से जुड़ी हैं।


मिया खलीफा की कुण्डली में मदनगोपाल योग है।

सुनने में बड़ा धार्मिक योग लगता है और बड़ा नटखट नाम है मदनगोपाल का।


इस योग वालों के सम्बंध बहुत से स्त्री/पुरुषों से रहते हैं क्योंकि ये व्यभिचारी होते हैं।

भोग विलासिता इनका बहुत बड़ा आकर्षण होता है।


मदनगोपाल योग का सबसे बड़ा उदाहरण मंगल शुक्र की युति होना है।

लेकिन ऐसी स्थितियां देखी हैं जिनमें मंगल शुक्र भले ही इक्कठे ना हो लेकिन व्यक्ति/स्त्री व्यभिचारी जरूर होते हैं।


लग्नेश का सप्तम भाव में और सप्तमेश का लग्न में स्थानपरिवर्तन करना।

दोनों का दृष्टिसम्बन्ध होना और शुक्र का इसमें प्रभाव होना।

चन्द्रमा शुक्र का एकसाथ होना।

लग्न या सप्तम में शुक्र का होना या लग्नेश सप्तमेश दोनों का एक साथ होना और शुक्र भी इनके सामने या साथ में होना।

लग्न में या सप्तम भाव में उच्च शुक्र होना।


मीन लग्न में उच्च शुक्र किसी भी शुभयोग के मामले में सबसे बेकार कहा जा सकता है क्योंकि ये सिर्फ व्यभिचारी बना देता है।

मीन में लग्न में शुक्र योगकारक नहीं होता है।

ये अष्टमेश और तृतीयेश होकर उच्च हो जाता है।

उच्च होने से शरीर सुडौल आकर्षक बन जाता है लेकिन सप्तम भाव पर नीच दृष्टि वैवाहिक जीवन को नष्ट करती है।

मित्र/सहेलियां बहुत होते हैं और फ्रैंड सर्कल में ही कई मित्रों/ सहेलियों से सम्बन्ध भी बनते देखे गए हैं।


लग्न में उच्च शुक्र वाला जातक/जातिका ऑपोजिट जैण्डर को अट्रैक्ट बड़ा जल्दी कर लेता है लेकिन बात शारीरिक सम्बन्धो से आगे नहीं बढ़ती है।

क्योंकि उच्च शुक्र वालों का सप्तमेश हमेशा ही शुक्र से द्विद्वादश में रहता है।

जो कि अपने स्थान सप्तम भाव से षडाष्टक की स्थिति है और सप्तम भाव की हानि कर देती है।


यदि मीन लग्न के सप्तमेश बुध के साथ राहु अथवा केतु हो और शनि का प्रभाव हो तो तलाक हो जाता है या किसी अन्य प्रकार से वियोग होता है।

यदि बुध केतु या राहु इक्कठे हों और उन पर शनि का प्रभाव भी आ जाये तो पति सैक्सुअल कमजोर या पत्नी में किसी प्रकार की कमी होती है।

जिसके कारण वैवाहिक जीवन मे अतृप्तता आती है क्योंकि लग्न में उच्च शुक्र ने कामुक बनाया है और सप्तम भाव पर नीच दृष्टि डाल दी है।

बेड़ा गरका हो गया वैवाहिक जीवन का।


शुक्र विलासिता और कामुकता देता है।


ऐसे पुरुष आपको खुद से बहुत कम उम्र की लड़कियों से सम्बन्ध बनाते हुए भी मिलेंगे या जीजा साली के साथ सैटिंग में होगा या कोई स्त्री खुद से छोटी उम्र के लड़के के साथ सम्बन्ध बनाएगी, अथवा छोटी उम्र के देवर के साथ या आसपड़ोस सैटिंग करने वाली मिलेगी।


क्योंकि सप्तमेश बुध बाल्यावस्था का कारक है और छोटी उम्र के लकड़े अथवा लड़कियों से सम्बन्ध देता है।


कई बात पति भी पत्नी से छोटा देखा गया है जिसका कारण स्त्री का सप्तमेश बुध या सप्तमेश का बुध से सम्बन्ध होता है।


आपको कुछ राजनैतिक स्त्रियाँ ऐसी मिलेंगी जिनकी शिक्षा कम होगी और योग्यता भी चवन्नी के बराबर की होगी, लेकिन फिर भी बड़े बड़े पदों और मंत्रालयों पर राज करती होंगी।

ऐसा क्यों है?


उनका अधिकतर दशम भाव में शुक्र मिलेगा।

दशम का शुक्र सरकार में लाभ विलासिता के माध्यम से दे रहा है।

किसी बड़े मन्त्री को खुश कर दिया जाता है और वो इन्हें खुश कर देता है।


अब मन्त्री इन्हें यूज कर के छोड़ भी सकता है लेकिन इनको लाभ देने के लिए वो मजबूर होता है क्योंकि ये मन्त्री का ही MMS बना के रख भी लेती हैं और ब्लैकमेल भी कर देती हैं।


शुक्र राहु बहुत चतुर है ऐसे कांड करने में।


एक एक्ट्रैस सुंदर होती है, उसकी विवाह जल्दी नहीं होता है, और जब होता है तो किसी अधेड़ उम्र के आदमी के साथ होता है।


मॉडलिंग से शुरुआत होती है और राजनीति में में खत्म होती है।

ये शुक्र की देन है।

शुक्र सही और सप्तमेश खराब होता है उनका।
शुक्र के कारण फ़िल्म इंडस्ट्री मिली जिसमें रोल पाने के लिए भी इन डायरेक्टर प्रोड्यूसर के साथ सोना पड़ता है, तभी फ़िल्म मिलती है।


सबको मालूम होता है कि हीरोइन है और करेक्ट से लैस है।


इसलिए शादि भी नहीं होती।


शुक्र के कारण लग्ज़री मिली है लेकिन वैवाहिक सुख नहीं।



एक कुण्डली देखी थी मिथुन लग्न की जिसमें सप्तमेश बृहस्पति और लग्नेश बुध लग्न भाव में थे, द्वितीय भाव में शुक्र था।

कम से कम 200 औरतों से उस बन्दे की रिलेशन बने थे।


ऐसे बहुत सारे योग मिल जायेंगे।


अब कुछ योग ऐसे होते हैं जो सैक्स मामले में बदनाम कर देते हैं और कुछ नाम बना देते हैं।


जैसे कि पॉर्नस्टार #सन्नी_लियोन है, उसके दशम भाव में शुक्र है।

पोर्नस्टार भी बनी और फ़िल्म इंडस्ट्री में भी आई।



[ 13 मई 1981 समय 14:30 बजे सरनिया कनाडा में जन्म ]



मिया खलीफा की कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-


जन्म - 11 फरवरी 1993
समय - सुबह 8:30 बजे
स्थान - बेरूत लेबनॉन


[1] मीन लग्न में उच्च शुक्र लावण्यता वाला शरीर दे रहा है।

चेहरा ही कितना सुन्दर दुखता है, किसी भी पुरुष को जल्दी ही आकर्षित कर ले।

ऐसी लावण्यता और नयन नक्श शुक्र की देन है।

चेहरा गोरा होना सुंदरता नहीं होती, सांवला चेहरा भी सुंदर लगता है, अगर नयन नक्श सुन्दर हो।

इसकी धनुषाकार आईब्रोज शुक्र के प्रभाव को बहुत खूब दिखा रही हैं, धनुषाकार आईब्रोज वाले गीत संगीत कालकारी एक्टिंग और आर्ट में बहुत रुचि रखते हैं जिसका कारण शुक्र और चन्द्रमा है।

100 में से 95 लोगों की आईब्रोज धनुषाकार मिलेगी जिनके लग्न लग्नेश पर शुक्र का प्रभाव हो।

[2] चेहरा इतना सुगढ़ता वाला है जिसका कारण लग्न पर लग्नेश बृहस्पति की दृष्टि होना है।

शरीर सुन्दर ही है।


[3] सप्तम भाव में चन्द्रमा का होना सम्भोग में बहुत रुचि दिखा रहा है और इसने अपना प्रोफेशन भी यही चुना क्योंकि चन्द्रमा पर शुक्र का प्रभाव है।

[4] सप्तमेश बुध अपने स्थान से छठा जाकर सप्तम भाव की हानि कर रहा है।

[5] लग्न में उच्च शुक्र, स्तपम में चन्द्रमा, लग्नेश भी सप्तम में, और सप्तमेश अपने स्थान से छठा जाकर हानि कर रहा है।

सीधे सीधे इसका मदनगोपाल योग स्पष्ट हो रहा है।

[6] इतनी लग्जरी लाइफ जी रही है, अनेक पुरुषों से सम्बन्ध बनाती है और दुनियाँ भर में प्रसिद्ध है।

क्योंकि मालव्य योग, गजकेसरी योग, भाग्य और धन का स्वामी मंगल केन्द्र में, पँचमेश का सप्तम में होना इसको राजयोगों से मालामाल कर रहा है इसलिए तो ये ऐसी साक्षात कामदेव स्वरूपिणी देवी भोग विलास में आनन्द करती है।

[7] शुक्र पर कमाई के स्वामी शनि की दृष्टि है जो शुक्र के द्वारा कमाई का लाभ होने का योग बना रहा है और शुक्र अर्थात विलासिता से ये कमाई कर रही है।

[8] इसके भाग्य भाव में राहु नीच है जिसने इसे बड़ा धोखा दिया राहु महादशा में, इसको प्रसिद्धि पाने की इच्छा थी जो राहु पूरी नहीं होने देता था।

इसके राजयोग फल देने के लिए आतुर थे और 2014 में इसने मन के शौक के अनुसार अपना करियर एज ए पोर्नस्टार चूज कर लिया।

जैसे ही बृहस्पति की महादशा शुरू हुई, तो दुनियाँ भर में सबसे कम समय में सबसे अधिक रेटिंग पाने वाली पॉर्नस्टार बनी।


बड़ी मुश्किल से इसका कपड़े पहना हुआ फोटो ढूँढा है, नहीं तो ये कपड़ो के साथ मिलती ही कहाँ है?

सारे बर्तन भाण्डे यहाँ वहाँ खड़कते रहते हैं इसके।

[ मुझे इसकी आँखें जरा भी पसन्द नहीं हैं, बहुत बुरी लगती हैं, जैसे हवस और बेईमानी कूट कूट के इसकी आँखों से ही टपकती है। ]


[नोट -अब कृपा कर के मत पूछियेगा कि मैं इस चार्ट को कहाँ से लाया हूँ। ]

Wednesday, April 10, 2019

प्रेत बाधा

प्रेतबाधा या पिशाच योग।


यह योग तब बनता है जब कुण्डली में लग्न में या लग्न के स्वामी के साथ राहु, केतु हो।

चन्द्रमा के साथ शनि,राहु और केतु हो।

बृहस्पति के साथ राहु या केतु हो।

शनि मृत्युकारक ग्रह है, राहु और केतु भूत प्रेत से सम्बन्धित ग्रह हैं।


ऐसे योग वाले अधिकतर भूत प्रेत या पिशाच आदि की किसी बाधा का शिकार होते हैं।


चन्द्रमा मन का कारक है और जब मन पे भूत प्रेत आदि का प्रभाव होता है तो मानसिक संतुलन बिगड़ता है।

भूत प्रेत के कारण पागलपन होना भी इसका लक्षण है।

डॉक्टरी भाषा में भूत प्रेत का होना एक मेंटली डिसऑर्डर है।

जो कुछ समय के ट्रीटमैंट से ठीक हो जाता है।


लेकिन ये डिसऑर्डर एडवांस तब हो जाता है जब बॉडी में आया हुआ प्रेत किसी के बारे में उसकी सीक्रेट बात को बोल देता है।


वैज्ञानिकों के पास भूत प्रेत प्रेक्टिकल करवाने को नहीं आते हैं, ना दिखाई देते हैं, ना पकड़ में आते हैं।

इसलिए वो इन भूत प्रेतों के नकार देते हैं।


विज्ञान कहेगा कि एक मानसिक रोगी दवाई से ठीक हुआ।

लेकिन ज्योतिष कहेगा कि जब इसके बुरे ग्रह की दशा खत्म होगी तो ये बिना दवाई के भी ठीक हो जाएगा।

और होता यही है कि जितने समय तक बुरे ग्रह का प्रभाव रहता है, उतने समय तक बाधा रहती है।

जब बुरा समय समाप्त हो रहा हो तो वो जातक किसी मन्दिर में, तान्त्रिक के पास या डॉक्टर के पास ठीक हो जाता है।


नीच चन्द्रमा अगर राहु के साथ शनि के प्रभाव में हो तो बहुत ज्यादा सम्भावना है कि वो जातक प्रेतात्माओं द्वारा सताया जाएगा।


बृहस्पति राहु केतु हो तो प्रेत साधक हो सकता है।

ग्रहों का बल देखकर निर्णय होता है कि प्रेतबाधा परेशान करेगी या प्रेत पर कंट्रोल करेगा।

जो प्रेत साधना करता है वो भले ही उसको कंट्रोल कर ले।

लेकिन जो ग्रह उससे प्रेत की साधना करवा के कंट्रोल रख रहा है, उस ग्रह से सम्बन्धित रिश्ते का सुख उस व्यक्ति की जिन्दगी में नहीं होगा।

भले ही वो दुनियां को नजर में भूत कंट्रोल करता है लेकिन जिस रिश्ते का सुख उसकी जिन्दगी से समाप्त होगा वो प्रेतबाधा के कारण ही होगा।


दो लड़कियों की कुण्डलियाँ हैं जिनमें से एक अभी प्रेत बाधा से ग्रसित है और दूसरी की प्रेत बाधा खत्म हो चुकी है।


पॉइंट्स -

कुण्डली नम्बर 1-

जन्म - 23 अक्तूबर 1996 समय 12:54 बजे मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] मकर लग्न की कुण्डली में लग्न का स्वामी शनि है और शनि के साथ केतु है।

लग्नेश मृत्युकारक ग्रह है और लग्नेश की युति प्रेतबाधा कारक ग्रह केतु  के साथ तृतीय भाव में है।

प्रेत बाधा का प्रभाव बन रहा है।


[2] नवम भाव भाव में भाग्य के स्वामी बुध के साथ बैठा राहु भाग्य को खराब कर रहा है।

धर्मिकता को जगह पैशाचिकता का प्रभाव बढ़ रहा है, इसको भाग्य सम्बन्धित नकारात्मक परिणाम मिल रहा है।


[3] शनि+राहु+केतु+बुध का आपस में दृष्टि सम्बन्ध प्रेतबाधा का पूरा योग बना रहा है।


इस लड़की को प्रेत परेशान करता है, बॉडी में आकर बोलता है।

बुरे बुरे सपने आते हैं और रात को चिल्लाने के बाद जोर जोर से रोती है रोज पूजा पाठ करती है लेकिन भूत नहीं जाता है, कभी कभी पूजा पाठ के समय भी बॉडी में आकर बोलने लगता है।


कुण्डली नम्बर 2 -


जन्म- 4 अगस्त 1996 समय - 15:7 मिनट मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] वृश्चिक लग्न की कुण्डली में पँचम भाव में शनि और केतु के साथ भाग्य का स्वामी चन्द्रमा है।

[2] एकादश भाव में बैठे राहु के साथ शनि और चन्द्रमा का दृष्टि सम्बन्ध है।

[3] शनि+चन्द्रमा इक्कठे होने से विष्कुम्भ योग बना है।

[4] केतु+चन्द्रमा की युति से से चन्द्रग्रहण योग बना है जो मानसिक बल को कमजोर कर रहा है।

[5] इन दोनों योगों को मिलाकर पिशाच योग बन रहा है।


2015 के आसपास इस लड़की को प्रेत बाधा थी और इस लड़की को वो भूत उसके शरीर पर उससे शारीरक सम्बन्ध बनाने की चेष्टा करता हुआ महसूस होता था।

जैसे कोई पुरुष जबरदस्ती कर रहा हो, उसका स्पर्श इसे शरीर पे महसूस होता है।

लड़की का बिहेवियर 10-12 दिन में ही पागलों की तरह हो गया था।

इसका इलाज मन्दिरों में करवाया, डॉक्टर से मानसिक रोग का ट्रीटमैंट चलाया था।

किसी मन्दिर से 3-4 महीने के ट्रीटमैंट से ये ठीक हुई और लगभग 1 साल बाद इसकी मानसिक रोग की दवाई बंद हुई।

इसको उस घटना के बाद जैसे कोई सदमा लग गया हो।

इसकी पढ़ाई में कॉलेज का साल बर्बाद हो गया।


ये प्रेतबाधा या पिशाच योग के कारण हुआ।


कुछ ज्योतिषी कहते हैं कि पितृ दोष के कारण भी प्रेतबाधा होती है।

कुण्डली देखी थी जिसमें धनु लग्न में राहु था और बाकी ग्रह ठीक थे।

उस लड़की की बॉडी में भी प्रेत आता था।

उसका रिश्ता हुआ था लेकिन जब लड़के वालों को पता चला कि इसको प्रेत की समस्या है तो रिश्ता तोड़ दिया।

कारण प्रेत बाधा ही हुई।

दूसरी बात ये भी है कि लग्न में राहु था तो 180° पे केतु सप्तम भाव मे आना स्वभाविक है।

राहु का कारण बॉडी में भूत आया और केतु के कारण शादि टूट गई।

दोनों के प्रभाव एक साथ चले।


कुछ कहते हैं कि पितृ दोष के कारण प्रेत बाधा होती है।

इन कुण्डलियों को देखें तो एक कुण्डली में नवम भाव मे राहु है।

दूसरी कुण्डली में पँचम भाव मे केतु है।


जो ज्योतिष जानता हो वो "भावात भावम" का सूत्र 12 भावों पर लगाकर देख ले कि प्रेतबाधा पितृ दोष के कारण होती है या नहीं।


आप पाएंगे कि जिस मर्जी भाव मे राहु केतु लगा दें, वो जैसे जैसे घुमा फिरा के पितृ दोष बना ही देंगे और सभी पितृ दोष से ग्रसित पाए जाएंगे।


लेकिन सभी को प्रेतबाधा नहीं होती है।

Tuesday, April 2, 2019

विंग कमाण्डर अभिनन्दन

हैल्लो फ्रैंड्स।


कुछ दिन पहले मैंने लिखा था कि #विंग_कमाण्डर_अभिनन्दन की जन्म कुण्डली मेरे पास आ गई है।


मेरे एक मित्र ने #कर्णपिशाचिनी_ साधना की है, उसने मुझे ये डेट टाइम दिया था।


काफी ज्यादा हद तक मुझे ये कुण्डली अभिनन्दन की ही लगी क्योंकि उस मित्र ने एक शक्ति की हैल्प से ये बताया था।


नैट पर मैंने अभिनन्दन की के जन्म, शिक्षा वगैरह के बारे में डाटा देखा और इस कुण्डली पर मैच किया तो सब सही ही लगा।


अभिनन्दन तमिलनाडु में पैदा हुआ, 10वीं तक बैंगलौर में पढ़ा उसके बाद अपने पिता के साथ दिल्ली चला गया और दिल्ली में पढ़ाई।

इसी बीच जहाँ जहाँ अभिनन्दन के पिता की ट्रांसफर होती गई वहाँ वहाँ अभिनन्दन भी जाता रहा।

अभिनन्दन अपने जन्मस्थान और घर से दूर रहा।

माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई की तथा लव मैरिज की है, पत्नी भी साथ पढ़ी है और बच्चपन से एक दूसरे को जानते थे।

2 बच्चे भी हैं।


अभी पाकिस्तान से युद्ध में अभिनन्दन पूरे इण्डिया में फेमस हो गया।


ये सारी बातें इस कुण्डली से स्पष्ट हो जाती है।



जन्म - 21 जून 1983
समय - 13:15 बजे
स्थान - अरियालुर तमिलनाडू


पॉइंट्स -

[1] कन्या लग्न की कुण्डली है जिसमें चतुर्थ भाव में केतु ला होना तथा चतुर्थ भाव के स्वामी बृहस्पति का अपने स्थान से द्वादश में जाना अपनी जन्मभूमि से दूर होने का योग बना रहे हैं।

अभिनन्दन 10वीं के बाद अपनी जन्मभूमि अरियालुर को छोड़कर अपने पिता के साथ दिल्ली में चला गया गया तथा कभी जोधपुर में भी रहा।


[2] दशम और लग्न का स्वामी बुध नवम त्रिकोण भाव मे जाकर केंद्र त्रिकोण राजयोग का निर्माण कर रहा है।

पिता सरकारी नौकरी में थे, और खुद भी सरकारी जॉब मिली।


[3] लग्नेश बुध तथा सप्तमेश बृहस्पति का आपस मे दृष्टि सम्बंध है जिसके कारण पति एक दूसरे के करीब ही रहने वाले होते हैं।

दोनों एक दूसरे को बच्चपन से जानते हैं, साथ में पढ़ाई भी की है।

तथा दशमेश बुध के साथ सप्तमेश का दृष्टिसम्बन्ध होना तथा त्रिकोण में बुध का होना पत्नी को सरकारी जॉब या सरकारी लाभ दर्शा रहा है।

अभिनन्दन की पत्नी भी इण्डियन एयरफोर्स में पायलट रही है और स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर्ड हुई है।


[4] पँचम भाव का स्वामी शनि उच्च राशि में है और शनि मैडिकल, कैमिकल केी शिक्षा का कारक होता है, शुक्र भी मैडिकल की पढ़ाई का कारक होता है।

शुक्र की पँचम भाव पर दृष्टि, मंगल की पँचम भाव पर उच्च दृष्टि माइक्रोबायलॉजी की शिक्षा दर्शा रहा है क्योंकिं मंगल क्रिएटिव ग्रह है और संरचनाओं को समझने का गुण देता है, इंजीनियरिंग में भी मंगल का बहुत रोल रहता है क्योंकि इंजीनियरिंग में क्रिएशन बहुत चलती है और  संरचनाओं का ज्ञान बहुत ज्यादा चाहिए होता है, मंगल इस जरूरत को पूरा करता है।


[4] दशम भाव में उच्च राशि का राहु है।

सूर्य मंगल और राहु का होना आर्मी में जॉब दे रहा है क्योंकि मंगल सेना का कारण है और सूर्य तथा मंगल दशम भाव में दिग्बली होकर बड़ा पद प्रदान करते हैं।

अभिनन्दन विंग कमाण्डर की पोस्ट पर कार्यरत है।


[5] दशम भाव में राहु से ज्यादा बलशाली होता है, यदि दशम का राहु किसी क्रूर ग्रह जैसे शनि, मंगल, सूर्य के साथ हो तो बहुत तगड़ा राजयोग बनाता है।

ऐसा जातक समाज में एकदम से प्रसिद्ध हो जाता है क्योंकि राहु आकस्मिकता का सबसे बड़ा कारक है।

जो कल्पना में भी ना सोचा हो, इस बदलाव से दशम का राहु एकदम से प्रसिद्ध कर देता है।


अभिनन्दन भी इसी प्रकार से बड़े स्तर पर देश विदेश में प्रसिद्ध हो गया।

[6] दशम भाव में वायु तत्व को राशि है जिसमे सारे ग्रह अग्नि कारक हैं।

आग पर हवा मारो तो आग भड़कती है।

अभिनन्दन के साथ भी आसमान में ही अग्निकाण्ड हुआ, दशम तथा द्वादश भाव से आकाशीय घटनाएँ देखी जाती हैं।

जब वायु तत्व की राशि दशम भाव में है तो आसमान में ही अग्निकाण्ड हो जाना स्पष्ट हो जाता है।

इस अग्निकाण्ड में अभिनन्दन जिन्दा बच गया क्योंकि उसका लग्नेश भाग्य भाव में है, अर्थात उसकी किस्मत ही उसे बचा गई।

[7] चतुर्थ भाव मे केतु है, चतुर्थ भाव से वाहन देखा जाता है और छाती संबन्धित विचार किया जाता है।

चतुर्थ के केतु ने अभिनन्दन का वाहन अर्थात जहाज खत्म कर दिया और पसली तोड़ दी, चतुर्थ का केतु छाती पर चोट दे रहा है तथा हड्डी कारक सूर्य को राहु से ग्रहण लगने पर अस्थिभ्रंश योग बना है, अभिनन्दन की पसली की हड्डी टूटने भी स्पष्ट हो जाता है।


[8] मंगल की लग्न पर दृष्टि है जिससे स्वभाव ही एंग्री बन जाता है, शनि राहु दाढ़ी मूछों के कारक होते हैं।

अभिनन्दन को जब F16 दिखा था तो उसने कहा था -

ये मेरा शिकार है।


शेर की तरह फीलिंग्स थी।


सामने F-16 जिसकी तुलना मर्सिडीज से कर सकते हैं, उसके सामने अभिनन्दन का M-21 था जिसकी तुलना ट्रैक्टर से कर लो।


ट्रैक्टर से मर्सिडीज को टक्कर दे दी।

इस का सारा श्रेय उच्च के राहु को जाता है जो छोटी से चीज से बड़ा कमाल करने की ताकत रखता हैं


जिसका भी राहु मंगल के प्रभाव को लेकर खतरनाक होगा उसकी मूछें बहुत जबरदस्त होती हैं।

राहु छलावे के कारक है, जादूगरों की दाढ़ी मुछ देखेंगे तो बड़ी जबरदस्त होती हैं क्योंकि जादूगरों का राहु बहुत अच्छा होता है।

राहु कलाबाज ग्रह है, सर्कस वालों का राहु मंगल अच्छा होता है।


जल्लादों की मूछें आप देखेंगे तो बहुत बड़ी होती हैं।

राहु मंगल या केतु आदमी को जल्लाद की तरह मार काट करने वाला बनाते हैं।


अभिनन्दन की मूछें भी जल्लाद वाली हैं।


अगर कोई पाकिस्तानी उसके हाथ चढ़ जाए तो वो उसके काटने फाड़ने में देर नहीं लगाएगा क्योंकि वो फौजी है और कत्ल करना उसके लिए साधारण बात है।


अभिनन्दन का राहु मंगल सूर्य ही उसको ऐसा जोशीला बना गए कि पाकिस्तान में शेर की तरफ खड़ा हो गया और उसके शब्दों में जरा सी भी झिझक या डर नहीं था।


छठे भाव से शत्रु का विचार किया जाता है था द्वितीय भाव से स्टेटस का विचार किया जाता है।


शत्रु के पास जाकर ही अभिनन्दन का स्टेटस ऊँचा हो गया।

शत्रु ने उसको मारना चाहा लेकिन शत्रु ही उसका नाम प्रसिद्ध कर गया।


[10] अभी शनि की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा चली है जो समाप्त होने वाली है।

जाते जाते शनि ने अपना फल पूरा कर दिया।


अभी तो अभिनन्दन सेना में कार्यरत है।

लेकिन सेना से रिटायरमेंट के बाद अभिनन्दन राजनीति में जायेगा या यूँ कहा जाए कि राजनीति अभिनन्दन का स्वागत खुद करेगी।



[नोट - कृपया कर्णपिशाचिनी वाले उस साधक मित्र के बारे में जानकारी ना माँगें, और ना ही उससे अपने लिए कुछ पूछने को कहें।]