#मोक्ष_त्रिकोण_योग।
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जन्म कुण्डली में #धर्म, #अर्थ, #काम और #मोक्ष नाम के 4 त्रिकोण बनते हैं।
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सभी त्रिकोणों का अपना अपना महत्व है।
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इसमें 4-8-12 भाव से बनने वाले त्रिकोण को मोक्ष त्रिकोण कहा जाता है।
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इस त्रिकोण में #चतुर्थ_भाव का कारक #बृहस्पति,
#अष्टम_भाव का कारक #शनि
और #द्वादश_भाव का कारक #केतु कहा जाता है।
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जिसकी कुण्डली में मोक्ष त्रिकोण योग बनता है,
वह #आध्यात्मिक होकर मोक्ष प्राप्त करता है।
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ऐसे व्यक्तियों के आध्यात्मिक अनुभव बहुत अच्छे स्तर के होते हैं।
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#परालौकिक_शक्तियों से इनका #सम्पर्क बहुत जल्दी हो जाता है
और ये नीच तथा उच्च दोनों वर्ग की शक्तियों का अनुभव करते हैं।
#भूत_प्रेत_देवी_देवता सभी का #अनुभव इनके पास होता है।
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#परिभाषा -
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कुण्डली में यदि चतुर्थ भाव में बृहस्पति, अष्टम भाव में शनि और द्वादश भाव में केतु हो तो मोक्ष त्रिकोण योग बनता है।
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#फल- ऐसे जातक के जीवन में परालौकिक शक्तियों के अनुभव होते हैं जिनमें भूत प्रेत से लेकर देवी देवता सभी शामिल होते हैं, ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक होकर मोक्ष प्राप्त करता है।
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[ नोट - ]
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वैसे मोक्ष के लिए कुण्डली में योग होना अनिवार्य नहीं है क्योंकि मोक्ष तब होता है जब #मो_ह का #क्ष_य हो जाये।
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मोह का (मो) तथा क्षय का (क्ष)
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[ मो + क्ष ]
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समझा तो यही जाता है कि मरने के बाद मोक्ष होगा।
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लेकिन ऐसे ऐसे ज्ञानी वैरागी इस दुनियाँ में मौजूद हो सकते हैं जो #निष्काम_भाव से #कर्म करते हुए जी रहे होंगे ।
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वो मोक्ष के अधिकारी हैं, उन्होंने जीते जी मोक्ष पा लिया है।
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[ मोक्ष को समझने के लिए #श्रीमद्भगवद्गीता का #मोक्षसन्यासयोग नाम का 18वां अध्याय पढ़ लेना, सब कुछ यहीं नहीं लिखा जाएगा, थोड़ा सा अपने पेट का पानी भी हिला लिया करो। ]
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इस जातक ने कुण्डली दिखाई क्यूंकि कुछ समय पहले इसे #भूतनी मिल गई थी।
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ये लड़का अपने मित्र का साथ रात के समय बाइक पर कहीं जा रहा था।
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सुनसान इलाका था और बारिश हो रही थी।
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इनकी बाइक के साइड से एक अन्य बाइक ओवरटेक कर के निकल गई।
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इन्होंने देखा कि आगे वाली बाइक ओर पीछे की सीट पर एक महिला साड़ी पहने बैठी है जिसका आधा चेहरा दिख रहा था लेकिन बिल्कुल स्पष्ट नहीं दिखा।
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साड़ी का पल्लू पिछले टायर के पास झूल रहा था, इन्हें लगा कि कहीं वो पल्लू बाइक के टायर में ना फंस जाए और दुर्घटना ना हो जाये
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लड़के ने अपने दोस्त से कहा कि ओवरटेक कर के दूसरी बाइक वाले को आवाज लगाई कि पल्लू ठीक करो।
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और ये आगे चले गए।
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दूसरी बाइक थोड़ा पीछे रुक गई और इन्हें नहीं दिखी।
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थोड़ी देर बाद वो बाइक फुल स्पीड से आई और इनको ओवरटेक कर के इनको रोका और बात की।
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उसने पूछा कि आपने किसको आवाज लगाई थी।
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तो उस बाइक वाले को लड़के ने बताया कि आपके पीछे जो औरत बैठी थी उसका पल्लू टायर में फँसने वाला था, उसी के लिए आवाज लगाई।
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उस बेचारे बाइक वाले का मुँह रोने जैसा हो गया था।
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उसने कहा - मेरे साथ तो कोई भी नहीं थी, मैं तो अकेला ही चले जा रहा था।
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सभी समझ गए थे कि भूतनी ने इनके साथ #छलावा_काण्ड कर दिया है।
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ये सुनकर इस लड़के की टांगों में पानी पड़ गया, ऊपर से बारिश हो रही थी और लड़के ने बैग से पानी की बोतल निकाल के पानी पीना शुरू कर दिया।
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दूसरी बाइक वाला डरता डरता बाइक स्टार्ट कर के चला गया।
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और ये अपने रास्ते चले गए।
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पहुँच कर पूजा पाठ किया और डर मन से निकल गया।
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अब कुछ पॉइंट्स -
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जन्म - 8 जनवरी 1993
समय - 17:18 बजे
स्थान - मुम्बई
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[1] परिभाषा के अनुसार बृहस्पति, शनि और केतु क्रमानुसार 4-8-12 भाव में बैठकर मोक्ष त्रिकोण योग बना रहे हैं।
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[2] चतुर्थ भाव के बृहस्पति की दृष्टि अष्टम भाव के शनि और द्वादश भाव के केतु पर है।
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अष्टम पर दृष्टि होने से आध्यात्म का आकर्षण है।
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[3] अष्टम भाव में स्वराशि का शनि गूढ़ अनुभव बहुत अच्छे दे रहा है, भाग्य का स्वामी है और अष्टम में है तो आध्यत्म में जरूर ले जाएगा, जिस पर बृहस्पति की भी दृष्टि है, अतः अध्यात्म में उन्नति है तथा परालौकिक शक्तियों का चमत्कारी अनुभव अवश्य होगा।
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[4] शनि मृत्यु के कारक है, मृत्यु स्थान में बैठ कर तथा बृहस्पति से दृष्ट होकर मृत्यु को समझने वाला बनाएगा, मृत्यु को समझना अध्यात्म का हिस्सा है।
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भूत प्रेत मरे हुए प्राणी भी शुरुआत में दिख जायेंगे।
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जैसे जैसे आध्यामिक उन्नति होगी, वैसे वैसे अनुभव प्रेत योनि से उठकर देव योनि के भी हो जाएंगे।
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शनि अष्टम में मृत्यु को कष्टकारी बनाता है, जब दर्दनाक मौत होती है दूसरी बार जन्म लेने के नाम से ही रूह कांप जाती है।
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कुदरती ही जीवन लेने से वैराग्य हो जाएगा।
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[5] द्वादश के केतु को मोक्ष कारक कहा गया है।
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यह बृहस्पति से दृष्ट है, मोक्ष कारक ग्रह जब आध्यात्म कारक ग्रह से दृष्ट हो तो मोक्ष की संभावना बढ़ ही जाती है।
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अतः मोक्ष त्रिकोण इस कुंडली मे बहुत स्पष्ट रूप से है।

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