Monday, November 4, 2019

विहग योग अथवा पक्षी योग

#विहग_योग_अथवा_पक्षी_योग


जब सभी ग्रह #दशम_भाव और #चतुर्थ_भाव में हो
तो विहग योग अथवा पक्षी योग बनता है।

इस योग की आकृति उड़ते पक्षी के फैले हुए पँखों जैसी होती है
इसलिए इसे विहग या पक्षी योग कहते हैं।

इस योग में पैदा हुआ जातक बहुत अच्छा जीवन जीता है।

बड़ा अधिकारी बनता है तथा राज समाज
अथवा राजनीति आदि में सम्मान पाता है।

सरकारी अधिकारियों से सम्पर्क अच्छे रहते हैं,
सरकारी जॉब भी कर सकते हैं
या अपना व्यवसाय भी कर सकते हैं।

जातक यदि गरीब घर में भी पैदा हुआ हो
तो भी अपनी मेहनत के बल पर बड़ी सफलताएं पाता है।



इन सफलताओं का कारण है कि सभी ग्रह सुख भाव और कर्म भाव मे होकर दृष्टि सम्बन्ध बनाते हैं और चतुर्थ तथा दशम भाव पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं।

केन्द्र त्रिकोण भावों के स्वामी केंद्र में आ जाते हैं और कर्म नियन्त्रक ग्रह भी केन्द्र में आ जाते हैं।

जिसके कारण सफलता बढ़ती है।

कर्म नियन्त्रक ग्रह -

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2215570288660176&id=100006216785535


प्रस्तुत कुण्डली एक बहुत बड़े #बिजनसमैन की है जिनका #बच्चपन_हार्ड_कंडीशन्स में बीता है।

फैमली में #खेती_बाड़ी का काम था।

अभी के एक #बहुत_बड़े_होटल_के_मालिक हैं।

इनके #भाई_जी के साथ मिलकर इनका बिजनस चलाया है और #पत्नी स्वयं एक #राजनीति_में_बड़े_पद_पर_प्रतिष्ठित_महिला रही हैं।


कुण्डली के कुछ पॉइंट्स-

जन्म - 5 अप्रैल 1981
समय - 12:11 बजे
स्थान - उदयपुर

[1] मिथुन लग्न में 2 ग्रह चतुर्थ भाव में तथा 5 ग्रह दशम भाव में होकर विहग योग बना रहे हैं।

[2] दशम भाव में सूर्य मंगल दिग्बली होने के कारण करियर में बहुत बड़ी कामयाबी दर्शा रहे हैं।

सूर्य तृतीय भाव का स्वामी है जिसके कारण अपने भाई के सहयोग तथा अपनी मेहनत से करियर में बड़ी सफलता हासिल की।

[3] उच्च राशि में शुक्र का मालव्य राजयोग तथा बुश शुक्र का नीचभंग राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग बहुत बडा सफलता दर्शा रहे हैं।

[4] भाग्य का स्वामी शनि और दशम भाव का स्वामी बृहस्पति चतुर्थ भाव केंद्र में रहकर धर्मकर्माधिपत्य राजयोग बना रहे हैं।

[5] सप्तम भाव का स्वामी बृहस्पति भाग्य भाव के स्वामी शनि के साथ केन्द्र में होने से पत्नी का बड़ा लाभ दिखा रहा है जिसके कारण पत्नी राजनीति में रख प्रतिष्ठित महिला रह चुकी है।

[6] इस कुण्डली के कर्म नियन्त्रक ग्रह चन्द्रमा और शनि केन्द्र में दृष्टि सम्बन्ध बनाये हुए हैं और इनके साथ बाकी 5 ग्रह भी प्रभावित हैं।

जब भी दोनों कर्म नियन्त्रक ग्रह केन्द्र में होकर आपस में दृष्टि सम्बन्ध बनाते हैं तो जातक असाधारण सफलता पाता है।

राहु केतु इन कुण्डली में दशम और चतुर्थ भाव को खराब नहीं कर रहे हैं इसलिए कामयाबी बड़ी हो गई हैं

अतः इस कुण्डली से इनके जीवन की कामयाबी बहुत स्पष्ट दिखती है।

किसी भी जातक की कुंडली में यदि विहग योग बने और केतु दशम में हो तो बहुत ज्यादा संघर्ष करने पर सफलता मिलती है।

यदि इस योग में राहु दशम भाव में आ जाये तो उस जातक की कामयाबी अत्याधिक संघर्ष करने के बाद असाधरण कामयाबी हो जाएगी।

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