Monday, September 30, 2019

अखण्ड सौभाग्यवती योग


#अखण्ड_सौभाग्यवती_योग।

इस योग वाली स्त्री #सुहागन मरती है।

यह योग सिर्फ #स्त्रियों की कुण्डली में देखा जाता है।

जिस स्त्री की कुण्डली में यह योग बनता है उसका #सुहाग_अमर होता है।

अर्थात उसके पति की आयु उससे अधिक होती है और स्त्री अपने पति से पहले मरती है।


#परिभाषा-

जिस स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में हो
या भाग्य भाव में हो अथवा भाग्य भाव का स्वामी सप्तम भाव में
मित्र राशि अथवा उच्च राशि में हो या सप्तम और नवम भाव के स्वामियों के स्थान परिवर्तन हो और एक दूसरे के मित्र हों तथा किसी अशुभ ग्रह की दृष्टि ना हो तथा सप्तमेश भी अच्छे स्थान पर हो तथा अशुभ ग्रह से दृष्ट ना हो और अष्टम भाव खाली हो तो अखण्ड सौभाग्यवती योग बनता है।


एक स्त्री की कुंडली में यह योग है।

इसके कुछ पॉइंट्स -

जन्म - 2 जनवरी 1988
समय - सुबह 4:20 बजे
स्थान - दुर्ग


[1] वृश्चिक लग्न में सप्तम भाव में नवम भाग्य भाव का स्वामी चन्द्रमा उच्च राशि में है।

[2] सप्तम भाव का स्वामी शुक्र तृतीय भाव में मित्र शनि की मकर राशि में बैठा है जो सप्तम भाव के लिए अच्छा फल है।

[3] सप्तम भाव का स्वामी अपने स्थान से नवम भाव में गया है जो जो कि सप्तम भाव के लिए भाग्य का भाव है।

[4] सप्तम भाव में चन्द्रमा तथा तृतीय भाव में शुक्र किसी भी अशुभ ग्रह के प्रभाव में नहीं है।

[5] लग्नेश मंगल की सप्तम भाव पर दृष्टि है, मंगल छठे भाव का स्वामी भी है, कुछ परेशानी तो होगी लेकिन लग्नेश की दृष्टि वृद्धि करती है और नुक्सान कम करती है।

[6] अष्टम भाव खाली है।

[7] कुछ लोग राहु केतु की नवम और पँचम दृष्टि को मानते हैं औए कुछ नहीं मानते हैं।

जो मानते हैं वो कहेंगे कि सप्तम भाव के चन्द्रमा तथा सप्तम भाव और तृतीय भाव में बैठे शुक्र पर केतु की दृष्टि है।

लेकिन फिर भी पति की मृत्यु पहले नहीं होगी।

[ जरा सोचें कि अगर किसी के पँचम भाव और पंचमेश पर राहु या केतु की दृष्टि हो तो क्या सन्तान मर जाती है ? ]

राहु केतु की दृष्टि अगर देखी जाए तो कुण्डली के 6 भाव इनके इफेक्ट में आ जाएंगे और आधे ग्रह इनके प्रभाव में होंगे।

उस बेचारे का तो खानदान खत्म हो जाएगा।

अक्सर देखा जाता है कि जब कुछ समझ नहीं आता है तो एस्ट्रोलॉजर सारा दोष राहु केतु की दृष्टि के सिर पर फैंक देते हैं।


हर बार राहु केतु की से दृष्टि ऐसा नहीं होता है।

दृष्टि का प्रभाव देखने के लिए नक्षत्रों की हैल्प ली जाती है ना कि भावों की सहायता से किसी को भी मार दिया जाये।

जब तक किसी भाव में राहु केतु ना हो या किसी भाव के स्वामी के साथ ना हो तब तक उस ग्रह और भाव को इनकी दृष्टि मात्र से खराब नहीं कर देना चाहिए।


अतः इस कुण्डली में अखण्ड सौभाग्यवती योग बनता है।

Sunday, September 22, 2019

कुसुम योग

#कुसुम_योग


परिभाषा -

लग्नात्सप्तमगे चन्द्रे चन्द्रादष्टमगे रवौ।
गुरूणा स्थीयते लग्ने कुसुमो योग ईरित:।

अर्थ -

लग्न से सप्तम भाव में चंद्रमा हो, चंद्रमा से अष्टम
अर्थात द्वितीय भाव में सूर्य हो,
और लग्न में बृहस्पति हो तो कुसुम योग बनता है।

फल -

दाता महीमण्डलनाथबन्द्यो भोगी महावंशजराजमुख्य: ।
लोके महाकीर्तियुक्त: प्रतापी नाथो नाराणां कुसुमोद्भव: स्यात।

अर्थ -

कुण्डली में निर्मित कुसुम योग जातक को दान पुण्य करने वाला बनाता है।
जातक का जन्म उच्च कुल में होता है।
जातक को उच्च पद की प्राप्ति होती है।
यश, कीर्ति और सम्मान की प्राप्ति होती है।

नोट - किसी भी योग का फल किताब में लिखे फलादेश से ऐज इट इज़ मैच नहीं होता है, कुछ अंतर मिलता है।

देश काल पात्रता एक अनुसार सभी अच्छे योग वाले उच्च कुल में पैदा नहीं होते।

सभी दानियों की कुण्डली में कुसुम योग नहीं होता।

कहने का मतलब ये है कि सी योग वाले का कार्य बुद्धि, वाणी, धन, शिक्षा आदि से  सम्बन्ध रखता है।

इसलिए कह सकते हैं कि -

ऐसे योग वाला जातक विद्वान बनता है,
या शिक्षा विभाग से जुड़ा रहता है,
अथवा किसी भी संस्था में
एक अच्छा सलाहकार बनता है।
और जहां भी जाता है,
वहाँ बुद्धि, वाणी के बल पर इज्जत कमाता है।


क्योंकि

[1] लग्न में बृहस्पति ज्ञान का आकर्षण देता है, बृहस्पति की पँचम दृष्टि बुद्धि भाव पर पड़ेगी और नवम दृष्टि भाग्य भाव पर पड़ेगी।

[2] लग्न का बृहस्पति दिग्बली होकर अच्छा फल प्रदान करेगा और  पँचम तथा नवम भाव का कारक होने से वहां पर बृहस्पति की दृष्टि अच्छा फल देगी जिसके कारण और धर्म कर्म की वृद्धि होगी।

[3] बृहस्पति से सातवां चन्द्रमा #गजकेसरी_योग बना देगा जो शुभफल देने वाला योग है।

[4] द्वितीय भाव में सूर्य होना वाणी स्थान से प्रभावित करने वाली वाणी देगा, बड़े स्तर की बात कहने की आदत होगी।

[5] सूर्य से द्वादश भाव मे बृहस्पति का होना #शुभवेशी_योग बना देगा, जिसके कारण जातक को शुभफल मिलेगा।

[6] चन्द्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि हो तो मन ने ज्ञान की इच्छा और विचारों में स्टेब्लिटी आती जिससे  मानसिक कार्यक्षमता बढ़ती है।


प्रस्तुत कुण्डली एक प्राइवेट स्कूल चेयरमैन की है।

जन्म - 13 सितम्बर 1978
समय - सुबह 3 बजकर 17 मिनट
स्थान - भिलाई

उपरोक्त लगभग सभी पॉइंट्स इस कुण्डली से मैच हैं।

[1] लग्न में उच्च बृहस्पति दिगबली है, मतलब बृहस्पति ज्ञान का कारण होने से ज्ञानी बना रहा है।

[2] बृहस्पति की पँचम दृष्टि शिक्षा भाव पर है, जिससे अच्छी शिक्षा हुई।

[3] पँचम भाव का स्वामी मंगल चतुर्थ केन्द्र में अपने स्थान से द्वादश अर्थात व्यय भाव में गया है।

जब भी पँचम भाव का स्वामी चतुर्थ में जाये तो शिक्षा में बढ़ोतरी होती है क्योंकि अपने से द्वादश भाव खर्च का भाव होता है और ज्ञान ऐसी चीज है जो खर्च करने से बढ़ती है।

इस शिक्षा का लाभ हुआ है।

[4] चतुर्थ भाव में मंगल के साथ शुक्र है, शुक्र केंद्र का स्वामी होकर अपने दिग्बल स्थान में बैठ कर #मालव्य_योग बना रहा है, इस कारण भी शुभफलों में बढ़ोतरी हुई।

[5] बृहस्पति की चन्द्रमा से गजकेसरी योग बन गया।

[6] सूर्य से द्वादश में बृहस्पति होने से शुभवेशी योग बन गया।

उपरोक्त सारे गुण इस कुण्डली में हैं इसलिए ये शिक्षा विभाग के चेयरमैन हैं और स्कूल संचालन अच्छी तरह से कर सकते हैं।

काफी अच्छे शुभयोग इस कुण्डली में कह सकते हैं।

Sunday, September 15, 2019

मारण तन्त्र

#मारण_तन्त्र


यदि सामने शेर है और आपके प्राण संकट में है तो शेर को मारना भी सही है।

लेकिन क्या किसी व्यक्ति पर तन्त्र क्रिया कर के मारना सही है?


#चाणक्य बहुत खतरनाक #तान्त्रिक भी था और एक उत्कृष्ट #ज्योतिषी भी था।

 उसने #तन्त्रसिद्धि से  #तीर पर लगाने के लिए ऐसा पॉइजन बनाया था कि जिसे भी वो तीर लगेगा वो पागल हो जाएगा और लोगों को काटना शुरू करेगा।

अगर इस पागल व्यक्ति को कोई भी काटने को ना मिले तो वो स्वयं को काटना शुरू कर देता और मर जाता।

जिन लोगों को वो पागल काटेगा वो भी उसी की तरह दूसरों को काटना शुरू कर देते और यदि कोई काटने का ना मिले तो स्वयं को काटकर मर जाते।

कारण - तीर में लगा हुआ #सिद्ध_रसायन जिसके असर से उन सबका ऐसा व्यवहार हो जाता।


सरल भाषा मे कहें तो शत्रु की पूरी सेना को मारने के लिए 1 तीर ही काफी था।

उसके बाद #चेन_रिएक्शन शुरू हो जाता।

1 तीर मारो और खुद भाग जाओ।

सब आपस एक दूसरे को काटना शुरू कर देते और जब कोई ना बचता तो खुद को काटते और मर जाते।

#युद्ध_में_मारना_धर्म_है।

फौजी को भी मारना बाद में सिखाते हैं, पहले खुद की जान बचाना सिखाया जाता है।

डिफेंस में मारना पाप नहीं है।


लेकिन लोग युद्ध में कम और कहा सुनी में ही मारने पर उतर जाते हैं।

आगे हाथ पैर से ना मार सके तो छोटे मोटे #टोने_टोटके कर के दूसरों को परेशान किया जाता है।

ये बहुत ही ज्यादा गलत काम है।

मार ना पाए तो उस पर टोटके कर के दूसरी क्रियाएं करते हैं या किसी तान्त्रिक से करवाते हैं।


#सतम्भन - गति रोक देना।

किसी का कारोबार ही ठप कर देते हैं।

उसकी जमीन या घर के आसपास कोई तन्त्र संबन्धी वस्तु या ताबीज गाड़ दिया जाता है, दुकान  के बाहर गाड़ दो, या कोई अभिमन्त्रित वस्तु पर कार्यस्थल के आसपास फैंक फि जाती है।

सामने वाले का धन्धा चौपट तो कंगाली शुरु।


अपने कार्यस्थल के भीतर बाहर सफाई रखें, पूजा पाठ करें।


#विद्वेषण - लड़ाई डाल देना।

भाई भाई लड़े, पति पत्नी लड़े, बेटा बाप लड़े।

परिवार तितर बितर होना शुरू।


#उच्चाटन - मन भटकाना।

किसी का भी दिमाग अनबैलेंस कर देना और उसकी बुद्धिभ्रष्ट हो जाती है, वो आदमी भटकता रहता है, दिमाग से कमजोर हो जाता है, नशेड़ी बन जाता है, अब बर्बाद होने लगता है, पागल भी हो जाते हैं।

कुछ तन्त्र प्रयोग तो ऐसे भी होते हैं कि पूरा परिवार उजड़ जाता है।


#मारण - मारने के उद्देश्य से #भूत_प्रेत भी लगा दिए जाते हैं, वक़्त पे इलाज ना कराओ तो वो आदमी मरणासन हो जाता है।

पुतली बना के जहाँ सुई या कांटा चुभा दो, वहीं आदमी को दर्द शुरू हो जाते हैं।

किसी की पुतली बना के हाथपैर पर सुई, कील या कांटा चुभा देते हैं तो उस व्यक्ति के हाथ पैर में भारी चोट आती है या दर्द समाप्त नहीं होता।

हार्ट पर कील या सुई चुभा दो, आदमी को हार्ट अटैक भी हो सकता है या हार्ट में दर्द बढ़ेगी।

इसी प्रकार शमशानी कोयला होता है कि सामने वाला का चित्र बना के जहां जलता कोयला लगाओ वहीं पर बेहिसाब जलन शुरू हो जाती है।

तन्त्र प्रयोग तगड़ा हुआ तो मौत भी हो सकती है।


ऐसा ही चौकी चढाने वाला तन्त्र है जिसके मन्त्र में ये लाइन आती है -

हिये फाड़ चोटी चढ़े, काया माही जीव रहे।
साँस ना आवे पड़यो रहै।

मतलब ये कि दर्द के मारे कलेजा फटने को हो जाये और आत्मा शरीर में ही रहनी चाहिए, साँस भी आनी चाहिए और ज्यों का त्यों पड़ा रहे।


आप खुद सोच सकते हैं कि कितनी अधिक दुःख वाली स्थिति हो जाएगी उसकी।


किसी को इतना दुख देना कितना बड़ा पाप है?


कुछ तान्त्रिकों के पास किसी भूत प्रेत मसाण की सिद्धि होती है जिसकी हैल्प से भी शॉर्टकट में मार सकते हैं या बहुत ज्यादा बीमार कर सकते हैं।


जब तान्त्रिक किसी के कहने पर पैसे लेकर किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा तन्त्र यूज करता है तो दूसरा व्यक्ति अपने ट्रीटमैंट के लिए किसी अन्य तान्त्रिक के पास भी चला जाता है।

यदि आपका करवाया हुआ तन्त्र प्रयोग वहाँ रिटर्न कर दिया तो समझो आपकी वाट पक्की लगेगी।

क्योंकि करने वाला तान्त्रिक अपने बचाव का उपाय पहले ही कर चुका होता है।

रिटर्न तन्त्र सीधा आप पर असर दिखायेगा।


एक तान्त्रिक ने अपने भूत से कहा कि दूसरे तान्त्रिक को मार दो मैं तुम्हें मुर्गा दूँगा।

दूसरे तान्त्रिक के पास जब भूत मारने के लिए आया तो उस तान्त्रिक ने अपने भूत की हैल्प से पूछा कि तू मारने क्यों आया है, और तुझे बदले में क्या मिलेगा ?

भूत ने कहा मेरे मालिक ने मुझे कहा है कि अगर तेरे को मारूँगा तो वो मुझे 1 मुर्गा देगा

तान्त्रिक ने अपनी खोपड़ी चलाई और बोला -

तू उस तान्त्रिक को मार के आ जा जिसने तुझे मेरा मारण करने के लिए भेजा है, मैं बदले में तेरे को 3 बकरे दे दूंगा।

भूत को 3 बकरों का लालच पड़ा और अपने मालिक को खत्म कर दिया।

इसलिए कभी ऐसा काम मत करो।


#मूठबाण -

ये बहुत खतरनाक मारण क्रिया है।

इसमें किसी भूत प्रेत मसाण भैरो या कलवे की सहायता से मारने का इंतजाम किया जाता है।

इन प्रेतों को माँस मदिरा आदि चढ़ाकर बाण तैयार किया जाता है।

कुछ उसे झाड़ू के तिनको से बनाई टोकरी में सामग्री रख के तैयार करते हैं तो कुछ मिट्टी की हांडी में तैयार करते हैं और जमीन में दबाते हैं।

उसके बाद सरसों या उड़द के दाने चौराहे पर जमीन पर पटक कर मारे जाते हैं।

उसके बाद कोई शक्ति उस टारगेट किये हुए व्यक्ति को मारने चली जाती है।


ऐसा बोलते हैं कि जब मूठबाण किसी पर आता है तो हांडी उड़ती हुई आती है या झाड़ू के तिनके वाली टोकरी उड़ती हुई आती है।

लेकिन उसको देख पाना उसी के लिए सम्भव है जिसके पास कोई सिद्धि हो, वो ही उसको पहचान पाता है।


जिस व्यक्ति के ऊपर बाण छोड़ा गया है उसे दिन के समय आतिशबाजी जैसा साउंड या किसी बड़े पक्षी के पंखों के फड़फड़ाने जैसा साउंड सुनाई देगा और अचानक ही तबियत बिगड़ जाएगी, हो सकता है मर भी जाये।


रात के समय जब मूठबाण आता है तो नाम लेकर आवाज लगाता है।


या घुं घुं की तरह आवाज होती रहती है जैसे मधुमक्खी उड़ती है।


यदि रात के समय किसी ने आवाज लगाई तो मत सुनो।

मूठबाण सिर्फ 3 बार आवाज लगाता है, उस समय कमरे से बाहर मत निकलो, क्योंकि ये सिर्फ खुले माहौल में अटैक करता है।

अगर आप अंदर हैं तो इसका प्रभाव बहुत कम होगा।

लेकिन अगर आपने अंदर ही उसकी पुकार का जवाब हाँ में दे दिया तो समझो गए काम से।


अच्छे तान्त्रिक इसे वापस लौटा देते हैं।

जब ये लौटता है तो भेजने वाले पर दुगने वेग से अटैक करता है।


किसी एक आदमी पर से बाण 2 बार रिटर्न आ जाता है तो तीसरी बार बाण भेजने की गलती कोई भी तान्त्रिक नहीं करता है।

तीसरी बार लौटने पर तान्त्रिक की मौत निश्चित है।


मेरे दोस्त पर ऐसा हुआ था।

उस पर बिजनस में ही जेलिसी में किसी पास वाले ने मूठबाण चलवाया था।

एक दिन उसके पड़ोस वाले बिजनसमैन से कुछ कहासुनी हुई थी।



रात के टाइम उसे अपने कार्यस्थल पर ऐसा लगा कि घुं घुं की आवाज हुई और किसी ने छाती पर बहुत जबरदस्त मुक्का मारा और वो थोड़ी देर के लिए अनबैलैंस हो गया।

उसने किसी देवता का कवच पहना था जिसके कारण उस पर असर नहीं पड़ पाया।


सुबह खबर आई कि पड़ोस वाला बिजनसमैन रात को हार्ट में दर्द होने के कारण हॉस्पिटल में एडमिट हो गया है।


मारण के ऐसे ही एक से बढ़कर एक तरीके हैं।

इधर ज्यादा लिखूंगा तो कम से कम 35-40 टाइप तो मारने के तरीके लिख दूँगा।


ऐसे भी मारण कर्म हैं कि जिनका असर पीढ़ियों तक खत्म नहीं होता।

जो भी पैदा होगा वो किसी असाध्य रोग से ग्रसित पैदा होगा।



पर हमने इसका करना क्या है?


ऐसे पापकर्म कमा के क्या करेंगे।


जहाँ किसी को मारने के लिए 51000 या 100000 मन्त्र जप करना है।

उससे अच्छा है कि वो वक़्त अपने इष्टदेवी या या देवता की पूजा में लगाएं।

कुछ अच्छा फल मिलेगा, बुद्धि सकारात्म होगी।

आत्मा दुर्गति में जाने से बचेगी।


आप देख लेना अपने आसपास कि जो भी या तान्त्रिक ऐसी क्रियाएं करता है, उसका जीवन अधिक समय तक सुखी नहीं रहता।

या तो वो अंत समय में पागल हो जाते हैं या कोढ़ फटने के कारण मृत्यु होती है या अंग सड़ने लगते हैं, कैन्सर जैसी बीमारियाँ लगती हैं।

यहां तक कि अंदर बने ट्यूमर्स में या बाहर ही सड़न पैदा होती है जिसमें कीड़े पड़ जाते हैं


दूसरों को नीचा दिखाने के लिए समय बर्बाद करने से अच्छा है उस समय को अपनी उन्नति में लगा दो।


गायत्री मन्त्र श्रेष्ठ है, महामृत्युंजय मन्त्र श्रेष्ठ है।

Thursday, September 12, 2019

ज्योतिष में सांप का खौफ

#ज्योतिष में #खौफ़ का दूसरा नाम #सांप है।

कालसर्प योग, नाग दोष, सर्पदंश योग, वक्राकार कालसर्प योग, गर्वकार कालसर्प योग, निश्चलाकार कालसर्प योग, आंशिक कालसर्प योग, अनन्त कालसर्प योग, कुलिक कालसर्प योग, वासुकी कालसर्प योग, शँखपाल कालसर्प योग, पद्म कालसर्प योग, महापद्म कालसर्प योग, तक्षक कालसर्प योग, कर्कोटक कालसर्प योग, शँखनाद कालसर्प योग, घातक कालसर्प योग, विषाक्त कालसर्प योग, शेषनाग कालसर्प योग, दृश्य गोलार्द्ध कालसर्प योग, अदृश्य गोलार्द्ध कालसर्प योग, विपरीत कालसर्प योग, सर्प श्राप योग।

इसके अलावा 12 लग्नों में 144 प्रकार कालसर्प योग का फल मिलता है।


जो कुण्डली में इन सभी प्रकार के योगों के होते हुए बच जाता है, उसकी कुण्डली में #निष्प्रभावी_कालसर्प_योग होता है।

समय के साथ साथ कालसर्प योग के प्रकारों में भी डेवलोपमेन्ट होती जा रही है।

60-70 सालों में #काल_एनाकॉन्डा_योग भी आ जायेगा और 100 साल बाद #काल_चुमाना_योग भी आएगा।

क्योंकि #चुमाना प्रजाति का अजगर पृथ्वी का #सबसे_बड़ा_अजगर है।


[ हद होती है यार बकैती की भी ]


लेकिन इस योग का फीमेल वर्जन #विषकन्या_योग बिल्कुल सटीक है, उसका प्रभाव देखने को मिलता है।



उसके बाद #इच्छाधारी नाग-नागिन भी आते हैं।

जो सांप 700 से 1000 साल जी जाते हैं वो इच्छाधारी नाग नागिन बन जाते हैं।

या 422 बार केंचुली उतारने के बाद इच्छाधारी नाग नागिन बन जाते है।

देखा किसी ने भी नहीं है, सिर्फ सुना है।


#नागमणि भी होती है, जिसको बहुत से लोगों ने देखा भी होगा, ये बात सही है।


लेकिन कुछ बातें बहुत बेतुकी होती हैं जैसे एक कहानी है -


एक बच्चा मिट्टी अब खेल रहा था तो वहाँ बिल से कोबरा प्रजाति का सांप निकल आया।

बच्चे ने सांप के सिर पर मिट्टी डाल दी और सांप बार बार सिर झुका रहा था।

बच्चे के माता पिता को डर लगा और रोने लगे कि इतना बड़ा कोबरा है, काट लेगा तो बचा मरेगा।

पड़ोसी ने कहा मेरे पास बन्दूक है, बच्चा तो वैसे भी खतरे में है, गोली सांप को मारूँगा, सांप मर गया तो ठीक है अन्यथा गोली बच्चे को भी लग सकती है।

बाप ने कहा सांप पर गोली चला दो।

सांप को गोली लगी और सांप अधमरा हो गया।

सांप को झाड़ियों में फेंक दिया गया।

रात को सांप की आंखों में गोली चलाने वाले का चेहरा आ गया और वो सांप उसे काट आया।

वो बन्दा मर गया।

सुबह लोग इक्कठे हुए तो कहा कि सांप ने काटा है, सपेरा बुलाओ।

सपेरा आया, उसने बीन बजा के सांप को बुलाया।

सपेरे ने सांप को कहा कि जहर चूसो इसका।

सांप नहीं चूस रहा था।


सपेरे ने सांप की आत्मा को बच्चे के शरीर मे प्रवेश करवा दिया और पूछा कि तुम जहर क्यों नहीं चूस रहे हो?

तब बच्चे के अंदर प्रवेश की हुई उस सांप की आत्मा ने कहा कि ये बच्चा आज से 7 जन्म पहले एक सेठ था और मैं गरीब था।

मैंने इससे 500 रुपये उधार लिए थे जो मैं नहीं चुका पाया।

जब मुझे ये बच्चा दिखा तो मैंने इसके अंदर उस सेठ की आत्मा को देख लिया और सेठ ने भी मुझे पहचान लिया था।

बच्चा मुझ पर मिट्टी फैंक कर धिक्कार रहा था और मैं शर्मिंदा हिकर सिर झुका के माफी मांग रहा था।

लेकिन इस आदमी ने गोली चला दी, जबकि इससे मेरी कोई दुश्मनी नहीं थी और ना ही बच्चे को मुझसे कोई खतरा था।

इसलिए मैंने इसे काट लिया।

अब अगर इसका जहर चूसवाना हो तो इस बच्चे के माता पिता को 500 रुपये दो और मुझे कर्ज से मुक्त करो।

मैं इस आदमी का जहर चूस के इसे जीवित कर दूँगा और तुम बाद में इस से 500 रुपये ले लेना।

सपेरे ने बच्चे के माता पिता को 500 रुपये दिए और उस सांप ने जहर चूस के उस आदमी को जिन्दा कर दिया।


[ ठीक है कर्म का फल और लेनदेन पूरा हुआ जिसका वर्णन तो भागवत गीता में भी है कि कर्मफल से कोई नहीं भाग सकता है, चाहे कर्मफल अच्छा हो या बुरा हो।

लेकिन सांप के द्वारा जहर चूसने वाली बात सर्फ ढकोसला लगती है।

क्योंकि जब कोबरा काटता है तो आधे घण्टे में सारा नर्वस सिस्टम डैमेज हो जाता है, सारा खून क्लॉट्स में बदल जाता है।

वो आदमी तो सारी रात पड़ा रहा, उसका तो चाहे जहर चूस या कुछ भी चूसो, वो ठीक नहीं हो सकता।

ऐसा होता तो हॉस्पिटल में डॉक्टर को ना बैठाकर सपेरे को बैठा लेते। ]


किसी भी जीव का मारना पाप ही है।

सांप और मच्छर में आत्मा एक जैसी है, लेकिन शरीर का फर्क है।

पाप उतना ही लगेगा।

लेकिन मच्छर को हम गम्भीरता से नहीं लेते और सांप को तो पूछिये ही मत।

समुद्र मंथन में सांप, विष्णु की शैया सांप की, शिवजी का गले में  सांप, कुंडली में सांप, कुण्डलिनी में सांप, बॉलीवुड में सांप, हॉलीवुड में सांप।

सांप के काटने से मर जाते हैं, इसलिए सांप का भय हमारे अवचेतन मन मे पड़ा रहता है, जो एक जायज बात है।


सपने में सांप नजर आना, किसी के पीछे सांप लग जाना, बार बार सांप के द्वारा काटे जाना आदि बहुत से लक्षण हैं जो किसी ना किसी पाप को दर्शाते हैं।

अकारण सांप को नहीं मारना चाहिए।


जब लगे कि अपनी जान को सांप से खतरा है तो मरना ही पड़ता है।


सांप सम्बन्धी हमने क्या पाप किया इस जन्म या उस जन्म में, ये हम नहीं जानते।

लेकिन यदि किसी को लगे तो वो नागपूजन, नागबलि कर्म, कालियानाग मर्दन स्तोत्र, नाग सहस्रनाम, नीलकण्ठ स्तोत्र, नागमाता मनसादेवी स्तोत्र, नाग सहस्रनाम पाठ आदि का जाप करें या अनुष्ठान करवा लें।


लेकिन इतना ज्यादा खौफ़ खाने की जरूरत नहीं है कि आप सांप के नाम से ही अधमरे हो जाएं।

Monday, September 2, 2019

वशीकरण

#वशीकरण


दूसरों को अपने वश में उनसे मनचाहा काम करवाने के लिए आपको किताबों में बहुत से टोने-टोटके, मन्त्र, तन्त्र, यन्त्र आदि मिल जाएँगे।

वशीकरण का प्रलोभन आपको बहुत ही जल्द आकर्षित कर सकता है।


विशेषतौर को ये प्रलोभन रहता है कि इच्छित लड़की/लड़के अथवा स्त्री/पुरूष को वश में कर के उसके साथ मजे कर सकें।


ऐसे भी वशीकरण वाले आते हैं कि पड़ोसी हम पर कोर्टकेस डाल बैठा है, उस पर कोई वशीकरण कर दो ताकि वो हमारी बात मानकर केस वापस ले ले।

या जज पे वशीकरण कर दें कि जज ही हमारे हक का फैसला दे दे।

ऐसे भी देखे हैं कि मेरी साली बहुत सुन्दर है, उसके साथ मेरी सैटिंग हो जाये।

स्त्रियाँ भी ऐसी देखी हैं जो अपने पुराने बॉयफ्रैंड, जो उनको भाव नहीं देता, उस पर वशीकरण के लिए कहती हैं ताकि वहाँ भी सैटिंग चली रहे।

आदमी भी ऐसे देखे हैं कि किसी भी पुरानी गर्लफ्रैंड जो उनको भाव नहीं देती है उस पर वशीकरण करवाने के लिए पूछते हैं।

वशीकरण का तो इतना क्रेज है कि 8वीं क्लास के बच्चे पूछते हैं कि ऐसा कोई मन्त्र है क्या, जिससे पेपर में ड्यूटी देने वाला भी वश में हो सके और पूरा पेपर बैठ के करवा दे।

ऐसे भी देखे हैं जो कहते हैं कि कोई ताबीज बताओ कि इंटरव्यू लेने वाला वश में होकर पूरे नम्बर लगा दे।

ऐसे भी मिलेंगे कि हम मन्त्री जी से मिलने जा रहे हैं, कोई वशीकरण तिलक बताओ कि जिसे लगाने पर हमारा चेहरा देखते ही मन्त्री हमारे वश में हो जाये और हमारा का तुरन्त कर दे।


ये वशीकरण वाले जितने भी लोग आपको मिलेंगे, वो 1 नम्बर के मूर्ख होंगे जो ऐसे कामों के पीछे भाग रहे होंगे।

वो हारे हुए इन्सान होंगे, जिनको सच्चाई और मेहनत से मतलब ना होकर अपनी अनावश्यक इच्छाओं की पूर्ति करने का भूत सवार रहता है।


किसी को आपसे प्यार नहीं है, तो वशीकरण कर के क्या करना?

अगर वशीकरण हो भी गया तो बिल्कुल ऐसा होगा जैसे आपने किसी कुत्ते को चेन से बांध के रखा है, जिसका कोई भी लाभ नहीं है।

किसी के दिमाग पर कुछ समय के लिए कंट्रोल कर सकते हैं लेकिन किसी की भावनाओं पर आपसे कंट्रोल नहीं हो पायेगा।


जैसे ही सामने वाले पर से आपके वशीकरण का प्रभाव खत्म होगा तो वो नॉर्मल हो जाएगा और आपकी वाट लगना फिक्स है।


ऐसा एक केस मैंने देखा है।


30-32 साल का बन्दा था जिसका शुक्र पीड़ित था, देखने मे भी ज्यादा सुन्दर हैण्डसम नहीं था।


एक लड़की को उसने प्रपोज किया लेकिन लड़की ने उसकी इन्सल्ट कर दी थी।

क्लियर मना करती तो ठीक था लेकिन उसकी शक्ल का मजाक बनाना सही नहीं था।

लड़के को बात बहुत ज्यादा चुभ गई थी।


उसके कॉन्टेक्ट में एक तान्त्रिक था जिससे बोलकर उसने लड़की पर वशीकरण करवा दिया।

वशीकरण सक्सेसफुल हो गया।

4-5 महीने तक लड़की उस बन्दे के साथ रही।

उसने लड़की का फुल यूज किया।

यहाँ वहाँ से घरवालों को सुनने में आ गया कि लड़की इस बन्दे के साथ घूम रही है।


लड़की के घरवाले परेशान हो गए कि लड़की घरवालों की ना सुन के लड़के की सुन रही है।


लड़की के घरवालों ने किसी मन्दिर में जाकर पता किया तो वहाँ क्लियर हुआ कि इस पर वशीकरण है।

पुजारी ने वो सब तन्त्र मन्त्र काट दिया।


लड़की का दिमाग होश में आ गया।

लड़की परेशान हो गई कि इसके साथ मैं क्या कर रही हूँ?


लड़की की बात सब जगह फैल गई थी कि इस आदमी के साथ घूमी रहती है।


लड़के ने उससे शादि नहीं करनी थी, बस बदला लेना था।

उसने बात फैलाना शुरू कर दी कि लड़की इसके साथ सोई है।


लड़की को भी इन्सल्ट फील हो गई।

लेकिन अब कानून के सामने आप वशीकरण जैसी चीज को प्रूव नहीं कर सकते हैं।


इसलिए लड़की ने सबक सिखाने के लिए उस लड़के पर #Pretext_of_Marriage वाला ऐक्ट लगा के केस कर दिया कि लड़के ने पहले शादि का प्रॉमिस किया, उसके बाद शारीरक शोषण किया और मुकर गया।

लड़की ने कोर्ट में उसके मैसेज आदि दिखा के प्रूव कर दिया।

वो बन्दा आजकल जेल में है।


नुक्सान दोनों का ही हुआ।

इसलिए ना घमण्ड करो ना वशीकरण जैसे उल्टे काम करो।


#राजस्थान में #भानगढ़_का_किला है जो एक #तान्त्रिक के श्राप से उजड़ा है।

जो भी वहाँ रात को रुकता है वो सवेरे मिलता ही नहीं है।


#रानी_भानुमति बहुत सुन्दर थी तो एक तान्त्रिक ने उस पर वशीकरण करने के लिए चमेली का तेल अभिमन्त्रित किया और दासी को कुछ रिश्वत देकर कहा कि इसे रानी को लगा देना।


तेल कमरे में रखा था, कटोरी में तेल लगातार घूमता रहा।


रानी ने नोटिस किया और सोचा कि कुछ गड़बड़ इस तेल में जरूर है, तभी ये लगतार घूम रहा है।

रानी ने वो तेल एक बड़ी चट्टान पर फेंक दिया।


रात को वो चट्टान उड़कर उस तान्त्रिक के ऊपर जा गिरी।


उसका वशीकरण इतना खतरनाक था कि चट्टान ही उड़कर उसके पास गिरी।

रानी उस तेल को लगा देती तो वो भी बेसुध होकर तान्त्रिक के पास  चली जाती।


मरने से पहले उस तान्त्रिक ने उस किले को उजड़ने का श्राप दिया था।


एक आश्रम का महात्मा भी वशीकरण जानता था।


एक औरत की बहू उसके साथ आश्रम में गई तो महात्मा की नजर में बहू आ गई।

महात्मा ने रात को प्रसाद अभिमन्त्रित किया कि जैसे ही वो स्त्री इसे खाये, तो महात्मा के पास शारीरक सम्बन्ध बनाने के लिए चली आये।

अगले दिन वो बहु आश्रम में नहीं आई थी।

महात्मा ने उस महिला के पास वो प्रसाद दिया कि अपनी बहू को खिला देना।


वो महिला भी ऐसे गंवार थी कि अपनी बहू को प्रसाद दे दिया।


बहू को शक हुआ तो उसने वो प्रसाद घर में पाले हुए #भैंसे को खिला दिया।


आधी रात हुई और भैंसा अपना खूँटा उखाड़ के महात्मा के पास जा पहुँचा।

जो काम वो महात्मा उस स्त्री के साथ करना चाहता था, वैसा काम वो भैंसा उस महात्मा के साथ कर आया।



वशीकरण से किसी का भी फायदा नहीं हुआ।



अक्सर ये महात्मा लोग किसी वशीकरण मंत्र से प्रसाद आदि अभिमन्त्रित कर देते हैं जिसे खाने के बाद इनकी संगत इनको छोड़ती ही नहीं।


ऐसे ऐसे वशीकरण यन्त्र हैं कि पानी की टँकी के नीचे चिपका दो तो उस टँकी का पानी जो पिये वो उस बन्दे के वश में हो जाये।

ऐसे यन्त्र हैं कि तबले, डमरू, ढोलक या नगाड़े के अंदर डाल दो, जो जो उन वाद्यों की आवाज सुनेगा, वो उनके वश में हो जाएगा।


ऐसे ही बहुत से टोटके हैं जिनके कारण बड़े बड़े बुद्धिमान भी इन महात्माओं के आगे अपनी बुद्धि का सन्तुलन खो बैठते हैं।

जो बाबे अभी जेल में हैं, उनके चेले क्यों उनको गलत स्वीकार नहीं करते?


कारण ये वशीकरण के टोटके हैं।


कैमिस्ट्री में #नोबल_गैसीज की एक थ्योरी है कि वो अपने आप मे #फुली_फिल्डेड_इलेक्ट्रॉनिक_कॉन्फ़िगरेशन वाली हैं।

उन्हें किसी से रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है।

वो अपने आप में सेटिस्फाइड हैं और खुश है।

बाकी गैसीज उनको फॉलो करती हैं और जल्दी रिएक्शन करती हैं क्योंकि उनकी #हाफ_इलेक्ट्रॉनिक_कॉन्फ़िगरेशन है।

वो गैसीज कम्पलीट होने के लिए किसी भी सीमा तक रिएक्शन कर लेगी।


जो अधूरा है वो दूसरे की बराबरी करने के लिए वशीकरण की तरफ जा सकता है।

लड़की ने लड़के को ठुकराया क्योंकि लड़का सुन्दर नहीं था।

अपना शरीर वो नहीं बदल सकता था इसलिये लड़की की बराबरी के लिए उसने वशीकरण का सहारा लिया।

या तो वो लड़की के बराबर हो गया या उसने लड़की का स्तर नीचे गिरा के अपने बराबर कर लिया।

सही बात ये है कि उसने लड़की का स्तर नीचे गिराया और स्वयं जेल में चला गया।


घमण्ड नीचा देखता है और पाप सजा काटता है।

ऐसे ही कुछ घमण्ड भरे वाक्य #द्रौपदी ने #दुर्योधन को #लाक्षागृह में कहे थे कि #अन्धे_का_लड़का_अन्धा_ही_होता_है।

इस वाक्य ने पूरा #महाभारत करवा दिया था।



लोग कहते हैं कि वशीकरण भगवान ने क्यों बनाया है?

भगवान ने बनाया है तो गलत नहीं हो सकता है।


भगवान ने जहर भी बनाया है, खा के देख लो अगर वो सही है।