Sunday, November 3, 2019

वृक्षात पतन योग ( ऊँचाई से गिरने का योग )

#वृक्षात_पतन_योग ( #ऊँचाई_से_गिरने_का_योग )


शायद #शेखचिल्ली की कुण्डली में भी यह योग था।

इसलिए वो जिस शाखा पर बैठा था, उसी को काट रहा था और नीचे गिर गया था।

सुनने में आता है कि कोई शराब पीकर छत से गिरा और मर गया।

या कोई पेड़ से गिरा और टांग टूट गई अथवा सिर फूट गया।


पुराने समय में ऊँचाई के नाम पर सिर्फ पेड़ होते थे या कच्चे मकानों के स्लेटपोश छत होते थे।

बहुत कम लोग छत से गिरते थे क्योंकि रोज रोज कोई छत पर नहीं चढ़ा रहता।

उस समय अधिकतर लोग लकड़ी के लिए पेड़ पर चढ़ते थे और गिर भी जाते थे, इसलिए इसे वृक्षात पतन योग कहा गया।

आजकल तो हाइट के नाम पर हर जगह कुछ ना कुछ है, चाहे बिल्डिंग हो या टॉवर।

मिस्त्री प्लास्टर करने के वक़्त भी हाइट से गिरते हैं या पेंटर पेंट करते वक़्त गिर जाए।


लग्न में राहु या केतु हो अथवा लग्नेश के साथ राहु या केतु हो तो जातक ऊँचाई से गिरता है।

जब भी कोई व्यक्ति हाइट से गिरता है तो उसको अधिकतर ये भ्रम होता है कि उसके हाथ या पैर सही तरीके से अटके हैं।

किसी प्रकार से खुद को नुक्सान होने का भ्रम होता है या ओवर कॉन्फिडेंस में कुछ गलत स्टैप हो जाता है।

कई बार वो सेफ्टी गैजेट्स भी फेल हो जाते हैं जिनकी मदद से हाइट पर टिकने में सहायता मिलती है।

नशे की हालत में भी ऊँचाई से गिरते देखा गया है।


इन सब कंडीशन्स में #भ्रम एक #कॉमन चीज है।

भ्रम का कारण राहु है।

इसलिए लग्न में या लग्नेश के साथ राहु केतु का होना ऊँचाई से गिरने की घटना का कारण बनता है।

लग्न या लग्नेश के साथ केतु होगा चोट देगा।

केतु का लग्न में या लग्नेश के साथ होना हर बार हाइट से नहीं गिराता है।

यदि केतु वायु तत्व के लग्न में हो या वायु तत्व की राशि में लग्नेश के साथ हो तो हाइट से गिराता है क्योंकि हवा में चोट लगने का मतलब यही है कि जातक का कॉन्टेक्ट उस वक़्त जमीन की सतह से नहीं है और हवा में नुक्सान या तो ऊंचाई से गिरने पर होता है या वायु तत्व सम्बन्धी अस्त्र शस्त्र जैसे गोली लगना या फैंक कर चलाया जाने वाला अस्त्र हो सकता है।


प्रस्तुत कुण्डलियों में दोनों जातक ऊँचाई से गिरे हैं।

कुण्डली 1 -

जन्म - 10 अक्तूबर 1987
समय - 17:21 बजे
स्थान - बोकारो

[1] मीन लग्न लग्न की कुण्डली में राहु है,
सम्भावना अधिकार बन जाती है कि भ्रम के कारण चोट लगेगी।

ऊँचाई से गिरने के लिए राहु ही काफी है।

[2] सूर्य केतु साथ में है मंगल केतु भी साथ में है।

( मंगल+केतु = अंगारक योग अथवा शस्त्राघात योग ) के कारण पेड़ पर अपनी ही औजार से हाथ पर चोट लगी और चक्कर आ गया।

नीचे गिरा तो (सूर्य+केतु = अस्थिभ्रंश योग) के कारण हड्डी भी टूट गई।


कुण्डली 2 -

जन्म - 6 जून 1985
समय - 23:53 बजे
स्थान - डबवाली

यह जातक बच्चपन में पेड़ पर तोते के बच्चे पकड़ने चढ़ गया और पेड़ पर एक मॉनिटर लिजार्ड (गोह) थी जो एकदम से सामने आ गई और डर के जातक नीचे गिर गया।

दोनों घुटने और पैरों के जॉइंट्स खुल गए, मांसपेशियां बर्स्ट हो गई।

जातक कम से कम आधा दिन तक वहीं पड़ा रहा, टांगें सूज गई थी।

किसी ने जब देखा तो घर में इन्फॉर्म कर दिया।

कम से कम 4 महीने जातक चल नहीं पाया था।



[1] कुम्भ लग्न एक वायु तत्व लग्न है जिसका स्वामी शनि वायु तत्व की तुला राशि में केतु के साथ नवम भाव में है।

[2] शनि घुटनों और लकवे का अथवा लम्बे रोग का कारक है।

जातक को चोट भी ऐसी लगी कि जॉइंट्स खुल गए और कम से कम 4 महीने चल नहीं पाया।

लकवे जैसी हालत को शनि के कारण कह सकते हैं।

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