#कुबेर_साधना
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[#नोट -
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#लालची_लोग_इसे_कर_ही_नहीं_पायेंगे।
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#जरूरतमंद_के_लिए_बहुत_अच्छा_सपोर्ट_मिलेगा।
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#प्रैक्टिकल_एक्सपीरियंस
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मैं कभी नहीं कहता कि लक्ष्मी साधना करे या कुबेर साधना करें तो आप करोड़पति बन जाएंगे।
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ना आपके सामने देवी देवता आकर ये कहेगा कि #तथास्तु।
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ऐसा होता भी नहीं है।
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लेकिन #धन_की_समस्या इन साधनाओं से #कन्ट्रोल होती देखी गई है।
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कुछ समय पहले मेरे एक क्लाईंट को पैसे की दिक्कत थी।
।
कुण्डली में #छठे_भाव का प्रभाव चला था और #लोन हो गया था।
।
पैसा खर्च अधिक हो रहा था और पैसे का सही यूज नहीं हो पा रहा था, इंस्टॉलमेंट में पैसा कट जाता था और बचत कम होती थी।
।
।
तब उन्होंने ये 40 दिन की साधना की थी।
।
उनके खर्च कम होने लगे, पैसा सही जगह यूज होने लगा और बचत भी होती गई।
।
छठे भाव के प्रभाव का जो समय निकला उसमें पूरा समय पैसे की समस्या कर्ज के कारण बनी रही लेकिन साधना के इफेक्ट से वो समय बहुत ही कम परेशानी में निकला।
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ऐसा कभी नहीं होता है कि आप साधना करें और करोड़ों की लॉटरी लग जाये या जमीन खोदने पर सोने के सिक्कों से भरा घड़ा मिल जाये।
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इन साधनाओं से पैसे का सही यूज होने लगता है, वेस्टेज कम होती है और बचत होती है।
।
जरूरतमंदों को लालच नहीं होता इसलिए उनकी साधना फलीभूत हो जाती है।
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#साधना_विधि -
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किसी भी #बृहस्पतिवार को या #दीपावली_धनत्रयोदश को सुबह स्नान कर के #सफेद_वस्त्र पहनकर कुएं के पानी से [ कुआं अवेलेबल नहीं तो ट्यूबवेल का पानी, अगर ट्यूबवेल भी नहीं तो नल का पानी भी चलेगा, ( अब कोई वाटर प्योरिफायर की ऑप्शन मत पूछना)] कुबेर यंत्र को स्नान करवा के सफेद वस्त्र पर स्थापित करें, पंचोपचार से पूजन करें।
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हाथ मे जल लेकर संकल्प आदि करें।
।
सामने घी का दीपक प्रज्ज्वलित कर सफेद आसन पर पूर्वाभिमुख हो के कुबेर मंत्र का ग्यारह माला जप करे।
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जप करने के पहले 5 बार सस्वर #कनकधारा_स्त्रोत का पाठ करे।
।
मंत्र जप #स्फटिक_माला या #चंदन_माला से करना है।
।
अगले बृहस्पतिवार तक निरंतर इस क्रिया को कर साधना का समापन करे।
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यदि दीपावली को शुरू किया है तो अगले हफ्ते उसी वार को समापन करे।
।
मंत्र का दशांश हवन करे।
।
अगर कोई बड़े प्रोसीजर में करना चाहे तो 40 दिन कर सकता है और 40 दिन के जाप का दशांश हवन करना पड़ेगा।
।
साधना पूर्ण होने पर यंत्र को पूजास्थान गल्ला या तिजोरी
में स्थापित कर दें।
।
प्रतिदिन कनकधारा स्त्रोत का तथा उपरोक्त
मंत्र का एक बार उच्चारण पाठ अवश्य करें।
।
ऐसा करने पर हमेशा समृद्धि बनी रहती है।
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#मन्त्र -
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ॐ नमः वैष्णौराय कनकधारायै अक्षय समृद्धि
देहि-देहि कुबेराय नमः।
।
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#कनकधारा_स्तोत्र
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अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम ।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया:।
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवाया:।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदान दक्षमानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोsपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षण मीक्षणार्ध मिन्दीवरोदर सहोदरमिन्दिराया:।आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दमनिमेषमनंगतन्त्रम।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रम भूत्यै भवेन्मम भुजंगशयांगनाया:।
बाह्यन्तरे मुरजित: श्रितकौस्तुभे या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतोsपि कटाक्षमाला कल्याणमावहतु मे कमलालयाया:।
कालाम्बुदालि ललितोरसि कैटभारे र्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव ।
मातु: समस्तजगतां महनीय मूर्तिर्भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।
प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धम मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।
दद्याद्दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा-मस्मिन्नकिंचन विहंगशिशौ विषण्णे
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाह:।
इष्टा विशिष्टमतयोsपि यया दयार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते
दृष्टि: प्रह्रष्टमकमलोदरदीप्तिरिष्टाम पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टराया:।
गीर्देवतेति गरुड़ध्वजसुन्दरीति शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रिभुवनैक गुरोस्तरुण्यै।
श्रुत्यै नमोsस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै रत्यै नमोsस्तु रमणीयगुणार्णवायै
शक्त्यै नमोsस्तु शतपत्रनिकेतनायै पुष्टयै नमोsस्तु पुरुषोत्तम वल्लभायै।
नमोsस्तु नालीकनिभाननायै नमोsस्तु दुग्धोदधिजन्मभूत्यै ।
नमोsस्तु सोमामृतसोदरायै नमोsस्तु नारायणवल्लभायै।
सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि।
त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये।
यत्कटाक्षसमुपासनाविधि: सेवकस्य सकलार्थसम्पद: ।
सन्तनोति वचनांगमानसैस्त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम।
दिग्घस्तिभि: कनककुम्भमुखाव सृष्टस्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुतांगीम ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धि पुत्रीम।
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरंगितै रपांगै:।
अवलोकय मामकिंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया:।
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम ।
गुणाधिका गुरुतर भाग्यभागिनो ते भुवि बुधभाविताशया:।
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[#नोट -
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#लालची_लोग_इसे_कर_ही_नहीं_पायेंगे।
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#जरूरतमंद_के_लिए_बहुत_अच्छा_सपोर्ट_मिलेगा।
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#प्रैक्टिकल_एक्सपीरियंस
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मैं कभी नहीं कहता कि लक्ष्मी साधना करे या कुबेर साधना करें तो आप करोड़पति बन जाएंगे।
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ना आपके सामने देवी देवता आकर ये कहेगा कि #तथास्तु।
।
ऐसा होता भी नहीं है।
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लेकिन #धन_की_समस्या इन साधनाओं से #कन्ट्रोल होती देखी गई है।
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कुछ समय पहले मेरे एक क्लाईंट को पैसे की दिक्कत थी।
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कुण्डली में #छठे_भाव का प्रभाव चला था और #लोन हो गया था।
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पैसा खर्च अधिक हो रहा था और पैसे का सही यूज नहीं हो पा रहा था, इंस्टॉलमेंट में पैसा कट जाता था और बचत कम होती थी।
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तब उन्होंने ये 40 दिन की साधना की थी।
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उनके खर्च कम होने लगे, पैसा सही जगह यूज होने लगा और बचत भी होती गई।
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छठे भाव के प्रभाव का जो समय निकला उसमें पूरा समय पैसे की समस्या कर्ज के कारण बनी रही लेकिन साधना के इफेक्ट से वो समय बहुत ही कम परेशानी में निकला।
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ऐसा कभी नहीं होता है कि आप साधना करें और करोड़ों की लॉटरी लग जाये या जमीन खोदने पर सोने के सिक्कों से भरा घड़ा मिल जाये।
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इन साधनाओं से पैसे का सही यूज होने लगता है, वेस्टेज कम होती है और बचत होती है।
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जरूरतमंदों को लालच नहीं होता इसलिए उनकी साधना फलीभूत हो जाती है।
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#साधना_विधि -
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किसी भी #बृहस्पतिवार को या #दीपावली_धनत्रयोदश को सुबह स्नान कर के #सफेद_वस्त्र पहनकर कुएं के पानी से [ कुआं अवेलेबल नहीं तो ट्यूबवेल का पानी, अगर ट्यूबवेल भी नहीं तो नल का पानी भी चलेगा, ( अब कोई वाटर प्योरिफायर की ऑप्शन मत पूछना)] कुबेर यंत्र को स्नान करवा के सफेद वस्त्र पर स्थापित करें, पंचोपचार से पूजन करें।
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हाथ मे जल लेकर संकल्प आदि करें।
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सामने घी का दीपक प्रज्ज्वलित कर सफेद आसन पर पूर्वाभिमुख हो के कुबेर मंत्र का ग्यारह माला जप करे।
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जप करने के पहले 5 बार सस्वर #कनकधारा_स्त्रोत का पाठ करे।
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मंत्र जप #स्फटिक_माला या #चंदन_माला से करना है।
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अगले बृहस्पतिवार तक निरंतर इस क्रिया को कर साधना का समापन करे।
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यदि दीपावली को शुरू किया है तो अगले हफ्ते उसी वार को समापन करे।
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मंत्र का दशांश हवन करे।
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अगर कोई बड़े प्रोसीजर में करना चाहे तो 40 दिन कर सकता है और 40 दिन के जाप का दशांश हवन करना पड़ेगा।
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साधना पूर्ण होने पर यंत्र को पूजास्थान गल्ला या तिजोरी
में स्थापित कर दें।
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प्रतिदिन कनकधारा स्त्रोत का तथा उपरोक्त
मंत्र का एक बार उच्चारण पाठ अवश्य करें।
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ऐसा करने पर हमेशा समृद्धि बनी रहती है।
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#मन्त्र -
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ॐ नमः वैष्णौराय कनकधारायै अक्षय समृद्धि
देहि-देहि कुबेराय नमः।
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#कनकधारा_स्तोत्र
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अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम ।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया:।
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवाया:।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदान दक्षमानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोsपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षण मीक्षणार्ध मिन्दीवरोदर सहोदरमिन्दिराया:।आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दमनिमेषमनंगतन्त्रम।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रम भूत्यै भवेन्मम भुजंगशयांगनाया:।
बाह्यन्तरे मुरजित: श्रितकौस्तुभे या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतोsपि कटाक्षमाला कल्याणमावहतु मे कमलालयाया:।
कालाम्बुदालि ललितोरसि कैटभारे र्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव ।
मातु: समस्तजगतां महनीय मूर्तिर्भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।
प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धम मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।
दद्याद्दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा-मस्मिन्नकिंचन विहंगशिशौ विषण्णे
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाह:।
इष्टा विशिष्टमतयोsपि यया दयार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते
दृष्टि: प्रह्रष्टमकमलोदरदीप्तिरिष्टाम पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टराया:।
गीर्देवतेति गरुड़ध्वजसुन्दरीति शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रिभुवनैक गुरोस्तरुण्यै।
श्रुत्यै नमोsस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै रत्यै नमोsस्तु रमणीयगुणार्णवायै
शक्त्यै नमोsस्तु शतपत्रनिकेतनायै पुष्टयै नमोsस्तु पुरुषोत्तम वल्लभायै।
नमोsस्तु नालीकनिभाननायै नमोsस्तु दुग्धोदधिजन्मभूत्यै ।
नमोsस्तु सोमामृतसोदरायै नमोsस्तु नारायणवल्लभायै।
सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि।
त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये।
यत्कटाक्षसमुपासनाविधि: सेवकस्य सकलार्थसम्पद: ।
सन्तनोति वचनांगमानसैस्त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम।
दिग्घस्तिभि: कनककुम्भमुखाव सृष्टस्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुतांगीम ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धि पुत्रीम।
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरंगितै रपांगै:।
अवलोकय मामकिंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया:।
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम ।
गुणाधिका गुरुतर भाग्यभागिनो ते भुवि बुधभाविताशया:।

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