#अपकीर्ति_योग
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समाज में या घर में #अपमानित होने की स्थिति उत्पन्न हो जाना और स्वयं के ऊपर #लाँछन लगना बहुत दुःखदायक होता है।
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कई बार ऐसा देखा गया है कि लोग #बिना_किसी_कसूर के ही #षड्यन्त्र के शिकार होकर अपकीर्ति के भागी हो जाते हैं।
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और कभी कभी #स्वयं_की_गलती से भी अपकीर्ति हो जाती है।
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ऐसी स्थिति तब आती है जब कुण्डली में #द्वितीय_भाव और #भावेश राहु, केतु के साथ #खराब_अवस्था में पड़ा हो।
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#द्वितीय_भाव_में_ग्रहण_योग हो तो बहुत अधिक बदनामी का सामना करना पड़ता है।
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ऐसा भी देखने में आया है कि जिनके द्वितीय भाव मे ग्रहण योग हो वो बहुत अधिक प्रयास करने के बाद भी जल्दी रिसपैक्ट हासिल नहीं कर पाते।
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धनु लग्न की दो कुण्डलियों में ऐसा देखा कि एक पुरुष की कुण्डली में द्वितीय भाव में सूर्य ग्रहण योग बना था और दूसरी कुण्डली स्त्री की थी जिसमें नवम भाव में चन्द्र ग्रहण योग बना था।
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स्त्री पर लाँछन लगा कि यह लोगों पर #टोने_टोटके करती है।
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कारण यह रहा कि धनु लग्न में अष्टम भाव का स्वामी चन्द्रमा गूढ़ विद्याओं का स्वामी था जो नवम भाव में केतु से पीड़ित होकर रहस्यात्मक खोज में वह स्त्री बदनाम हो गई क्योंकि वो #हस्तरेखा देखना सीख रही थी और आसपड़ोस में सब उसको जानते थे।
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एक दिन किसी का हाथ पढ़ने की कोशिश कर रही थी और अगले दिन उस व्यक्ति का एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था।
।
इसी बात को लेकर पड़ोसियों ने बतंगड़ बना दिया कि उस स्त्री ने कोई टोटका किया था जिसकी वजह से एक्सीडेंट हुआ।
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पुरूष पर लाँछन लगा कि इसकी #काली_जुबान है, #मनहूस है।
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उसका नाम ही एरिया में काली जुबान रख दिया था।
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भाग्य भाव का स्वामी सूर्य द्वितीय वाणी स्थान में राहु के साथ था, वाणी स्थान में ग्रहण योग था, राहु होने के कारण आकस्मिक वाक सत्य होने की संभावना होती है।
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किसी लड़के को उसने बोल दिया कि तू एग्जाम में फेल होगा।
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रिजल्ट आया तो लड़का सच मे फेल था।
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इसी घटना को लेकर उस लड़के के माँ बाप ने उस बेचारे को बदनाम करना शुरू कर दिया कि इसकी वजह से हमारा बेटा फेल हुआ।
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ऐसी बहुत सारी घटनाएँ होती हैं जो अपमानित करती हैं।
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केन्द्र या त्रिकोण का स्वामी त्रिक भावों में चला जाये तो भी अपयश की संभावना होती है।
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दो कुण्डलियों में ये देखा गया की सप्तम भाव का स्वामी अष्टम भाव में अष्टमेश के साथ था और जातक की पत्नी ने आत्महत्या की थी
।
अफवाह फैल गई कि इसी ने अपनी पत्नी को मारा है।
।
उससे पहले बच्चपन में उस जातक के दोस्तों के साथ लड़ाई होने पर उसके दोस्तों ने क्लास की एक लड़की के साथ कहा कि यह तुझे गन्दी गन्दी गालियाँ देता है।
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और लड़की ने टीचर से कम्प्लेंट करके उसे पिटवा दिया था।
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दूसरी कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया था।
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उसकी माता की मृत्यु के पश्चात उस पर इस बात का दाग लगा कि इसने अपनी माता की हत्या कर दी थी।
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भिन्न भिन्न स्थितियों में भिन्न भिन्न प्रकार के अपयश लगते हैं।
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यह कुण्डली जिस जातक की है उसे प्रिडिक्शन की गई थी कि तुझ पर चोरी का इल्जाम लगेगा और म्यूचुल फण्ड में घाटा होगा।
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।
जातक अपना बिजनस शुरू करना चाहता था, पैसे की शॉर्टेज थी, कुछ जुगाड़ कर रहा था।
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घर में पैसा चोरी हो गया और इल्जाम इस पर आ गया कि पैसा इसी ने चुराया है।
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म्युचुअल फंड में भी इसको घाटा ही हुआ था।
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दोनों ही बातें सटीक गई।
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कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।
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जन्म - 27 अगस्त 1987
समय - 2:02 AM
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[1] मिथुन लग्न की कुण्डली में द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा चतुर्थ भाव में केतु के साथ ग्रहण योग बना रहा है।
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[2] द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा का केतु के साथ योग धन हानि और धन की कमी दे रहा है।
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[3] द्वितीय भाव पर किसी ग्रह की कोई दृष्टि नहीं है इसलिए धन की बचत नहीं है।
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[4] द्वितीय भाव धन और इज्जत, प्रतिष्ठा का होता है जो खराब होने के कारण अपकीर्ति का कारण बना।
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[5] चतुर्थ भाव मे ग्रहण योग होने तथा विच्छेदात्मक ग्रह केतु होने के कारण इस जातक को घर से अलग भी कर दिया गया है।
।
[6] द्वितीय भाव परिवार का भी होता है, तथा इस भाव का स्वामी चन्द्रमा खराब होने से परिवार का वियोग भी सहना पड़ा है।
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समाज में या घर में #अपमानित होने की स्थिति उत्पन्न हो जाना और स्वयं के ऊपर #लाँछन लगना बहुत दुःखदायक होता है।
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कई बार ऐसा देखा गया है कि लोग #बिना_किसी_कसूर के ही #षड्यन्त्र के शिकार होकर अपकीर्ति के भागी हो जाते हैं।
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और कभी कभी #स्वयं_की_गलती से भी अपकीर्ति हो जाती है।
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ऐसी स्थिति तब आती है जब कुण्डली में #द्वितीय_भाव और #भावेश राहु, केतु के साथ #खराब_अवस्था में पड़ा हो।
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#द्वितीय_भाव_में_ग्रहण_योग हो तो बहुत अधिक बदनामी का सामना करना पड़ता है।
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ऐसा भी देखने में आया है कि जिनके द्वितीय भाव मे ग्रहण योग हो वो बहुत अधिक प्रयास करने के बाद भी जल्दी रिसपैक्ट हासिल नहीं कर पाते।
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धनु लग्न की दो कुण्डलियों में ऐसा देखा कि एक पुरुष की कुण्डली में द्वितीय भाव में सूर्य ग्रहण योग बना था और दूसरी कुण्डली स्त्री की थी जिसमें नवम भाव में चन्द्र ग्रहण योग बना था।
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स्त्री पर लाँछन लगा कि यह लोगों पर #टोने_टोटके करती है।
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कारण यह रहा कि धनु लग्न में अष्टम भाव का स्वामी चन्द्रमा गूढ़ विद्याओं का स्वामी था जो नवम भाव में केतु से पीड़ित होकर रहस्यात्मक खोज में वह स्त्री बदनाम हो गई क्योंकि वो #हस्तरेखा देखना सीख रही थी और आसपड़ोस में सब उसको जानते थे।
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एक दिन किसी का हाथ पढ़ने की कोशिश कर रही थी और अगले दिन उस व्यक्ति का एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था।
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इसी बात को लेकर पड़ोसियों ने बतंगड़ बना दिया कि उस स्त्री ने कोई टोटका किया था जिसकी वजह से एक्सीडेंट हुआ।
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पुरूष पर लाँछन लगा कि इसकी #काली_जुबान है, #मनहूस है।
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उसका नाम ही एरिया में काली जुबान रख दिया था।
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भाग्य भाव का स्वामी सूर्य द्वितीय वाणी स्थान में राहु के साथ था, वाणी स्थान में ग्रहण योग था, राहु होने के कारण आकस्मिक वाक सत्य होने की संभावना होती है।
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किसी लड़के को उसने बोल दिया कि तू एग्जाम में फेल होगा।
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रिजल्ट आया तो लड़का सच मे फेल था।
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इसी घटना को लेकर उस लड़के के माँ बाप ने उस बेचारे को बदनाम करना शुरू कर दिया कि इसकी वजह से हमारा बेटा फेल हुआ।
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ऐसी बहुत सारी घटनाएँ होती हैं जो अपमानित करती हैं।
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केन्द्र या त्रिकोण का स्वामी त्रिक भावों में चला जाये तो भी अपयश की संभावना होती है।
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दो कुण्डलियों में ये देखा गया की सप्तम भाव का स्वामी अष्टम भाव में अष्टमेश के साथ था और जातक की पत्नी ने आत्महत्या की थी
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अफवाह फैल गई कि इसी ने अपनी पत्नी को मारा है।
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उससे पहले बच्चपन में उस जातक के दोस्तों के साथ लड़ाई होने पर उसके दोस्तों ने क्लास की एक लड़की के साथ कहा कि यह तुझे गन्दी गन्दी गालियाँ देता है।
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और लड़की ने टीचर से कम्प्लेंट करके उसे पिटवा दिया था।
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दूसरी कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया था।
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उसकी माता की मृत्यु के पश्चात उस पर इस बात का दाग लगा कि इसने अपनी माता की हत्या कर दी थी।
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भिन्न भिन्न स्थितियों में भिन्न भिन्न प्रकार के अपयश लगते हैं।
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यह कुण्डली जिस जातक की है उसे प्रिडिक्शन की गई थी कि तुझ पर चोरी का इल्जाम लगेगा और म्यूचुल फण्ड में घाटा होगा।
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जातक अपना बिजनस शुरू करना चाहता था, पैसे की शॉर्टेज थी, कुछ जुगाड़ कर रहा था।
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घर में पैसा चोरी हो गया और इल्जाम इस पर आ गया कि पैसा इसी ने चुराया है।
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म्युचुअल फंड में भी इसको घाटा ही हुआ था।
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दोनों ही बातें सटीक गई।
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कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।
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जन्म - 27 अगस्त 1987
समय - 2:02 AM
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[1] मिथुन लग्न की कुण्डली में द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा चतुर्थ भाव में केतु के साथ ग्रहण योग बना रहा है।
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[2] द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा का केतु के साथ योग धन हानि और धन की कमी दे रहा है।
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[3] द्वितीय भाव पर किसी ग्रह की कोई दृष्टि नहीं है इसलिए धन की बचत नहीं है।
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[4] द्वितीय भाव धन और इज्जत, प्रतिष्ठा का होता है जो खराब होने के कारण अपकीर्ति का कारण बना।
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[5] चतुर्थ भाव मे ग्रहण योग होने तथा विच्छेदात्मक ग्रह केतु होने के कारण इस जातक को घर से अलग भी कर दिया गया है।
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[6] द्वितीय भाव परिवार का भी होता है, तथा इस भाव का स्वामी चन्द्रमा खराब होने से परिवार का वियोग भी सहना पड़ा है।

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