#राहु_द्वारा_निर्मित_राजयोग।
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राहु और केतु को बाधा कारक और नुक्सान दायक ग्रह कहा गया है और इनके प्रभाव से अधिकतर संकट आते ही देखे गए हैं।
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लेकिन कुछ परिस्थितियों में ये राजयोग का निर्माण कर देते हैं।
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शास्त्रों में ये कहा गया है -
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यदि केन्द्रे त्रिकोणे वा निवसेतां तमोग्रहौ।
नाथेनान्यतरस्यैव सम्बन्धाद्योगकारक:।।
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अर्थ - तमोग्रह राहु अथवा केतु केन्द्र या त्रिकोण के स्वामी का साथ केन्द्र या त्रिकोण में हो तो वह योगकारक बनता है।
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शास्त्रों में वैसे राहु और केतु दोनों के द्वारा निर्मित राजयोग के बारे में कहा गया है लेकिन मैंने राहु द्वारा निर्मित राजयोग में सफलता अधिक और केतु द्वारा निर्मित राजयोग में नुक्सान और अधिक देखे गए हैं।
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क्योंकि केतु बाधा कारक है और हर काम मे अड़ंगा पैदा होता है।
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राहु द्वारा सफलता इसलिए देखी गई क्योंकि ये गुप्त युक्तियाँ बहुत बनाता है अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए।
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राहु बहुत बड़ा ठग है, कोई इसको ठगना चाहे तो आसानी से नहीं ठग सकता है।
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जिसे #भगवान_विष्णु का #मोहिनी रूप नहीं ठग सका, उसे कोई क्या ठगेगा ?
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कोई राहु को ठगने आये, तो ये उल्टा उसे ठग दे।
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इसका सबसे बड़ा उदाहरण मिस्टर नटवर लाल है जिसने ताजमहल और लाल किला भी विदेशियों को बेच दिया था।
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जेल से फरार हो जाता था।
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जेल से फरार होने के पीछे उसकी युक्ति ये थी -
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किसी कमजोर सोच वाले पहरेदार सन्तरी को पकड़ा और उसे लालच दे दिया कि मेरे पास तो वैसे भी अरबों रुपये हैं।
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तुम्हें 1000 की नौकरी कर के फायदा भी क्या है ?
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अगर मुझे यहां से भागने में मदद करो तो 3-4 लाख तुम्हें दे दूँगा।
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तुम्हारी नौकरी भी नहीं जाएगी और पैसा भी खूब मिलेगा।
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छोटी और कमजोर सोच पैसे के बोझ तले बड़ी खूबी के साथ दफन हो जाती है।
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इसी तरह 2-4 पहरेदारों की मदद से वो युक्तियाँ बनाकर भाग जाता और पहरेदारों को बाद में कुछ भी नहीं देता था, पहरेदार की नौकरी जाए तो जाए।
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पकड़े जाने पर उसने ये ऑफर तक दे दिया कि भारत सरकार उसे परमिशन दे तो वो विदेशियों को ठग कर भारत का सारा कर्ज उतार सकता है।
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या तो ये उसका बहुत बड़ा विश्वास था या बहुत बड़ी ठगी थी जिसे वो भारत सरकार के साथ करना चाहता था।
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राहु की इसी चतुराई के कारण सफलता अधिक देखी है।
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बड़े से बड़ा ठग हो तो वो भी पकड़ा जाता है क्योंकि राहु का भेद सूर्य और चन्द्रमा ने खोल दिया था।
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आज भी सूर्य अर्थात राजा से ठग नहीं बच पाते।
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दशम भाव का राहु अगर किसी जातक को CID, इंटेलीजेंस ब्यूरो, RAW एजेंट जैसे बड़े बड़े सरकारी जासूसी कामों में लगा देता है और ये सरकारी जासूस विदेश में जाकर लोगों को ठग ठग के ही तो जानकारी निकालते हैं क्योंकि दशम भाव में राहु राजयोग देता है, राजदण्ड नहीं देता है।
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इसका उदाहरण #अजीत_डोवाल हैं जो पाकिस्तान में RAW एजेंट बनकर रहे और पकड़े भी नहीं गए।
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सब दशम भाव के राहु का कमाल है, अजीत डोवाल की कुण्डली में भी दशम का राहु है।
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[ अजित डोवाल - 20 जनवरी 1945 को 23:15 बजे पौड़ी गढ़वाल ]
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ये कुण्डली जिनकी है वो इस वक़्त ये दिल्ली में #TIMES_OF_INDIA न्यूजपेपर में डिप्युटी मैनेजर हैं।
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इनकी कुण्डली में भी राहु द्वारा निर्मित राजयोग है।
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जॉब की तलाश शुरू कर दी।
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#दैनिक_जागरण से फोन आया कि जॉब पक्की है, जॉइन करो।
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कुछ समय तक वहाँ जॉब की और #टाइम्स_ऑफ_इण्डिया से #असिस्टैंट_मैनेजर के लिए जॉब ऑफर आया।
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वहाँ पर कुछ समय जॉब करने के बाद मन वैरागी हो गया और जॉब छोड़कर सन्त सन्यासी अघोरियों की संगति भी पकड़ ली
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जब नोटबन्दी हुई 2016 में तो राहु ने लाभ दिया।
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सारा देश #नोटबन्दी से परेशान था और ये सज्जन जी उस वक़्त #नोट कमा रहे थे।
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दिसम्बर 2016 में इनको दोबारा टाइम्स ऑफ इण्डिया ने जॉब ऑफर किया लेकिन इस बार #असिस्टैंट नहीं #DEPUTY_MANAGER के लिए ऑफर दिया।
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राहु की ही करामत है जो ऑफिस में जाकर अपने काम का ऐसा डंका बजा की असिस्टेंट की जॉब छोड़ने के बाद सीधे ही डिप्टी का ऑफर हाथ में आया।
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इन्होंने इतने कम समय मे प्रॉपर्टी भी खरीदी और अपने लिए घर भी बनाया।
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मैंने इनसे पूछा कि आपने अपने खराब वक़्त में उपाय कौन सा किया ?
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तो इनका उत्तर ये था -
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#रावणकृत_शिवताण्डव_स्तोत्र का पाठ रोज करता था।
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जिस तकलीफ में रावण ने वो गाया था, वैसी ही हालत मेरी थी और मैं अपनी तकलीफ में पूजा के बाद इसे गाकर करता था।
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यही हर स्थिति में इनका सबसे बड़ा उपाय रहा है और इनसे जिसने भी उपाय पूछा तो इन्होंने यही सजेशन दी।
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https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2237096983174173&id=100006216785535
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इनकी कुण्डली में राहु द्वारा निर्मित राजयोग सीधा से देखने को मिल रहा है जिसकी अधिक व्याख्या देने की आवश्यकता ही नहीं है-
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जन्म - 31 मई 1988
समय - सुबह 04:00 बजे
स्थान - मैनपुरी
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[1] वृषभ लग्न की कुण्डली में दशम भाव में सप्तम केंद्र का स्वामी मंगल है।
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[2] केन्द्र का स्वामी केन्द्र में हो तो राजयोग बनता है, मंगल सप्तम का स्वामी होकर दशम भाव में दिग्बली है और राजयोग बना है।
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[3] राहु का दशम भाव में गर्म ग्रह मंगल के साथ होना राहु द्वारा राजयोग निर्मित कर रहा है।
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[4] केतु चतुर्थ भाव में है जिसने महादशा प्रारम्भ होते है माता को भी कष्ट में डाल दिया और स्वयं भी घर से बेघर हो गए।
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[5] दशम के राहु मंगल से बने अंगारक योग ने पिता से झगड़ा करा के सब कुछ एकदम शून्य कर दिया।
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[6] लेकिन राहु ने कामयाबी देना शुरू किया तो जितना खोया था, उससे 10 गुणा ज्यादा वापस दिया।
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[7] राहु गुप्त युक्तियाँ बनाने में अव्वल होता है और सबसे ज्यादा लाभ राहु ने नोटबन्दी के समय में दिया था।
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युक्तियाँ सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं।
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ये कुण्डली राहु द्वारा निर्मित राजयोग का बहुत स्पष्ट सटीक उदाहरण है।

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