Wednesday, February 27, 2019

#सरस्वती_योग।


#बुध_बृहस्पति और #शुक्र से बनने वाला सरस्वती योग।


सरस्वती योग वाले व्यक्ति #बुद्धिमान होता है, #विद्वान बनता है, #दार्शनिक, #कलाकार, #नृतक, #लेखक, #कवि, #रचनात्मक_संगीतज्ञ, #वाद्य_वादन में कुशल, #ज्योतिषी एवं #विद्या से संबंधित किसी अन्य #रचनात्मक क्षेत्र में भी मान-सम्मान,यश और धन कमाते हैं।

#काव्य एवं #संगीतादि क्षेत्र में वह #उच्चकोटि की रूचि रखने वाला होता ही है

यदि इन तीनों में से कोई एक ग्रह #उच्च_राशि का हो तो यह योग विशेष फल देता है।


#रुचि के अनुसार कोई भी मार्ग #चुन सकता है और सफलता प्राप्त करता है।


यह कुण्डली Umesh Soni की है जिसकी जिसकी कुण्डली में सरस्वती योग बना है।

यह एक #सितारवादक है, #शास्त्रीय_संगीत का ज्ञान रखता है और इस वीडियो में #स्वयं के द्वारा #कम्पोज की गई #तीनताल में बंधी हुई #राग_गुर्जरी_तोड़ी की एक #सितार_गत प्रस्तुत की है जिसमें #अलाप, #मींड, #गमक, #कृन्तन, #झाला, और #घसीट का बहुत अच्छे से प्रयोग किया है।

सितार बजाना ही अपने आप मे एक कठिन कार्य है, स्टील की पतली तार पे ऊपर से नीचे तक ऊँगलियाँ रगड़ते हुए बजाना बहुत कठिन होता है।

ऊँगली के अग्रभाग में चीरे पड़ जाते हैं और ब्लीडिंग भी होती है।

जब मींड के लिए तार खींची जाती है तो इस पतली तार से ऊँगली पे अत्याधिक दबाव पड़ता है और इसी दबाव में जब घसीट दी जाती है तो ऊँगली कटने में कोई शक नहीं।

बहुत अधिक समय तक सितार वादन करने के पश्चात ही ऊँगलियाँ ऐसे वादन के लिए मजबूत हो पाती हैं।


मैंने भी सितार बजाई है कुछ समय तक, इसलिए मैं अच्छे से जानता हूँ कि सितार बजाना कितना कठिन है।


सरस्वती योग के कारण यह लड़का इतना अच्छा वादन कर पाता है और स्वयं म्यूजिक कम्पोज कर पाता है।

रचना करना जटिल कार्य है।

अपने जीवन में यह बहुत अच्छा संगीतज्ञ बनेगा और संगीत में नाम कमायेगा।


म्यूजिशियन बहुत सारे होंगे लेकिन सभी सरस्वती योग वाले नहीं होते हैं।

शुक्र, बुध संगीत की कलाकारी वाले ग्रह हैं, कुछ संगीतज्ञों की कुंडली मे गन्धर्व योग भी होता है या कलाकारी से सम्बंधित कोई अन्य योग भी होता है जिसके कारण वे संगीतज्ञ बन पाते हैं।


संगीत के अलग अलग फ्लेवर सुनने को मिलते हैं,

मंगल से प्रभावित व्यक्ति धूमधड़ाका DJ म्यूजिक, जोशीले गाने, कव्वाली आदि सुनते हैं।


चन्द्रमा से प्रभावित व्यक्ति भावुक और कल्पना वाला संगीत सुनते हैं।

शुक्र से प्रभावित व्यक्ति रोमांटिक म्यूजिक सुनते हैं

बुध वाले थोड़े मजाकिया गाने एंटरटेनमेंट पसन्द करते हैं लेकिन गम्भीर संगीत और वादन में भी एक्सपर्ट होते हैं।

बृहस्पति वाले शास्त्रीय संगीत, गजल, गम्भीर म्यूजिक, वास्तविकता सम्बन्धीय संगीत सुनते हैं।

शनि वाले कुछ वैरागी किस्म के गाने सुनते हैं।

यदि उपरोक्त ग्रह अच्छे हो तो सकारात्मक गाने सुनते हैं और यदि खराब हो तो दुःख भरे गाने सुनते हैं।

रचनाएं भी इसी तरह सुख दुःख को प्रभावित करती हैं।


इनके वाद्य यंत्र भी ग्रहों से सम्बंधित होते हैं।

शुक्र वाले पश्चिमी वाद्य यंत्र जैसे एकॉस्टिक गिटार, डिस्टॉर्शन गिटार, पैड, ड्रम, कीबोर्ड आदि बजाते हैं।

मंगल वाले पंजाबी ढोल, ढोलक, नगाड़े, ब्रास बैण्ड बजाते हैं।

बुध, बृहस्पति वाले शास्त्रीय वाद्य जैसे, तबला, सितार, बाँसुरी, सारंगी, वीणा, तानपुरा आदि का इस्तेमाल करते हैं।

शास्त्रीय संगीत बहुत ही ज्यादा गम्भीर संगीत है जिसको साधने में वर्षों की तपस्या लगती है।


बृहस्पति आध्यत्मिक ग्रह है और शास्त्रीय संगीत को आध्यात्म से जोड़ा गया है।

जितनी दार्शनिकता शास्त्रीय संगीत में है उतनी किसी प्रकार के संगीत में नहीं है।


कोई भी गाना ले लीजिए, वो शास्त्रीय संगीत के किसी ना किसी राग और ताल पर ही आधारित निकेलगा।


शास्त्रीय संगीत ही सब प्रकार के संगीत का जनक है।



इसकी कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।


जन्म - 15 फरवरी 1997
समय - 20:50 बजे मण्डी हिमाचल प्रदेश

[1] कन्या लग्न में पँचम त्रिकोण भाव में बृहस्पति, शुक्र और बुध के एकसाथ होने से सरस्वती योग का निर्माण हुआ है।

[2] सीधी सी बात है कि सरस्वती योग पँचम भाव में है तो संगीत और ज्ञान में रुचि होगी ही।

[3] बुध लग्न का स्वामी होकर शुक्र के साथ है जिससे कलाकारी का स्वभाव है।

[4] बुध कलाकारी में विश्लेषण और तर्क का चिंतन दे रहा है तथा वाद्य बजाने का कौशल दे रहा है।

[5] बृहस्पति पँचम भाव में नीच राशि का है लेकिन जब लग्नेश बुध और भाग्येश शुक्र साथ में है तो नीच का प्रभाव नहीं मिलेगा।

[6] बृहस्पति के कारण संगीत में दार्शनिकता बढ़ गई, गम्भीर संगीत के प्रति आकर्षण होता है।

[7] ज्ञान कारक बृहस्पति के साथ दोनों कलात्मक ग्रह कारण शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहा है।

[8] राग का जो रस होता है वो एक तरीके से कन्संट्रेटिड रस होता है जिसे डायल्यूट करना हर किसी के वश की बात नहीं है।

कहने का मतलब है कि राग में कम से कम 5 और अधिक से अधिक 7 स्वर लगते हैं और राग मन्द्र सप्तक के पँचम से तार सप्तक के गान्धार तक जाता है जिन स्वरों के आधार पूरा संगीत बजाया जाता है।

इस छोटे से राग में हजारों की संख्या में गाने मिल जाएंगे।

इसका कारण उस राग पर दार्शनिक चिंतन होता है।

[9] सँगीत के छोटे से पार्ट को अधिक से अधिक विस्तारित करना राहु का काम है और लग्न में बैठा बुध की राशि का राहु संगीत में लय देकर बहुत अच्छे तरीके से विस्तारित करने का गुण दे रहा है।

[10] लग्न में पराक्रम का स्वामी मंगल है जो जोशीला बना रहा है, इसी कारण सितार बजाने के जटिल कार्य को करने का जोश है, ना तो ऊँगलियाँ कटने के भय ना जख्मों की चिन्ता है, इसका वाद्य जुनून वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।


सिर्फ संगीत में डूबा है।


[11] चन्द्रमा मन को कंट्रोल करता है और इसका चन्द्रमा शुक्र की वृषभ राशि में है जी इसका मन ही कलाकर बना रहा है।

[12] राशि का स्वामी ही जब सरस्वती योग में है तो संगीतज्ञ बनना स्वभाविक है।

[13] अब पँचम भाव में 3 ज्ञानी ग्रह सरस्वती योग बनाकर बैठे हैं और पँचमेश केंद्र में सप्तम भाव में है और पँचम से पँचम भाव अर्थात नवम भाव में उच्च ग्रह उच्च शिक्षा का योग बन रहा है।


इस लड़के की शिक्षा संगीत में पीएचडी की होना निश्चित है और संगीतज्ञ बनना निश्चित है।

https://m.youtube.com/watch?v=y7skiZ5U3vg

Monday, February 25, 2019

चुड़ैल कैसी होती है ?

क्या आपने कभी असली चुड़ैल देखी है ?

आपने सुना होगा कि चुड़ैल के पैर उल्टे होते हैं।

ऊँगलियाँ पीछे को तरफ और एड़ी आगे की तरफ होती है।


उसके पैर इस तरह से उल्टे नहीं होते हैं।



ये कुण्डली मेरे दोस्त की है जिसके साथ चुड़ैल की लड़ाई हुई है।

उसने चुड़ैल को बहुत गौर से देखा था।


उसके 3 अनुभव संक्षेप में -


[1] वो अपने पिता के साथ अपने देवता को लेकर किसी के घर प्रेत बाधा की शान्ति के लिए गया था।


सिगरेट पीने की आदत है।

घर से थोड़ा दूर घने पेड़ों के बीच चला गया।


उसने सिगरेट मुँह में रखी और लाइटर जलाया।


लाईट में उसके सामने 7-8 फ़ीट को दूरी पर कम्बल में बैठा हुआ कोई दिखा।

उसने पूछा कि कौन है ?

कोई जवाब नहीं मिला।


इसको भूत देखने का बहुत शौक था।


उसने लाइटर जला के जैसे ही कम्बल हटाया तो एक बहुत भद्दी शक्ल वाली बूढ़ी औरत थी जिसके बाल बिखरे थे और ऐसा लग रहा था वो कई सालों से नहाई नहीं है।

उसकी आँखें बिल्कुल वैसी थी जैसे कि डॉक्टर पलकें खींच के चैक करता है।


वो प्रेतनी झल्ला गई और उठ कर खड़ी हो गई।


ये जंगल मे इतना डरा तो नहीं लेकिन भाग के आया कि इसे भूत मिला है।


जब ये घर के अन्दर आ गया तो दरवाजा बन्द किया और कुंडी लगा दी।


जंगल में नहीं डरा लेकिन घर में आने के बाद इसको डर लगा क्योंकि वो बूढ़ी घर के अन्दर दूसरे कमरे से निकल कर इसके सामने आई।

उसके साथ एक और गन्दा जैसा दिखने वाला आदमी भी था जिसका एक हाथ नहीं था।

तीसरी औरत भी इसके सामने आई जिसका हुलिया मुझे याद नहीं है।

ये 3 प्रेत इसके पहले अनुभव में इसने देखे।

उस घर में सिर्फ इसे और इसके पिता को ही वो दिखे थे और देवता की पूजा समाप्ति के पश्चात वो भस्म हो गए थे।


[2] ये सुबह 5 बजे के आसपास उठता है और नहाने के लिए घर से थोड़ा दूर बावड़ी से पानी लाता है।

रास्ते में जाते हुए इसके गांव के एक आदमी ने अपने घर की छत पर से इसको आवाज लगाई और हालचाल पूछा।

1-2 मिनट बात हुई।

थोड़ा आगे जाने पर इसको याद आया कि ये आदमी तो 2 दिन पहले मर चुका है।

जब इसने पीछे मुड़कर देखा तो छत पर कोई नहीं था।


ये दौड़कर घर वापस आ गया और काफी घबरा गया था।


[3] ये देवता का पुजारी बन गया है।

इसे रात को सपना हुआ और एक त्रेखड़ू ( मसाण ) इसके सपने में आया।

उसने कहा कि मैं तेरे पास आने वाला हूँ, तू मेरी देवी के पास जाकर मेरी निशानी ला।

उसने किसी देवी का नाम लिया था जो इसने पहले नहीं सुना था।


उस त्रेखड़ू की हाईट काफी बड़ी थी, भयानक चेहरा था, काले कपड़े पहने थे।

हाथ पैरों में मोटी मोटी जंजीरें बंधी थी और गले में भी बहुत मोटा लोहे का कड़ा पहना था।


इसने ये बात अपने पिता को बताई और उन्होंने देवता से सम्पर्क कर के सपने का बारे में पूछा तो देवता ने कहा कि सपने में सही जानकारी मिली है उस देवी का मन्दिर ढूंढो।

हफ्ते भर की तलाश में इसने वो देवी ढूंढ ली और उसके पुजारी से बात की।

पुजारी ने देवी से सम्पर्क साध के इसकी बात को कन्फर्म किया।

देवी के आदेश से पुजारी ने इसे एक फुट का त्रिशूल दिया जो उस मसाण की निशानी बताई।


इसने त्रिशूल अपने जैकेट में अंदर को तरफ पैंट में फंसा दिया और घर आने लगा।


रास्ते में इसने बकरे के पंजे खरीद लिए और बैग में डालकर चल पड़ा।


बस में बैठा और रात के 11-12 बजे के आसपास अपने इलाके में पहुँचा।


सुनसान इलाका था और ये अकेला ही पैदल चला था।


कुछ आगे जाने के बाद इसे जोर जोर घुँघरू खनकने की आवाज सुनाई देने लगी।

पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था।


इसको आभास हो गया था कि कुछ होने वाला है।

इसने खुद को तैयार कर लिया कि अब कुछ भी हो सकता है क्योंकि बैग में मांसाहार है।


थोड़ी देर बाद इसे बहुत बुरी बदबू आने लगी जैसे किसी के बाल जलाए जा रहे हो।

फिर इसे दोबारा घुँघरू बजने की आवाज सुनाई दी।

जब ये पीछे मुड़ा तो इसके प्राण पंखेरू उड़ने को हो गए।



इसके 10-12 फ़ीट दूर एक निर्वस्त्र औरत थी जो हवा में 3-4 फ़ीट ऊपर उड़ी हुई थी।


हाइट एक सामान्य औरत जितनी थी।


उसके स्तन लम्बे थे जो उसने दुपट्टे की तरह पीछे की तरफ ओढ़ दिए थे।

उसकी शक्ल बहुत डरावनी थी ऐसा लग रहा था खून पीकर आई है।

उसकी आंखे बिल्कुल वैसी ही थी जैसे उस बूढ़ी प्रेतनी की थी।

चेहरे के हावभाव से ऐसा लग रहा था कि बहुत ज्यादा गुस्से में है और अभी इसको खत्म कर देगी


उसके बाल ऐसे थे जैसे किसी औरत के बाल भेड़ बकरी के बाल काटने वाली कैंची से बहुत बेढंगे तरीके से काटे हों।


माथे पर सिन्दूर जैसी चीज लगी थी लेकिन ऐसे लगी थी जैसे लीपा पोती की है।


उसका शरीर किसी कंकाल की तरह कमजोर था।


उसके हाथ की उंगलियां और नाखून बहुत लम्बे थी और हाथ पीछे को तरफ ऐसा मुड़े थे जैसे किसी का हाथ मरोड़ के पीछे की तरफ कर दिया हो।


उसके पैर  उल्टे थे।

लेकिन वैसे नहीं जैसा हम सुनते हैं कि एड़ी आगे की तरफ और उंगलियां पीछे की तरफ होती हैं।


उसके पैर भी बिल्कुल वैसी ही मरोड़ी हुई अवस्था में थे जैसे हाथ थे।

उसके तलवे ऊपर की तरफ थे और ऊपर का हिस्सा जमीन को तरफ था।

पैरों के नाखून भी ऊपर की दिशा में मुड़े थे।


उस चुड़ैल का लगभग 80 % हुलिया इस फोटो में दी हुई चुड़ैल की तरह ही था।

फर्क सिर्फ इतना है कि असली चुड़ैल के पास कपड़े नहीं थे।


वो दोस्त उसको देखकर आधा डैड तो ऐसे ही हो गया था।

दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया।

मुँह से जायाबाया ही निकलने लगा, ना चीखा गया न चिल्लाया गया, ना तो स्पष्ट रूप से कोई शब्द निकला।

चुड़ैल ने चीखना शुरू किया तो उस दोस्त की खैर ना रही।


उसने जैसा ही मुड़कर भागना शुरू किया तो चुड़ैल ने उसे दबोच दिया और उसकी पीठ पर चढ़ गई।

चुड़ैल उसे नीचे दबाने का प्रयास करने लगी।

उस दोस्त को ऐसा लगा जैसे किसी ने 2 क्विंटल वजन पीठ पर रख दिया हो और वो खड़ा भी नहीं रह पाया।

घुटनों के बल बैठा गया।

वो चुड़ैल उसके बाल नोचने लगी और चिल्लाने लगी।

उस चुड़ैल ने उसको 3-4 सैकिण्ड में ही इतना झकझोर दिया कि वो घुटनों के साथ साथ कोहनियाँ भी जमीन पे टिका बैठा।

इससे उस चुड़ैल का वजन भी नहीं सम्भाला जा रहा था।

वो चुड़ैल इसके बैग से उन पँजों को निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिन बैग इसके कन्धों पर मजबूती से बन्धा था।

इतने में उस दोस्त को उस त्रिशूल की थोड़ी सी चुभन लगी।


इसने जैसे तैसे वो त्रिशूल निकाला और पीछे को तरफ़ चुड़ैल के पेट में दे मारा।


चुड़ैल उछलकर साईड में गिर गई और जोर जोर से चिल्लाने लगी।


इसने तुरन्त वो बैग उतार के फैंक दिया और त्रिशूल पकड़ कर 100 को स्पीड से घर पहुँच गया।


सारी घटना 1 मिनट से भी कम समय में घटित हो गई।


देवता के मन्दिर में जूतों समेत घुस गया दरवाजे को भी लात की मारी और सीधा देवता के रथ के पास चिपक कर बैठा गया।


घरवाले परेशान हो गए कि इसको क्या हुआ ?


अभी 2-3 मिनट भी नहीं हुए थे इसको घर पहुँचे कि इसके अन्दर उस त्रेखड़ू की सवारी आ गई और इसकी बॉडी बहुत बुरी तरह से वाइब्रेट करने लगी।


इसके अंदर जो शक्ति आई उसने अपना इंट्रोडक्शन दिया कि मैं वही मसाण हूँ जो इसके सपने में आया था।


इसने उसी सवारी की अवस्था वहाँ पर खुद ही गोबर से लिपाई पुताई की, त्रिशूल गाड़ा और पूजा पाठ कर के अपना स्थान स्थापित किया।

लड़का इस के बाद बेहोश हो गया।


जब होश में आया तो कहा कि इसे वही मसाण दिखा और नाभि से लेकर माथे तो ज्योतियाँ जलती हुई नजर आई।

उसके बाद उन ज्योतियों की एक लाइट बन गई और होश में आने से पहले तक लगातार दिखाई दी।


ऐसे इसके अनुभव हैं।

अगर इसके आसपास कोई भूतप्रेत हो तो इसे तुरन्त नजर आ जाता है।



इसकी कुण्डली के पॉइंट्स जो इसके भूत प्रेतों से सम्पर्क को स्पष्ट करते हैं।


जन्म - 31 जलाई 1996

समय - 06:49 बजे

स्थान - मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] कर्क लग्न की कुण्डली में लग्न में सूर्य साहसी बना रहा है औऱ देव ग्रह लग्न में होने से धार्मिक पूजा पाठ में रुचि है।

[2] तृतीय भाव में क्रूर ग्रह राहु है जो साहस दे रहा है।

[3] तृतीय भाव पर मंगल की चतुर्थ दृष्टी होने से पराक्रम में वृद्धि है।

इन 3 कारणों से ये भूत प्रेत आदि से लड़ने का साहस मिल गया।

भले ही चुड़ैल के हमले से डरा जरूर लेकिन साहस के साथ सामना कर के त्रिशूल उसके पेट मे घुसेड़ दिया।

इसके दिमाग ने ये काम किया कि उस बैग को फैंक और भाग जा।

[4] अष्टम भाव पर व्ययेश बुध की दृष्टि है जो गुप्त रहस्य खोलने का काम कर रही है।

[5] द्वादश का स्वामी अष्टम से सम्पर्क करे तो विपरीत परिस्थिति से लाभ मिलता है।

किसी गुप्त शक्ति का लाभ इसे सामान्य नहीं बल्कि विपरीत परिस्थिति के पश्चात मिला है।

[6] अष्टम भाव मृत्यु का होता है और शनि मृत्युकारक होता है।

इस कुण्डली में शनि अष्टम भाव का स्वामी होकर नवम भाव में है जो मृत्यु से सम्बंधित घटना को आध्यात्म और धार्मिकता से जोड़ेगा।

[7] शनि के साथ केतु का होना कष्टकारी योग तो बना रहा है,और राहु के साथ दृष्टि सम्बन्ध काफी अधिक प्रबलता से प्रेतात्माओं से सम्बन्ध दर्शा रहा है जिसके कारण ये प्रेतात्मा से परेशान हुआ।

जब भी कहीं भूत प्रेत पिशाच की बात आएगी तो राहु केतु और शनि उसमें इन्वॉल्व होंगे ही होंगे।

शनि मृत्यु सम्बन्धित अर्थात मरे हुए लोग।

राहु भटकती हुई आत्मा या रूह।

केतु कष्ट और भय देने वाला।


ये योग इसका इन प्रेतात्माओं से सम्पर्क बनाते हैं।

जो ग्रह इन शक्तियों से हमारा सम्पर्क करवाता है, वही हमें इनको झेलने की और सहन करने की हिम्मत देता है।


ये प्रेत साधना और शमशानी क्रियाओं में अधिक रुचि रखेगा।

क्योंकि इसके सम्पर्क अभी से प्रेतात्माओं से होने लगे हैं।


अभी इसको भूत प्रेत देखने की आदत पड़ गई है।




लेकिन जब भी ये उस चुड़ैल का किस्सा सुनाता है तो इसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।



क्या आप जानते थे कि घर मे बाँस और इन्सान का बाल क्यों नहीं जलाते?



चुड़ैल को इन्सान के जलते हुए बालों की बदबू बहुत पसन्द होती है।

जहाँ भी इन्सान के बाल जलाए जाते हैं, उसके जगह के आसपास चुड़ैल मण्डराना शुरू कर देती है।

इसलिए बुजुर्ग कहते थे कि बालों को जलाते नहीं हैं।


आजतक बाल जलाने की भी कोई फैक्ट्री नहीं है ना तो बालों को डिस्पोज किया जाता है।

इसकी वजह यही है कि जहाँ बाल जलाए जाते हैं वहाँ चुड़ैल आती है और सब बर्बाद करती है।


चुड़ैल साधना करने वाले तान्त्रिक साधना के समय उजाड़ स्थान में इन्सान के बाल जलाकर उसका हवन करते हैं।

जिसकी बदबू चुड़ैल को आकर्षित करती है।


बाँस की बारीक छड़ी के मनके बनाकर माला बनाई जाती है जिसपर मन्त्र जाप से चुड़ैल जल्दी आकर्षित होती है।


इन कारणों से बाँस की लकड़ी चूल्हे में नहीं जलाते हैं और इन्सान के बाल भी नहीं जलाए जाते हैं।

वैसे तो एक साधक ने ऐसा भी कहा है कि 7-8 किलो इन्सानी बाल अमावस की रात को सुनसान उजाड़ इलाके में 12 बजे जलाओ तो चुड़ैल प्रत्यक्ष आ जाती है।


वचनों में बांध लेती है, अगर वचन तोड़े तो जान से मार देती है।


हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले में बल्ह घाटी में खांदला में चुड़ैल वंशजों का गाँव है।

बहुत साल पहले उनके किसी बुजुर्ग ने चुड़ैल को पत्नी बनाकर रखा था।

उनके बच्चे भी हुए थे।

चुड़ैल की इतनी शर्त थी कि जब वो खाना बनाये तो कोई रसोई में ना जाये।


एक दिन उस कोई आदमी गलती से रसोई के दरवाजा खोलकर अंदर चला गया।

उसने देखा कि औरत ने अपनी टांगे चूल्हे में डालकर आग जलाई थी और स्तन की कड़छी बनाकर पतीले में तड़का लगा रही थी।


वो आदमी चिल्लाया और चुड़ैल गायब हो गई।

जिसकी वो पत्नी बनी थी वो भी मर गया।