Wednesday, February 27, 2019

#सरस्वती_योग।


#बुध_बृहस्पति और #शुक्र से बनने वाला सरस्वती योग।


सरस्वती योग वाले व्यक्ति #बुद्धिमान होता है, #विद्वान बनता है, #दार्शनिक, #कलाकार, #नृतक, #लेखक, #कवि, #रचनात्मक_संगीतज्ञ, #वाद्य_वादन में कुशल, #ज्योतिषी एवं #विद्या से संबंधित किसी अन्य #रचनात्मक क्षेत्र में भी मान-सम्मान,यश और धन कमाते हैं।

#काव्य एवं #संगीतादि क्षेत्र में वह #उच्चकोटि की रूचि रखने वाला होता ही है

यदि इन तीनों में से कोई एक ग्रह #उच्च_राशि का हो तो यह योग विशेष फल देता है।


#रुचि के अनुसार कोई भी मार्ग #चुन सकता है और सफलता प्राप्त करता है।


यह कुण्डली Umesh Soni की है जिसकी जिसकी कुण्डली में सरस्वती योग बना है।

यह एक #सितारवादक है, #शास्त्रीय_संगीत का ज्ञान रखता है और इस वीडियो में #स्वयं के द्वारा #कम्पोज की गई #तीनताल में बंधी हुई #राग_गुर्जरी_तोड़ी की एक #सितार_गत प्रस्तुत की है जिसमें #अलाप, #मींड, #गमक, #कृन्तन, #झाला, और #घसीट का बहुत अच्छे से प्रयोग किया है।

सितार बजाना ही अपने आप मे एक कठिन कार्य है, स्टील की पतली तार पे ऊपर से नीचे तक ऊँगलियाँ रगड़ते हुए बजाना बहुत कठिन होता है।

ऊँगली के अग्रभाग में चीरे पड़ जाते हैं और ब्लीडिंग भी होती है।

जब मींड के लिए तार खींची जाती है तो इस पतली तार से ऊँगली पे अत्याधिक दबाव पड़ता है और इसी दबाव में जब घसीट दी जाती है तो ऊँगली कटने में कोई शक नहीं।

बहुत अधिक समय तक सितार वादन करने के पश्चात ही ऊँगलियाँ ऐसे वादन के लिए मजबूत हो पाती हैं।


मैंने भी सितार बजाई है कुछ समय तक, इसलिए मैं अच्छे से जानता हूँ कि सितार बजाना कितना कठिन है।


सरस्वती योग के कारण यह लड़का इतना अच्छा वादन कर पाता है और स्वयं म्यूजिक कम्पोज कर पाता है।

रचना करना जटिल कार्य है।

अपने जीवन में यह बहुत अच्छा संगीतज्ञ बनेगा और संगीत में नाम कमायेगा।


म्यूजिशियन बहुत सारे होंगे लेकिन सभी सरस्वती योग वाले नहीं होते हैं।

शुक्र, बुध संगीत की कलाकारी वाले ग्रह हैं, कुछ संगीतज्ञों की कुंडली मे गन्धर्व योग भी होता है या कलाकारी से सम्बंधित कोई अन्य योग भी होता है जिसके कारण वे संगीतज्ञ बन पाते हैं।


संगीत के अलग अलग फ्लेवर सुनने को मिलते हैं,

मंगल से प्रभावित व्यक्ति धूमधड़ाका DJ म्यूजिक, जोशीले गाने, कव्वाली आदि सुनते हैं।


चन्द्रमा से प्रभावित व्यक्ति भावुक और कल्पना वाला संगीत सुनते हैं।

शुक्र से प्रभावित व्यक्ति रोमांटिक म्यूजिक सुनते हैं

बुध वाले थोड़े मजाकिया गाने एंटरटेनमेंट पसन्द करते हैं लेकिन गम्भीर संगीत और वादन में भी एक्सपर्ट होते हैं।

बृहस्पति वाले शास्त्रीय संगीत, गजल, गम्भीर म्यूजिक, वास्तविकता सम्बन्धीय संगीत सुनते हैं।

शनि वाले कुछ वैरागी किस्म के गाने सुनते हैं।

यदि उपरोक्त ग्रह अच्छे हो तो सकारात्मक गाने सुनते हैं और यदि खराब हो तो दुःख भरे गाने सुनते हैं।

रचनाएं भी इसी तरह सुख दुःख को प्रभावित करती हैं।


इनके वाद्य यंत्र भी ग्रहों से सम्बंधित होते हैं।

शुक्र वाले पश्चिमी वाद्य यंत्र जैसे एकॉस्टिक गिटार, डिस्टॉर्शन गिटार, पैड, ड्रम, कीबोर्ड आदि बजाते हैं।

मंगल वाले पंजाबी ढोल, ढोलक, नगाड़े, ब्रास बैण्ड बजाते हैं।

बुध, बृहस्पति वाले शास्त्रीय वाद्य जैसे, तबला, सितार, बाँसुरी, सारंगी, वीणा, तानपुरा आदि का इस्तेमाल करते हैं।

शास्त्रीय संगीत बहुत ही ज्यादा गम्भीर संगीत है जिसको साधने में वर्षों की तपस्या लगती है।


बृहस्पति आध्यत्मिक ग्रह है और शास्त्रीय संगीत को आध्यात्म से जोड़ा गया है।

जितनी दार्शनिकता शास्त्रीय संगीत में है उतनी किसी प्रकार के संगीत में नहीं है।


कोई भी गाना ले लीजिए, वो शास्त्रीय संगीत के किसी ना किसी राग और ताल पर ही आधारित निकेलगा।


शास्त्रीय संगीत ही सब प्रकार के संगीत का जनक है।



इसकी कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।


जन्म - 15 फरवरी 1997
समय - 20:50 बजे मण्डी हिमाचल प्रदेश

[1] कन्या लग्न में पँचम त्रिकोण भाव में बृहस्पति, शुक्र और बुध के एकसाथ होने से सरस्वती योग का निर्माण हुआ है।

[2] सीधी सी बात है कि सरस्वती योग पँचम भाव में है तो संगीत और ज्ञान में रुचि होगी ही।

[3] बुध लग्न का स्वामी होकर शुक्र के साथ है जिससे कलाकारी का स्वभाव है।

[4] बुध कलाकारी में विश्लेषण और तर्क का चिंतन दे रहा है तथा वाद्य बजाने का कौशल दे रहा है।

[5] बृहस्पति पँचम भाव में नीच राशि का है लेकिन जब लग्नेश बुध और भाग्येश शुक्र साथ में है तो नीच का प्रभाव नहीं मिलेगा।

[6] बृहस्पति के कारण संगीत में दार्शनिकता बढ़ गई, गम्भीर संगीत के प्रति आकर्षण होता है।

[7] ज्ञान कारक बृहस्पति के साथ दोनों कलात्मक ग्रह कारण शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहा है।

[8] राग का जो रस होता है वो एक तरीके से कन्संट्रेटिड रस होता है जिसे डायल्यूट करना हर किसी के वश की बात नहीं है।

कहने का मतलब है कि राग में कम से कम 5 और अधिक से अधिक 7 स्वर लगते हैं और राग मन्द्र सप्तक के पँचम से तार सप्तक के गान्धार तक जाता है जिन स्वरों के आधार पूरा संगीत बजाया जाता है।

इस छोटे से राग में हजारों की संख्या में गाने मिल जाएंगे।

इसका कारण उस राग पर दार्शनिक चिंतन होता है।

[9] सँगीत के छोटे से पार्ट को अधिक से अधिक विस्तारित करना राहु का काम है और लग्न में बैठा बुध की राशि का राहु संगीत में लय देकर बहुत अच्छे तरीके से विस्तारित करने का गुण दे रहा है।

[10] लग्न में पराक्रम का स्वामी मंगल है जो जोशीला बना रहा है, इसी कारण सितार बजाने के जटिल कार्य को करने का जोश है, ना तो ऊँगलियाँ कटने के भय ना जख्मों की चिन्ता है, इसका वाद्य जुनून वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।


सिर्फ संगीत में डूबा है।


[11] चन्द्रमा मन को कंट्रोल करता है और इसका चन्द्रमा शुक्र की वृषभ राशि में है जी इसका मन ही कलाकर बना रहा है।

[12] राशि का स्वामी ही जब सरस्वती योग में है तो संगीतज्ञ बनना स्वभाविक है।

[13] अब पँचम भाव में 3 ज्ञानी ग्रह सरस्वती योग बनाकर बैठे हैं और पँचमेश केंद्र में सप्तम भाव में है और पँचम से पँचम भाव अर्थात नवम भाव में उच्च ग्रह उच्च शिक्षा का योग बन रहा है।


इस लड़के की शिक्षा संगीत में पीएचडी की होना निश्चित है और संगीतज्ञ बनना निश्चित है।

https://m.youtube.com/watch?v=y7skiZ5U3vg

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