Friday, March 22, 2019

#अपकीर्ति_योग


समाज में या घर में #अपमानित होने की स्थिति उत्पन्न हो जाना और स्वयं के ऊपर #लाँछन लगना बहुत दुःखदायक होता है।

कई बार ऐसा देखा गया है कि लोग #बिना_किसी_कसूर के ही #षड्यन्त्र के शिकार होकर अपकीर्ति के भागी हो जाते हैं।


और कभी कभी #स्वयं_की_गलती से भी अपकीर्ति हो जाती है।


ऐसी स्थिति तब आती है जब कुण्डली में #द्वितीय_भाव और #भावेश राहु, केतु के साथ #खराब_अवस्था में पड़ा हो।

#द्वितीय_भाव_में_ग्रहण_योग हो तो बहुत अधिक बदनामी का सामना करना पड़ता है।


ऐसा भी देखने में आया है कि जिनके द्वितीय भाव मे ग्रहण योग हो वो बहुत अधिक प्रयास करने के बाद भी जल्दी रिसपैक्ट हासिल नहीं कर पाते।


धनु लग्न की दो कुण्डलियों में ऐसा देखा कि एक पुरुष की कुण्डली में द्वितीय भाव में सूर्य ग्रहण योग बना था और दूसरी कुण्डली स्त्री की थी जिसमें नवम भाव में चन्द्र  ग्रहण योग बना था।


स्त्री पर लाँछन लगा कि यह लोगों पर #टोने_टोटके करती है।


कारण यह रहा कि धनु लग्न में अष्टम भाव का स्वामी चन्द्रमा गूढ़ विद्याओं का स्वामी था जो नवम भाव में केतु से पीड़ित होकर रहस्यात्मक खोज में वह स्त्री बदनाम हो गई क्योंकि वो #हस्तरेखा देखना सीख रही थी और आसपड़ोस में सब उसको जानते थे।

एक दिन किसी का हाथ पढ़ने की कोशिश कर रही थी और अगले दिन उस व्यक्ति का एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था।

इसी बात को लेकर पड़ोसियों ने बतंगड़ बना दिया कि उस स्त्री ने कोई टोटका किया था जिसकी वजह से एक्सीडेंट हुआ।


पुरूष पर लाँछन लगा कि इसकी #काली_जुबान है, #मनहूस है।

उसका नाम ही एरिया में काली जुबान रख दिया था।


भाग्य भाव का स्वामी सूर्य द्वितीय वाणी स्थान में राहु के साथ था, वाणी स्थान में ग्रहण योग था, राहु होने के कारण आकस्मिक वाक सत्य होने की संभावना होती है।

किसी लड़के को उसने बोल दिया कि तू एग्जाम में फेल होगा।


रिजल्ट आया तो लड़का सच मे फेल था।


इसी घटना को लेकर उस लड़के के माँ बाप ने उस बेचारे को बदनाम करना शुरू कर दिया कि इसकी वजह से हमारा बेटा फेल हुआ।



ऐसी बहुत सारी घटनाएँ होती हैं जो अपमानित करती हैं।


केन्द्र या त्रिकोण का स्वामी त्रिक भावों में चला जाये तो भी अपयश की संभावना होती है।


दो कुण्डलियों में ये देखा गया की सप्तम भाव का स्वामी अष्टम भाव में अष्टमेश के साथ था और जातक की पत्नी ने आत्महत्या की थी

अफवाह फैल गई कि इसी ने अपनी पत्नी को मारा है।

उससे पहले बच्चपन में उस जातक के दोस्तों के साथ लड़ाई होने पर उसके दोस्तों ने क्लास की एक लड़की के साथ कहा कि यह तुझे गन्दी गन्दी गालियाँ देता है।

और लड़की ने टीचर से कम्प्लेंट करके उसे पिटवा दिया था।


दूसरी कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया था।

उसकी माता की मृत्यु के पश्चात उस पर इस बात का दाग लगा कि इसने अपनी माता की हत्या कर दी थी।



भिन्न भिन्न स्थितियों में भिन्न भिन्न प्रकार के अपयश लगते हैं।



यह कुण्डली जिस जातक की है उसे प्रिडिक्शन की गई थी कि तुझ पर चोरी का इल्जाम लगेगा और म्यूचुल फण्ड में घाटा होगा।


जातक अपना बिजनस शुरू करना चाहता था, पैसे की शॉर्टेज थी, कुछ जुगाड़ कर रहा था।

घर में पैसा चोरी हो गया और इल्जाम इस पर आ गया कि पैसा इसी ने चुराया है।

म्युचुअल फंड में भी इसको घाटा ही हुआ था।


दोनों ही बातें सटीक गई।


कुण्डली के कुछ पॉइंट्स।


जन्म - 27 अगस्त 1987
समय - 2:02 AM


[1] मिथुन लग्न की कुण्डली में द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा चतुर्थ भाव में केतु के साथ ग्रहण योग बना रहा है।

[2] द्वितीय भाव का स्वामी चन्द्रमा का केतु के साथ योग धन हानि और धन की कमी दे रहा है।

[3] द्वितीय भाव पर किसी ग्रह की कोई दृष्टि नहीं है इसलिए धन की बचत नहीं है।

[4] द्वितीय भाव धन और इज्जत, प्रतिष्ठा का होता है जो खराब होने के कारण अपकीर्ति का कारण बना।

[5] चतुर्थ भाव मे ग्रहण योग होने तथा विच्छेदात्मक ग्रह केतु होने के कारण इस जातक को घर से अलग भी कर दिया गया है।

[6] द्वितीय भाव परिवार का भी होता है, तथा इस भाव का स्वामी चन्द्रमा खराब होने से परिवार का वियोग भी सहना पड़ा है।

Monday, March 18, 2019

#निःस्व_योग।


#द्वितीय_भाव का स्वामी #त्रिक_भावों में या #नीच राशि में हो अथवा #राहु_केतु के साथ हो तो यह योग बनता है।


मेरे पास ऐसे 3 केस आये हैं जिनमें लोगों को तान्त्रिकों ने लूटा है।

2 को #वशीकरण के चक्कर मे और तीसरे को टूटी शादि जोड़ने के चक्कर में।

तीनों को अलग अलग #बाबाओं ने #लूटा लेकिन लूटने की टेक्निक सेम ही थी।


#तीसरे बन्दे को जैसे लुटा है वो तो आप खुद ही देख लेना।



इस योग के बारे में शास्त्रों में कहा है -


सुवचनशून्यो विफल कुटुम्ब: कुजनसमाज कुदशनचक्षु:।
मतिसुतविद्याविभवहीनो रिपुहृतवित्त: प्रभवति निःसवे।


निःसव योग में पैदा हुआ जातक करुषवाक, विफल कुटुम्ब, दुर्जनों के साथ रहने वाला, नेत्र और दाँतो से कुरूप, बुद्धि, पुत्र, वैभव और विद्या से हीन होता है तथा शत्रु उसके धन को हरण कर लेते हैं।


शास्त्रों में जो परिभाषा और फल लिखी होती है वो 100% मैच हो जाये ऐसा भी नहीं कह सकते लेकिन 98% तक तो एक्यूरेट कह सकते हैं देश काल और पात्रता के अनुसार।


श्लोक में लिखा गया जी की नेत्र और दांत कुरूप होंगे, लेकिन जिज़ लड़की की यह कुण्डली है वो देखने मे सुंदर  थी और दांत भी अच्छे थे।


ये 2016 की बात है।

एक लड़की की कुण्डली देखी थी जो ट्रेनिंग के लिए घर से दूर हमारे एरिया में आई थी और रेंट पे रहती थी।

उससे जान पहचान हो गई थी और उसे पैसे का लॉस होने की प्रिडिक्शन की थी।

4-5 महीने बाद इसका मैसेज आया कि इसको कुछ प्रॉब्लम हो गई है पैसे से रिलेटिड।


इससे जब बात हुई तो इसने बताया कि ये ₹70000/- बर्बाद कर बैठी है एक #तान्त्रिक पर।

इसके मुँह से जब ₹70000/- सुना तो मैं सोच रहा था मेरी जेब में ₹500/- भी नहीं हैं और ये छोकरी इतनी बड़ी रकम कहाँ बर्बाद कर गई?


इसकी पूरी बात ये थी -

इसका एक बॉयफ्रैंड था, उसने इसको #धोखा दिया और दूसरी गर्लफ्रैंड बना ली।

इसका दिमाग खराब हो गया, इसने #अखबार से किसी #बंगाली_बाबा का नम्बर निकाला।

अखबार में लिखा था 101% वशीकरण की गैरन्टी, #सौतन_से_छुटकारा तुरन्त पाएं, 21 घण्टे में #दुश्मन_की_मौत का #तमाशा देखें।

#काले_इल्म के #माहिर बाबा बंगाली जी।

जो मेरे किये इल्म को काट दे, उसको #मुँहमाँगा_इनाम दूँगा।



बाबा बंगाली ने इसको कहा कि तेरा काम हो जायेगा, उसमें पूजा होगी 11 दिन की और फीस लगेगी।

काम ना हुआ तो पैसा वापस करूँगा।

लड़की ने जब फीस पूछी तो उसने कहा कि वो 11 दिन तक पूजा पाठ करेगा और इसका खर्च लड़की को देना होगा।

लड़की ने कहा कि इसने उस लड़की को तन्त्र से मरवाना है और लड़का इसके वश में होना चाहिए।

बाबा बोला ₹21000/- एक काम है तो दोनों कामों का ₹42000/- लगेगा।

लड़की ने कहा ठीक है।

लड़की के अकाउंट में उसके पिता ने ₹50000/- डाले थे जो उसकी समेस्टर फीस रहने का खर्चा स्टडी वगैरह के लिए थे।

उसने बंगाली को पेमेंट कर दी।

बाबा बंगाली इसको बोला पहले 11 दिन में उस लड़की को मारने की क्रिया करनी पड़ेगी उसके बाद लड़का वश में होगा।

10 दिन तक दूसरी लड़की को कोई असर नहीं हुआ।

बंगाली बोला थोड़ा और पैसा लगेगा, पूजा बढ़ानी पड़ेगी, कोई शक्ति उस लड़की को बचा रही है जिसको काटने के लिए 5 दिन का #कपाल_भैरो पाठ करना पड़ेगा और उसका खर्चा ₹11000/- होगा।

लड़की के दिमाग में सिर्फ मारना और वश करना ही घूम रहा था।

इसने अपनी सहेलियों से पैसे इकट्ठे किये और उसको दिए।

15 दिन बाद वो बाबा बोला कि अब वशीकरण का पाठ शुरू करना है, उसके बाद दोनों काम इक्कठे ही हो जाएंगे।

एक तरफ लड़की मरेगी और दूसरी तरफ लड़का वश में हो जाएगा।

इस लड़की को वो बाबा लटकाता रहा और बहकाता रहा।

कुछ दिन बाद वो बाबा बोला कि अब तुझे जगमोहिनी यन्त्र बनाकर भेजूँगा तब लड़का वश में होगा, जिसका खर्च ₹11000/- होगा।

इस लड़की ने दोबारा सहेलियों से पैसा लिया और बंगाली को दे दिए।


जब आखरी टाइम आ रहा था तो इस लड़की से उसने फिर पैसे मांगे कि अब #मारण_क्रिया के लिए #बकरे_की_बलि देनी पड़ेगी उसका खर्चा भी देना पड़ेगा 11 दिन बकरे को खिलाना पिलाना वगैरह होगा आखरी दिन 7 #अघोरियों को भोजन कराना है, तब क्रिया पूरी होगी।


लड़की से उसने फिर ₹11000/- माँगे और लड़की ने इस बार अपनी बहन से लिए।


जब इसका काम ना हुआ तो लड़की ने पूछा मेरा काम कब होगा?

बाबा फिर पैसे माँगने लगा।

अब लड़की किसी से पैसा नहीं माँग सकती थी, ना किसी को बता सकती थी कि क्या हुआ ?


इसने कहा कि मेरे पैसे वापस कर दो।

बाबा ने एक चवन्नी तक नहीं दी।

आप चैट के स्क्रीनशॉट में देख लीजिए।

लड़की कह रही है कि पैसे दे दो, मैंने लोगों से उधार लिए हैं।

बाबा बोलता है कि मैं आज पैसे डलवा दो, हमारी पूजा कम्प्लीट हो जाएगी।

अगर काम नहीं बना तो अपनी गाड़ी बेच कर पैसा वापस करूँगा।


इस लड़की को कोई पैसा नहीं दिया, उसने इसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया।

जिनसे उधार लिया था उन्होंने पैसा मांगना शुरू किया और लड़की डिप्रेशन में जाने लगी थी और ना तो पढ़ाई की समेस्ट फीस दी ना सहेलियों के पैसे लौटा पाई।

जब इसकी बहन ने पैसे मांगे तो इसके पास वो भी नहीं थे।

ये परेशान हो गई और मुझे फोन कर के बोली कि क्या आप पैसों की कुछ हैल्प कर सकते हो?

अगर मुझे पैसे ना मिले तो मैं सुसाईड करने की कंडीशन में पहुंच चुकी हूँ।


इतना सा सुनने के बाद मेरे को चक्कर आना शुरू हो गया था।


मैंने बहुत सोचने के बाद इसको कहा कि फिर हेराफेरी फ़िल्म की कहानी सुना देना कि कम्पनी वाले पैसा डबल करने को बोल के लूट गए, उनके नम्बर मैंने डर के मारे डिलीट कर दिए, मैं किसी दूसरे सिम कार्ड से फोन करती थी जो फेंक दिया है, अब उनका कोई कॉन्टेक्ट नहीं है।


ये मान भी गई।


इसकी बहन ने अपने पिता से बोला कि इसने पैसे लिए हैं और लौटा नहीं रही है।

इसने वही फिर हेराफेरी वाली राम कहानी सुना दी।

मजबूरन लड़की के पिता को उन सब के पैसे लौटाने पड़े।

लड़की बच तो गई लेकिन डिप्रेसड रही कई महीनों तक और इसका साइकेट्रिक ट्रीटमैंट चला था।


आप लड़की का भेजा हुआ स्क्रीनशॉट देखें ये व्हाट्सऐप का बहुत पुराना वर्जन है जिसमें मोबाइल नम्बर भी पूरा फीड नहीं है।

नम्बर +91-90015 9------ है।

ये राजस्थान का नम्बर था।




इसकी कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 1 सितम्बर 1997
जन्मसमय - 05:38 बजे सुबह मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] सिंह लग्न में धन भाव का स्वामी बुध लग्न में राहु के साथ है जो अपनी दुर्बुद्धि से धन का नाश दर्शा रहा है।

[2] धन भाव में दशम और तृतीय भाव का स्वामी शुक्र  नीच का है जो धन का नाश और धन के कारण बहन सहेलियों के साथ मनमुटाव दर्शा रहा है।

[3] पँचम भाव का स्वामी बृहस्पति छठे भाव में नीच है जो पढ़ाई की हानि और अल्पबुद्धि दर्शा रहा है, इसने अपना समेस्टर बर्बाद किया और काफी टेंशन झेली।

[4] सप्तम के केतु और सप्तमेश शनि के अष्टम में होने से लव अफेयर में धोखा हुआ।

[5] लग्न के सूर्य ने अहंकार बढ़ा दिया कि मेरा अपमान कर दिया मुझे छोड़ कर चला गया तो बदला लेकर रहूँगी चाहे कुछ भी हो जाये।

[6] तन्त्र मन्त्र छलावे के कारक ग्रह राहु ने आग में घी डाला और अष्टमस्थ शनि के प्रभाव से वशीकरण की बुद्धि लगी।

[7] राहु चन्द्रमा ने मानसिक तनाव दिया, सुसाइड की वृत्ति हो गई।

[8] नीच बृहस्पति और खराब चन्द्रमा के कारण साइकेट्रिक ट्रीटमेंट लेना पड़ा।

[9] बुद्धि का स्वामी बृहस्पति नीच, तर्क का स्वामी बुध राहु के कारण जड़त्व योग में और मन का कारक चन्द्रमा खराब होने से एक बार अड़ गई तो अड़ गई।

[10] लग्न का सूर्य और अहंकारी, बुध राहु का जड़त्व योग इसे जिद्दी और किसी की बात ना सुनने वाला बना रहा है जिसके कारण ये लड़की किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गई।

[11] धन हानि के सारे जुगाड़ इस निःस्व योग के कारण बने की इसका पैसा हर कोई ऐसा गैरा ले गया, परिवार में इज्जत कम हो गई।



दूसरे लड़के को शादी जोड़ने के नाम पर ठगा गया इसी प्रोसीजर के जरिये।


तीसरे बन्दे को तो ऐसा लूटा कि जिन्दगी भर बाबा का भूत नहीं उतरेगा सिर से।


लड़का मिडल क्लास का था, उसके ₹30000/- लूटे गए।


उसके पड़ोस में कोई शादीशुदा औरत थी, देखने में अच्छी थी, और वो उसपर वशीकरण कराने के लिए फोन किया।


बाबा बोला - ₹21000/- सारी क्रिया मैं करूँगा, क्रिया के लिए उसका वो नम्बर देना जिस पे वो व्हाट्स चलाती है।

नम्बर पर क्रिया मैं कर दूँगा, उसी व्हाट्सएप से तेरे पास आएगी वो।

तेरे को सिर्फ एक मन्त्र दूँगा।

तूने हथेली पर उस औरत का नाम लिखना है और उस औरत के घर की तरफ मुँह के कर के अपने कमरे में बैठ के मन्त्र जपना है।

मन्त्र जपते जपते जब तेरे हाथ से वो लिखा नाम गायब हो जाए तो समझ लेना वो वश में है।

फिर वो तुझे व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करेगी और फोन पर अपना जलवा दिखायेगी।

वही शुरुआत है, उसके साथ फिर जो चाहे करना वो तेरी ही हो जाएगी।


उस बन्दे ने फुदक फुदक कर पैसे तान्त्रिक को दिए और पड़ोस की उस औरत का नम्बर दे दिया।

तान्त्रिक ने कहा शाम को क्रिया कर दूँगा, शाम को फोन करना।


दिन को उस बन्दे ने उस औरत के पता नहीं क्या क्या ख्वाब देख लिए खुश होकर।


जब शाम को उस बन्दे ने फोन किया तो तान्त्रिक ने जो बोला उसे सुनकर उसकी खाट बाट उड़ गई।


तान्त्रिक ने बोला - जो नम्बर तुमने दिया था मैंने उसपर फोन किया था और उस औरत से बात की।

उसको रॉन्ग नम्बर बोल दिया।

अब मेरे अकाउंट में ₹10000/- डाल नहीं तो उस औरत को फोन कर के उसके पति का नम्बर ले लूँगा और उसको बता दूँगा की तूने उस औरत पर वशीकरण करवाने को फोन किया है।


बस यही सुनना था कि लड़का ब्लडप्रेशर लो होने की वजह से चक्कर खाकर गिर पड़ा था।

थोड़ी देर बाद जब लड़का थोड़ा नॉर्मल हो गया तो उसने उस तान्त्रिक को फोन किया और बहुत मिन्नतें की।

तान्त्रिक ने उससे ₹10000/- और वसूल कर ही लिए।


[ अखबार पर ऐसे विज्ञापनों से दूर रहें। ]

Sunday, March 17, 2019

प्रवज्या योग, ऑपरेशन का योग, दुर्घटना का योग।


प्रवज्या योग।

यदि 4 या 4 से अधिक ग्रह 1 भाव मे आएं तो प्रवज्या योग बनता है।

ऐसा जातक धार्मिक स्वभाव वाला होता है, साधुओं की तरह वृति होती है तथा गृहस्थ में भी साधुओं की तरह नियमबद्ध होकर रहता है।

यदि यह योग त्रिक भावों में बने तो सन्यास लेने को सम्भावना अधिक होती है।


ऑपरेशन का योग - चीरा लगना केतु के कारण मुख्य रूप से होता है, मंगल केतु भी चोट या चीरा लगने के कारण होते हैं।

शनि+केतु+राहु से ट्यूमर बनता है।


अष्टम भाव में ग्रह दुर्घटना के कारण होते हैं।


इस कुण्डली वाली स्त्री भी एक साध्वी की तरह स्वभाव और रहन सहन वाली है।

पति ने दूसरी शादि की है।

हर महीने 11 गरीब लड़कियों की फीस भरती हैं।

संगीत का ज्ञान है।

सरकारी टीचर हैं और कई कैबिनेट मिनिस्टर्स द्वारा नेशनल लेवल के बैस्ट टीचर के अवार्ड से सम्मानित है।


मुँह के 3-4 मेजर ऑपरेशन सिस्ट बनने के कारण हो चुके हैं।

सिर की सर्जरी भी हुई है

गर्भाशय में ट्यूमर हुआ था और एक्सीडेंट भी हुआ है।



इस कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 30 दिसम्बर 1961 समय - 06:00 बजे जबलपुर।


[1]  धनु लग्न में 4 ग्रह सूर्य+शुक्र+बुध+मंगल प्रवज्या योग बना रहे हैं।

जातिका धार्मिक स्वभाव की है क्योंकि भाग्य का स्वामी सूर्य धनु लग्न में सात्विक विचार और धार्मिक स्वभाव दे रहा है।

[2] मंगल, बुध और शुक्र अस्त हैं जिसके कारण सूर्य का धार्मिक प्रभाव ज्यादा होने के कारण गृहस्थ में भी धार्मिक तरीके से रहती हैं।

यदि मंगल, शुक्र या बुध अस्त ना होते तो स्वभाव के बदलाव आ सकता था और ब्रह्मज्ञान आदि की रुचि ना होकर तन्त्र मन्त्र को रुचि अधिक हो सकती थी।

सूर्य आत्मा कारक ग्रह है इसलिए खुद को समझना और सात्विक तरीके से जीने का स्वभाव बना है।


[3] सप्तम भाव का स्वामी बुध अस्त है जिसके कारण पति का अधिक सुख नहीं मिला है और पति कारक बृहस्पति द्वितीय भाव मे केतु राहु शनि से पीड़ित है और बृहस्पति+केतु का गुरुचाण्डाल योग बना है जिसके कारण पति का सुख कम है।

[4] लग्न में बुध दिग्बली हो जाता है और सप्तमेश दिग्बली होने के कारण पति का सुख तो होना चाहिए था लेकिन अस्त होने के कारण पति जीवित तो है लेकिन सौतन भी है।

[5] शुक्र षष्टम भाव का स्वामी होकर अस्त है तथा मंगल द्वादश भाव का स्वामी होकर अस्त है तथा दोनों की संयुक्त दृष्टि सप्तम भाव पर होने से भी पति का सुख कम हो गया है।

[6] द्वितीय भाव मे केतु+शनि ट्यूमर और सिस्ट बनने के कारण हैं।

[7] द्वितीय भाव गले का और वाणी का होता है इसलिए द्वितीय भाव में इन शनि+केतु के कारण सिस्ट बना और 3-4 मेजर ऑपरेशन हुए।

[8] लग्न का स्वामी बृहस्पति केतु से पीड़ित है और अष्टम में बैठे राहु से दृष्टि सम्बन्ध है जिसके कारण सिर की सर्जरी भी हुई क्योंकि लग्न का स्वामी हमारे मुँह और सिर से सम्बंधित होता है।

[9] अष्टम भाव में बैठा राहु एक्सिडेंट का कारण है जिसके कारण एक्सिडेंट हुआ।

[10] शनि केतु और बृहस्पति द्वितीय भाव में है लेकिन यूटेराइन ट्यूमर बना है जबकि पँचम भाव पर कोई प्रभाव नहीं है।

इसका कारण शनि+केतु की युति चन्द्रलग्न से पँचम भाव में है और पँचम भाव लिवर, गर्भाशय का होता है तथा लग्न से अष्टम भाव उदर से नीचे वाले भाग का होता है जिस पर शनि+केतु की दृष्टि है और अष्टम भाव में राहु का होना है।

[11] नवम, दशम, एकादश भाव का स्वामी लग्न में होना बहुत भाग्यशाली बना रहा है जिसके कारण राज समाज में सम्मान मिला है और राष्ट्रीय स्तर के बैस्ट टीचर अवॉर्ड मिले हैं।

Saturday, March 16, 2019

------------- कर्णपिशाचिनी ---------------

--------जिन्दगी का सत्यानास--------


तन्त्र मन्त्र सीखने की इच्छा रखने वालों को ये कर्णपिशाचिनी साधना सबसे ज्यादा आकर्षित करती है।


क्योंकि इसको त्रिकालदर्शी साधना माना जाता है।


लेकिन पिशाच कभी त्रिकालदर्शी नहीं होते।


इस साधना वाला आपका भविष्य बता देगा, आपकी एक एक गुप्त बात को भी आपके सामने खोल ले रखेगा।


आपके मन की बात भी जान लेगा।


आप जो भी सोचेंगे वो उसे सुनाई देता रहेगा।



इसका कारण ये कर्णपिशाचिनी है जो कि आपके दिमाग से सारा डाटा चुराती है और जिसने ये साधना की होती है, उसके कान में बोलती है।



कर्णपिशाचिनी, भूत, प्रेत, चुड़ैल, यक्षिणी, भैरो, मसाण, नाहरसिंह, डाकिनी, वेताल आदि को साधना ज्यादातर तान्त्रिकों के आकर्षण का केन्द्र होती है।


ये साधनाएं फायदे कम और नुक्सान ज्यादा करती हैं।


इन साधनाओं के जरिये आप लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बन जाते हैं।


इनके जरिए जादू के खेल दिखाना।

दूसरों को वश में करके मनचाहा काम करवाना।

दुश्मन को पागल करना।

भूत प्रेत लगा देना या मार देना।


ऐसे ऊटपटांग काम बहुत जल्दी आकर्षित करते हैं।



ज्यादा डिटेल में इधर लिखना पॉसिबल नहीं है।



मेन टॉपिक इधर कर्णपिशाचिनी का है।



इस 11 दिन की साधना को करने पर पिशाचनी आपके सामने आएगी और 3 रूप में से किसी एक रूप में आपके साथ रहेगी।

माँ, बहन या पत्नी में से किसी एक का रूप आपको इसके लिए निश्चित करना पड़ेगा।


उसके बाद जो भी रूप आप बताएंगे, उस रूप में ये अदृश्य हो के आप के साथ रहेगी।

लेकिन माँ बहन या पत्नी में से जो रूप आप उसे बताएँगे, उस रिश्ते को ये आपकी जिन्दगी से खत्म कर देगी।


आपकी माँ बहन या पत्नी की मृत्यु हो जाएगी या आप इनसे अलग हो जाएंगे।


जब इस पिशाचनी को माँ या बहन का रूप बताया जाता है तो ये अच्छी तरह से काम नहीं करती है।

लेकिन जब पत्नी का रूप बताया जाता है तो बहुत ही प्रचण्ड तरीके से काम करती है।


इसलिए ज्यादातर तान्त्रिक इसे पत्नी का ही रूप देते हैं।


वो आपसे 3 वचन माँगेगी।

1] आप पिशाचनी के बारे में किसी को नहीं बताओगे।

2] उससे कभी भी पीछा नहीं छुड़ाओगे।

3] उसकी इच्छा के अनुसार उसे सैक्सुअली सैटिस्फाइड भी करोगे।


अगर एक वचन भी तोड़ा तो ये आपको उसी वक़्त मार देगी।


पहले तो ये आपकी पत्नी को ही आपसे अलग करेगी।


आपकी और आपकी पत्नी की हमेशा लड़ाई होगी क्योंकि आपको उस पिशाचनी की बात ही माननी पड़ेगी।


आपकी पत्नी से अलग करने के लिए ये पिशाचिनी आपके कान में अपनी मर्जी की गलत बात बोलेगी और लड़ाई होगी।


आपकी पत्नी के साथ आप चाहते हुए भी नहीं रह सकते।


अगर आप अपनी पत्नी के पास ज्यादा टाइम तक रहे तो आप के कान फाड़ने लायक आवाज पैदा करके चिल्लाएगी।

आप खुद ही उसके गुलाम बन जाएंगे।


पिशाचिनी आपके कान में दूसरों की हर जानकारी बताती रहेगी।


हवा ही ध्वनि के स्थानांतरण का माध्यम है।


आपके कान के पास हवा का बहाव ही ध्वनि उत्पन करेगा और आपको बिल्कुल वैसा ही सुनाई देगा जैसा कि मोबाईल से सुनते हैं।



आप जो पूछेंगे ये वो सब बताएगी।


आपको हर बात बताएगी, आप अगर अनपढ़ भी हैं तो भी फर्राटे से दुनियाँ की कोई भी भाषा बोल समझ सकते हैं क्योंकि ये पिशाचिनी आपके कान में दूसरे का मनोभाव पढ़ के आपके द्वारा समझी जाने वाली भाषा में बोलेगी और सामने वाले के द्वारा समझी जाने वाले भाषा के शब्द आपके कान में बोल के उसकी भाषा में उत्तर बोलना बताएगी।


आपकी पर्सनल से पर्सनल बात इस साधना वाला बिना आपसे पूछे बता देगा।



लेकिन जिसने भी ये साधना की होती है वो इसका प्रदर्शन नहीं कर सकता क्योंकि लोग उसपे रिसर्च करने आ जाएंगे और गलती से उसने कुछ बताना चाहा तो पिशाचिनी उसे बताने से पहले ही मार देगी।


जान सबको प्यारी होती है इसलिए कंट्रोल ही रखा जाता है।


अब बात आती है कि ये पिशाचिनी त्रिकालदर्शी है।


बिल्कुल ही गलत और झूठ बात है।


उदाहरण [1]


कर्ण पिशाचिनी वाला साधक ये बता देगा कि अगले महीने इलैक्शन में जीत या हार किसकी और कितने वोटों से होगी।


बात 100% सही होगी लेकिन ये भविष्य देखना या त्रिकालदर्शी होना नहीं है।


सिद्धान्त- पिशाचिनी सब लोगों के दिमाग पढ़ लेगी की कौन किसको वोट देगा ?


वही बात पिशाचिनी अपने साधक को बता देगी और वो साधारण से गणित से जमा घटाव करके भविष्यवाणी कर देगा।


इस बात से वो दुनियाँ की नजर में त्रिकालदर्शी बन्दा बन जायेगा।


उदाहरण [2]


कर्णपिशाचिनी वाला कुण्डली से भी भविष्यवाणी करेगा।

साधक को वो ज्योतिष का ज्ञान भी देगी और वो साधारण ज्योतिषी से ज्यादा अच्छे उदाहरण देगा और आपकी गुप्त से गुप्त बात को बता देगा।


पिशाचिनी पहले उसकी सारी बीती हुई बातें उसके दिमाग से चुरा के कान में 100% सही बोलेगी।

लेकिन भविष्य की कोई गैरन्टी नहीं होगी।

क्योंकि पिशाचिनी किसी अच्छे ज्योतिषी के दिमाग से ज्योतिष के सिद्धान्त और उसके अनुभव से बनी थ्योरी तान्त्रिक के कान में बोलेगी।

तान्त्रिक के सही बोलने की गैरन्टी नहीं है।


क्योंकि ये भविष्य बताती ही नहीं।


ये इस बात को बता देगी जो आपने आज डिसाईड की है और कल आप उस काम को डेफिनेटली करने वाले ही होंगे।



ये साधना आपको कुछ सालों के लिए बहुत जाना माना तान्त्रिक या महात्मा बना के रखेगी लेकिन जैसे जैसे बुढ़ापा आएगा, ये आपको बावला कर देगी।


आपकी सारी फैमिली को परेशान कर देगी।



अब बात आती है कि इस ना दिखने वाली पिशाचिनी को कोई सैक्सुअली सैटिस्फाइड कैसे कर सकता है ?



ये पिशाचिनी किसी भी चरित्रहीन औरत को आपके सामने खड़ा कर देगी या आपको ही उस औरत की तरफ धकेल देगी।


अपने सैटिस्फैक्शन के लिए ये पिशाचिनी उस औरत के साथ शारिरिक सम्बन्धों की स्थिति भी बनवाएगी और उस चरित्रहीन औरत में घुस के खुद को आपसे सैटिस्फाइड भी करवाएगी।



पत्नी से आप अलग हो चुके होंगे और आपको शारीरिक सम्बन्धों का जुगाड़ मिलता रहेगा और ये पिशाचिनी आपके काम करती रहेगी।

25-30 साल तो आप मजे कर लेंगे।


लेकिन जब बुढ़ापा आने पर आपमें सैक्सुअल एबिलिटी नहीं रहेगी, तो आप मुश्किल में पड़ जाएंगे।



ये आपको पागल कर देगी।


आपके परिवार से आपको अलग कर देगी।


आपके बच्चों के खिलाफ आपको भड़का के उनसे लड़वा देगी।


इसी के प्रभाव से बच्चे आत्महत्या भी कर सकते हैं क्योंकि जब इस पिशाचिनी का गुलाम बन के एक बाप अपने बच्चे को परेशान करेगा तो बच्चे परेशान हो के आत्महत्या भी कर देंगे।


ये आपके बच्चों के बारे में आपको कभी सही बात नहीं बताएगी।


उल्ट पुलट बोल के आपकी और आपके बच्चों की जिन्दगी खराब कर देगी।



जब आप किसी भी लायक नहीं रहेंगे तो ये आपको मार देगी।


कई साधक दूसरों बहला फुसलाकर कर ये साधना दूसरों को करवा देते हैं ताकि वो खुद इस पिशाचिनी से पीछा छुड़ा सकें।


लेकिन पिशाचिनी दोनों को ही नहीं छोड़ती है।



मेरा एक दोस्त था जिसने इस साधना को करने की कोशिश की थी।


उसने मुझसे इस के बारे में पूछा था तो मैंने मना किया था कि मत कर।


लेकिन वो शुरू हो गया और 4-5 दिन बाद मुझे मैसेज कर के बोला कि मेरे कान में सांप की फुसकारी जैसी आवाजें आ रही हैं और थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है।


वो डर गया था।



मैंने कहा तो शुरू ही क्यों की थी?


उसने कहा कि मैं छोड़ दूँगा इस साधना को।


उसने सारी रात हनुमान चालीसा पढ़ी।


वो तो बच गया लेकिन 2-3 दिन बाद उसके पिता जी का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गए।


इन शक्तियों को छेड़ना कोई मजाक नहीं होता है।



मैंने खुद सन 2012 में इस पिशाचिनी का एक सपने दिखाने वाला मन्त्र प्रयोग किया था और पिशाचिनी मेरे सपने आई थी।

सपने में वो मुझे 4-5 सैकिण्ड के लिए ही दिखी और दूसरे दृश्य दिखना शुरू होने लगे और कुछ आवाजें सुनाई दी।

सपने में मैंने देखा कि एक सरकारी स्कूल में खेलकूद हो रही है और ग्राउण्ड में बैडमिंटन और वॉलीबॉल की फिल्ड बनी है और मैं लड़कों को खेलते हुए देख रहा हूँ।



दूसरे दिन स्कूल में सर जी ने बोला कि टूर्नामैंट में जाने के लिए तैयार हो जाओ।

मैं कब्बड्डी में सिलैक्ट हुआ।


जब गागल स्कूल में पहुँचे तो वही मैदान, वही स्कूल और वही फील्ड बनी थी।



मैं हैरान हो गया था।


पिशाचिनी ने मेरा भविष्य नहीं दिखाया।

बल्कि वो बात बताई जो कि डेफिनेटली होनी थी क्योंकि मैं +2 में था और जाहिर सी बात है कि कब्बडी में बड़े बच्चे ही सिलैक्ट होते हैं और टूर्नामैंट कम से कम 1 महीने पहले ही कहीं न कहीं डिस्कस कर लिए गए होंगे।




उस पिशाचिनी को जब मैंने सपने में बुलाया था तो मेरे दोनों कानों में फर्फ़राहट महसूस हुई थी।

और तब तक होती रही जब तक मन्त्र जप पूरा नहीं हो गया।


दूसरे दिन मुझे बहुत बुखार आया था और शरीर बहुत भारी भारी हो गया था।

बार बार उल्टी आ रही थी।


लेकिन मैं 1-2 दिन में नॉर्मल हो गया।



ये बात मैं पूरे प्रूफ के साथ बोल रहा हूँ।


मैंने खुद इसकी साधना करने वाले साधकों के जीवन को खराब परिस्थितियों में देखा है, उनके परिवार बर्बाद हैं, घर से बीमारियां खत्म नहीं होती।

बच्चों के भविष्य खराब हुए हैं।

इस प्रकार की साधना कर के कोई अपनी और अपने परिवार की जिन्दगी खराब मत कर देना।


थैंक्यू।
दुर्भाग्य योग -


भाग्य का स्वामी त्रिक भावों में या भाग्य स्थान में ग्रहण या भाग्य का स्वामी राहु केतु युक्त हो तो दुर्भाग्य योग बनता है।


ऐसे योग वाले का भाग्य उसका साथ नहीं देता।

उसकी जिन्दगी बिल्कुल ऐसी होती है जैसे 99% काम होने पर सारे कोई धरे पर पानी फिर जाना।


ऐसा किसी भी फील्ड में हो सकता है जिसे दुर्भाग्य कहा जा सकता है।


लेकिन दुर्भाग्य योग वालों में एक बात कॉमन होगी कि भगवान और अध्यात्म से सम्बंधित मुश्किलें उन्हें अवश्य आएंगी।

तन्त्र साधनाओं में असफलता मिलेगी और नुक्सान होगा या किसी भूत प्रेत पिशाच को साधना का आकर्षण ज्यादा रहेगा और ऐसी साधना कर के खुद की इन नकारात्मक शक्तियों के जाल में फँसा देते हैं।


जिसकी ये कुण्डली है उस व्यक्ति ने 3 ऐसी ही साधनाओं को करना शुरू किया और हर बार नुकसान हुआ।


पहली बार भूत की साधना शुरू की थी और बीच में छोड़ दी।

काफी बीमार हुआ था और मरने से बचा।


दूसरी बार पीर साधना करना शुरू की थी और कुछ डरावने अनुभवों के कारण वो भी बीच में छोड़ी।


इसने सुनाया था कि साधना छोड़ने के बाद इसकी आत्मा ही बॉडी से निकल गई थी और डैड बॉडी की तरह पड़ा था।


ये अपनी पूरी बॉडी को ऐसे देख रहा था जैसे कोई अपने जुड़वा भाई को सोया हुआ देख रहा था।

इसकी आत्मा ने अपनी बॉडी में घुसने की कोशिश को लेकिन जा ही नहीं पाया।

कह रहा था कि बहुत रोया चिल्लाया लेकिन कुछ नहीं हुआ।


बहुत मुश्किल से आत्मा शरीर मे घुसी।


ये होश के आने के बाद कई दिन तके डिप्रेशन में रहा।


फेसबुक पे जनवरी 2014 में मिला था।

तीसरी बार मेरे से कर्णपिशाचिनी के बारे में पूछा था कि इस साधना को कैसे करते हैं?

इसको दूसरों के मन की बात जानने का शौक था।

मैंने कहा कि ये साधनाएं ठीक नहीं होती हैं क्यों खुद को परेशानी में डालना।

मैंने इसको साधना का तरीका नहीं बताया।

इसको बहुत समझाया लेकिन इसने नहीं सुनी।

आधा अधूरा ज्ञान कहीं से इक्कठा किया और शुरू हो गया।


21 दिन को साधना थी और 7 दिन हो चुके थे शुरू किए हुए।


तब मेरे को मैसेज किया कि इसको डरावने अनुभव हो रहे हैं।

मैंने इसको बोल दिया कि ये पिशाचिनी तेरे को तेरी माँ बहन या पत्नी से अलग कर देगी और मरने से पहले तेरे को अपना मल खिलाएगी  और मुँह पे ही मल करेगी।

ये डर गया, लेकिन बात बिल्कुल सच थी।

बोला कि अब साधना छोड़ देगा।

इसने बीच में साधना छोड़ दी।

जब इसका साधना का समय हुआ तो ये नहीं गया।

मैसेज कर के बोला कान में आवाजें आ रही हैं, सांप की फुसकारी को तरह आवाजें शाम के समय शुरू हो चुकी थी जो 2 घण्टे से इसको लगातार सुनाई दे रही हैं।


जनवरी 2014 में इसने वो साधना शुरू की थी और 27 जनवरी को 7-8 दिन बाद छोड़ दी।


लेकिन इसने फिर से पैशाचिक शक्ति को छेड़ा था।


शक्ति क्रोधित हुई और 5-6 दिन बाद फरवरी में इसके पिता की मृत्यु एक एक्सीडेंट में हो गई।


खुद भी मरने से बचा उस एक्सीडेंट में।


1 मार्च 2014 को इसका मैसेज आया और इसने बताया कि पिता की मृत्यु हो गई।

जब भी इसने साधना शुरू की तो नुक्सान ही हुआ।

ये इसका दुर्भाग्य है।


कुण्डली से इसके साथ ये सारी घटनाएं स्पष्ट होती हैं।


जन्म 26 नवम्बर 1990 समय 17:20 बजे।



ये पॉइंट्स इसकी रुचि इन गूढ़ साधनाओं को तरफ आकर्षित होने और नुक्सान के कारण हैं।


[1] अष्टम भाव गूढ़ रहस्यों का होता है और वृषभ लग्न में अष्टम भाव का स्वामी बृहस्पति कर्क राशि में केतु के साथ है और नवम भाव में राहु है जिसके कारण तन्त्र में इसकी बहुत रुचि है लेकिन पैशाचिक रुचि अधिक है।

[2] अष्टम भाव में बैठे भाग्येश शनि की तीसरी दृष्टि चन्द्रमा पर और दसवीं दृष्टि पँचम भाव पर है जो मन बुद्धि को भाग्य, धर्म, आध्यात्म और तन्त्र मन के प्रति आकर्षित होने वाला बनाती है

[3] द्वादश भाव के स्वामी मंगल की आठवीं दृष्टि अष्टम भाव पर काफी गुप्त रहस्यों का खुलना बताती है।

[4] भाग्येश और दशमेश शनि का अष्टम भाव में होना भी इसकी गूढ़ विद्याओं में अधिक रुचि देता है।

[5] भाग्य मृत्यु का संकट लाएगा और पिता का संकट भी आएगा।

[6] इसकी साधना हर बार बीच मे छूटी और भाग्य की हानि हर बार हुई।

हर बार कोई ना कोई मृत्युतुल्य संकट आया।

[7] जो इसकी कर्णपिशाचिनी साधना की शुरू हुई और बीच मे छोड़ने पर इसके पिता की मृत्यु एक दुर्घटना में हुई वो शनि का कारण है।


जब भी इसने ऐसी साधना की तो इसको हर बार जान का संकट आया है और अंत मे जब पिता की मृत्यु हो गई तब कर के अक्ल ठिकाने बैठी।

लेकिन दिमाग फिर भी घूम फिर के इन्हीं साधनाओं में भटका है।


[8] एक साधना में इसको सफलता मिली थी लेकिन उस शक्ति के नियमों से नहीं रहा और वो शक्ति इसकी पत्नी का गर्भनष्ट कर के और इसको मार पीट के छोड़कर चली गई।

जिसका कारण अष्टम भाव में बैठे शनि की दसवीं दृष्टि पँचम भाव पर है।

[9] कुण्डली में बृहस्पति और चन्द्रमा का षडाष्टक होने से बना शकट योग इसके जीवन को अधिक सफल नहीं बनाता है।

[10] शनि का अष्टम भाव मे होना मृत्युकारक प्रभाव लेना इसके लिए काफी परेशानी दायक है।

जहां भी शनि की दृष्टि गई वहाँ पर भाग्य के कारण हानि हुई और स्वयं को भी मृत्युतुल्य कष्ट मिले।

इन असफलताओं को इसका दुर्भाग्य कहा जा सकता है

Sunday, March 10, 2019

छाती, फेफड़े, हृदय, साँस के रोग।


जब भी चतुर्थ भाव के स्वामी की स्थिति खराब हो, चतुर्थ भाव में पाप ग्रह हो तो इस प्रकार के रोग लगते हैं।

हार्टअटैक वालों में सूर्य सबसे ज्यादा खराब मिलेगा क्योंकि सूर्य हृदय का कारक है।

हृदय रोग में (I.S.T.) इनएप्रोप्रियेट साइनस टेककोर्डिया नाम की बीमारी में चन्द्रमा की स्थिति खराब देखी गई है।

इसमें धड़कन की गति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।


सिंह लग्न की एक कुण्डली ऐसी देखी जिसमें चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल पंचम भाव में बिल्कुल सही था लेकिन चन्द्रमा व्यय भाव का स्वामी होकर एकादश भाव में था।

सप्तम भाव में राहु था और जातक अविवाहित था।


जातक को आईएसटी की बीमारी थी।

चन्द्रमा केमद्रुम में था।

घबराहट होती थी और धड़कन बढ़ जाती थी।


घबराहट का कारण ये थी कि लोगों का लाखों रुपया मारा था ठगी से।

जब कोई फोन कर के धमका देता तो सीधे CCU में पहुंचता था।

मेरे सामने ही 3 बार ऐसा हुआ है उस जातक को।

लोग धमकी देते हैं कि जहाँ मिलेगा वहीं मार देंगे।

चन्द्रमा मन का कारक होता है और कालपुरुष राशियों में चन्द्रमा चतुर्थ भाव अर्थात छाती के भाग का स्वामी बनता है।

केमद्रुम का चन्द्रमा मानसिक रोग देता है, मन में भय पैदा हुआ तो घबराहट हुई।

जब घबराहट बढ़ गई तो धड़कन अपने आप बढ़ गई।

इसी तरह ये एक रोग बन गया।

बेईमानी और हरामखोरी का हजम नहीं होता।


केतु से ग्रस्त चन्द्रमा वाले घबराहट के रोगी देखे गए हैं क्योंकि केतु भय कारक ग्रह है।

राहु केतु से ग्रस्त सूर्य हार्टअटैक देता है।

सूर्य एक विस्फोटक ग्रह है और केतु भी मंगल का स्वभाव रखने वाला विस्फोटक ग्रह है।

दोनों शत्रु जब इक्कठे होंगे तो विस्फोट ही होगा और हृदयाघात का कारण बनेंगे।


चन्द्रमा जल तत्व ग्रह है, जब पानी में विस्फोट होगा तो कम्पन पैदा होगा, तरंगे निकलेंगी।

हृदय की धड़कन बढ़ेगी, घबराहट की तरंगे उठेंगी।


एक जातक के हृदय में छेद था।

उसकी कुण्डली के शनि केतु चतुर्थ भाव में थे।

केतु के कारण हार्ट में छेद कह सकते हैं क्योंकि वेध का कारक केतु है।


चतुर्थ भाव में अलग अलग ग्रह अलग अलग तरीके से रोग देगा।


सूर्य, मंगल विस्फोटक ग्रह हैं जो दुष्प्रभाव में आने से हृदयाघात देंगे।

शनि एक धीमी गति वाला ग्रह तथा ठण्डा ग्रह है,

चतुर्थ भाव में शनि के कारण कफ के रोग, छाती जाम हो जाना, अस्थमा के रोग लगेंगे और ऐसा जातक मैंने इन्हेलर यूज करते देखा है।

पहले उस जातक को टीबी की बीमारी भी हुई थी।


वृश्चिक लग्न में अष्टम भाव के शनि वाले जातक को भी टीबी की बीमारी लगी हुई देखी है।

वृश्चिक लग्न में चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम में गया है तो चतुर्थ भाव का फल बिगड़ गया और शनि के कारण टीबी की बीमारी लगी।


चतुर्थ भाव में बृहस्पति के साथ केतु कारण कफ की समस्या देखी गई है

एक जातक के सूर्य केतु चतुर्थ भाव में थे और बाइक से गिरने पर जातक की पसलियां टूटी थी।

सूर्य हड्डी का कारक है और केतु चोट का कारक है और चतुर्थ भाव में होने के कारण पसलियाँ टूटी।


मीन लग्न में बुध के साथ केतु था जिसपे शनि की दृष्टि थी, उस महिला को स्तन कैन्सर हुआ था, स्तन में गांठे बनी थी।

अलग अलग ग्रह अलग अलग समस्या उत्पन्न करेगा।


एक बात और भी देखी गई है कि जिनकी शादि नहीं हो पाती है और उम्र काफी अधिक हो जाती है, वो भी हृदय रोगी होते हैं।

ब्रह्मचारी पुरुष और स्त्रियाँ हृदय के रोग से ग्रसित मिलेंगे।


अब आप समझेंगे कि हृदय रोग का शादि से क्या लेना देना है ?

अकेला पुरुष या स्त्री अपनी फीलिंग्स शेयर नहीं कर पाता है किसी से, ना ही दिल बहलाने के लिए लाइफपार्टनर और बच्चे होते हैं।

ना किसी से कोई विशेष लगाव होता है ना कहीं आना जाना होता है।

गैर जिम्मेवार होते हैं और 2-3 बातों के अलावा उनकी जिन्दगी में कुछ विशेष नहीं होता है।

और उसके मन मे बहुत सी बातें बोझ बनकर उसे चिंताग्रस्त करती हैं, मानसिक रोग उत्पन्न होने से घबराहट और हार्टअटैक जैसी समस्या आती है।

सप्तम भाव से भी हृदय रोग प्रभावित होते हैं।

जब आप कुण्डली में "भावात भावम" का सूत्र लगाएंगे तो चतुर्थ भाव से चतुर्थ भाव अर्थात सप्तम भाव का विश्लेषण करने से भी चतुर्थ भाव का फल निकलेगा।


इसलिए चतुर्थभाव के फल के लिए सप्तम भाव पर भी ध्यान देना चाहिए।


ये कुण्डली पाकिस्तान की एक महिला की है जिसे छाती के रोग की समस्या है।

उर्दू पढ़ने वाला पढ़ लेगा कि मैंने इससे उर्दू में क्या लिखा है।

इसने कहा - हाँ इसे सीने के रोग हैं सांस और हार्ट की समस्या है।


कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 7 अप्रैल 1979
समय - सुबह 9:30 बजे कराची पाकिस्तान।


[1] वृषभ लग्न में चतुर्थ भाव में सिंह राशि बनती है जिसमें शत्रु ग्रह राहु और शनि बैठे हैं।

[2] राहु सिंह राशि में होने से सूर्य का प्रभाव ले रहा है और विस्फोटक नेचर अपनाकर शत्रु के घर में ही विस्फोट करने का योग बना रहा है लेकिन राहु का स्वभाव शनि वाला होता है जिसके कारण बड़ा विस्फोट ना कर के सुलगती आग वाला काम करेगा।

[3] शनि ठण्डक वाला ग्रह है और राहु के साथ, हृदय रोग एकदम से हानि वाला नहीं हो पायेगा, धीरे धीरे नुकसान करने वाला लम्बे समय तक चलने वाला रोग लगेगा।

[4] शनि वायु की तरह ग्रह है, वातरोगी प्रकृति का रूखा बंजर ग्रह है इसलिए साँस की बीमारी भी देगा क्योंकि साँस की बीमारी एक वायु तत्व की बीमारी है।

[5] इस महिला को हार्ट की प्रॉब्लम है, हार्ट अटैक नहीं हुआ है लेकिन धड़कन बढ़ती है।

[6] सूर्य की अग्नि तत्व राशि में कैंसर के कारक पाप ग्रह चतुर्थ भाव से सम्बंधित हिस्सो में कैन्सर भी बना सकते हैं।

निःस्व योग

#निःस्व_योग।


#द्वितीय_भाव का स्वामी #त्रिक_भावों में या #नीच राशि में हो अथवा #राहु_केतु के साथ हो तो यह योग बनता है।


मेरे पास ऐसे 3 केस आये हैं जिनमें लोगों को तान्त्रिकों ने लूटा है।

2 को #वशीकरण के चक्कर मे और तीसरे को टूटी शादि जोड़ने के चक्कर में।

तीनों को अलग अलग #बाबाओं ने #लूटा लेकिन लूटने की टेक्निक सेम ही थी।


#तीसरे बन्दे को जैसे लुटा है वो तो आप खुद ही देख लेना।



इस योग के बारे में शास्त्रों में कहा है -


सुवचनशून्यो विफल कुटुम्ब: कुजनसमाज कुदशनचक्षु:।
मतिसुतविद्याविभवहीनो रिपुहृतवित्त: प्रभवति निःसवे।


निःसव योग में पैदा हुआ जातक करुषवाक, विफल कुटुम्ब, दुर्जनों के साथ रहने वाला, नेत्र और दाँतो से कुरूप, बुद्धि, पुत्र, वैभव और विद्या से हीन होता है तथा शत्रु उसके धन को हरण कर लेते हैं।


शास्त्रों में जो परिभाषा और फल लिखी होती है वो 100% मैच हो जाये ऐसा भी नहीं कह सकते लेकिन 98% तक तो एक्यूरेट कह सकते हैं देश काल और पात्रता के अनुसार।


श्लोक में लिखा गया जी की नेत्र और दांत कुरूप होंगे, लेकिन जिज़ लड़की की यह कुण्डली है वो देखने मे सुंदर  थी और दांत भी अच्छे थे।


ये 2016 की बात है।

एक लड़की की कुण्डली देखी थी जो ट्रेनिंग के लिए घर से दूर हमारे एरिया में आई थी और रेंट पे रहती थी।

उससे जान पहचान हो गई थी और उसे पैसे का लॉस होने की प्रिडिक्शन की थी।

4-5 महीने बाद इसका मैसेज आया कि इसको कुछ प्रॉब्लम हो गई है पैसे से रिलेटिड।


इससे जब बात हुई तो इसने बताया कि ये ₹70000/- बर्बाद कर बैठी है एक #तान्त्रिक पर।

इसके मुँह से जब ₹70000/- सुना तो मैं सोच रहा था मेरी जेब में ₹500/- भी नहीं हैं और ये छोकरी इतनी बड़ी रकम कहाँ बर्बाद कर गई?


इसकी पूरी बात ये थी -

इसका एक बॉयफ्रैंड था, उसने इसको #धोखा दिया और दूसरी गर्लफ्रैंड बना ली।

इसका दिमाग खराब हो गया, इसने #अखबार से किसी #बंगाली_बाबा का नम्बर निकाला।

अखबार में लिखा था 101% वशीकरण की गैरन्टी, #सौतन_से_छुटकारा तुरन्त पाएं, 21 घण्टे में #दुश्मन_की_मौत का #तमाशा देखें।

#काले_इल्म के #माहिर बाबा बंगाली जी।

जो मेरे किये इल्म को काट दे, उसको #मुँहमाँगा_इनाम दूँगा।



बाबा बंगाली ने इसको कहा कि तेरा काम हो जायेगा, उसमें पूजा होगी 11 दिन की और फीस लगेगी।

काम ना हुआ तो पैसा वापस करूँगा।

लड़की ने जब फीस पूछी तो उसने कहा कि वो 11 दिन तक पूजा पाठ करेगा और इसका खर्च लड़की को देना होगा।

लड़की ने कहा कि इसने उस लड़की को तन्त्र से मरवाना है और लड़का इसके वश में होना चाहिए।

बाबा बोला ₹21000/- एक काम है तो दोनों कामों का ₹42000/- लगेगा।

लड़की ने कहा ठीक है।

लड़की के अकाउंट में उसके पिता ने ₹50000/- डाले थे जो उसकी समेस्टर फीस रहने का खर्चा स्टडी वगैरह के लिए थे।

उसने बंगाली को पेमेंट कर दी।

बाबा बंगाली इसको बोला पहले 11 दिन में उस लड़की को मारने की क्रिया करनी पड़ेगी उसके बाद लड़का वश में होगा।

10 दिन तक दूसरी लड़की को कोई असर नहीं हुआ।

बंगाली बोला थोड़ा और पैसा लगेगा, पूजा बढ़ानी पड़ेगी, कोई शक्ति उस लड़की को बचा रही है जिसको काटने के लिए 5 दिन का #कपाल_भैरो पाठ करना पड़ेगा और उसका खर्चा ₹11000/- होगा।

लड़की के दिमाग में सिर्फ मारना और वश करना ही घूम रहा था।

इसने अपनी सहेलियों से पैसे इकट्ठे किये और उसको दिए।

15 दिन बाद वो बाबा बोला कि अब वशीकरण का पाठ शुरू करना है, उसके बाद दोनों काम इक्कठे ही हो जाएंगे।

एक तरफ लड़की मरेगी और दूसरी तरफ लड़का वश में हो जाएगा।

इस लड़की को वो बाबा लटकाता रहा और बहकाता रहा।

कुछ दिन बाद वो बाबा बोला कि अब तुझे जगमोहिनी यन्त्र बनाकर भेजूँगा तब लड़का वश में होगा, जिसका खर्च ₹11000/- होगा।

इस लड़की ने दोबारा सहेलियों से पैसा लिया और बंगाली को दे दिए।


जब आखरी टाइम आ रहा था तो इस लड़की से उसने फिर पैसे मांगे कि अब #मारण_क्रिया के लिए #बकरे_की_बलि देनी पड़ेगी उसका खर्चा भी देना पड़ेगा 11 दिन बकरे को खिलाना पिलाना वगैरह होगा आखरी दिन 7 #अघोरियों को भोजन कराना है, तब क्रिया पूरी होगी।


लड़की से उसने फिर ₹11000/- माँगे और लड़की ने इस बार अपनी बहन से लिए।


जब सभी इसका काम ना हुआ तो लड़की ने पूछा मेरा काम कब होगा?

बाबा फिर पैसे माँगने लगा।

अब लड़की किसी से पैसा नहीं माँग सकती थी, ना किसी को बता सकती थी कि क्या हुआ ?


इसने कहा कि मेरे पैसे वापस कर दो।

बाबा ने एक चवन्नी तक नहीं दी।

आप चैट के स्क्रीनशॉट में देख लीजिए।

लड़की कह रही है कि पैसे दे दो, मैंने लोगों से उधार लिए हैं।

बाबा बोलता है कि मैं आज पैसे डलवा दो, हमारी पूजा कम्प्लीट हो जाएगी।

अगर काम नहीं बना तो अपनी गाड़ी बेच कर पैसा वापस करूँगा।


इस लड़की को कोई पैसा नहीं दिया, उसने इसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया।

जिनसे उधार लिया था उन्होंने पैसा मांगना शुरू किया और लड़की डिप्रेशन में जाने लगी थी और ना तो पढ़ाई की समेस्ट फीस दी ना सहेलियों के पैसे लौटा पाई।

जब इसकी बहन ने पैसे मांगे तो इसके पास वो भी नहीं थे।

ये परेशान हो गई और मुझे फोन कर के बोली कि क्या आप पैसों की कुछ हैल्प कर सकते हो?

अगर मुझे पैसे ना मिले तो मैं सुसाईड करने की कंडीशन में पहुंच चुकी हूँ।


इतना सा सुनने के बाद मेरे को चक्कर आना शुरू हो गया था।


मैंने बहुत सोचने के बाद इसको कहा कि फिर हेराफेरी फ़िल्म की कहानी सुना देना कि कम्पनी वाले पैसा डबल करने को बोल के लूट गए, उनके नम्बर मैंने डर के मारे डिलीट कर दिए, मैं किसी दूसरे सिम कार्ड से फोन करती थी जो फेंक दिया है, अब उनका कोई कॉन्टेक्ट नहीं है।


ये मान भी गई।


इसकी बहन ने अपने पिता से बोला कि इसने पैसे लिए हैं और लौटा नहीं रही है।

इसने वही फिर हेराफेरी वाली राम कहानी सुना दी।

मजबूरन लड़की के पिता को उन सब के पैसे लौटाने पड़े।

लड़की बच तो गई लेकिन डिप्रेसड रही कई महीनों तक और इसका साइकेट्रिक ट्रीटमैंट चला था।


आप लड़की का भेजा हुआ स्क्रीनशॉट देखें ये व्हाट्सऐप का बहुत पुराना वर्जन है जिसमें मोबाइल नम्बर भी पूरा फीड नहीं है।

नम्बर +91-90015 9------ है।

ये राजस्थान का नम्बर था।




इसकी कुण्डली के कुछ पॉइंट्स -


जन्म - 1 सितम्बर 1997
जन्मसमय - 05:38 बजे सुबह मण्डी हिमाचल प्रदेश।


[1] सिंह लग्न में धन भाव का स्वामी बुध लग्न में राहु के साथ है जो अपनी दुर्बुद्धि से धन का नाश दर्शा रहा है।

[2] धन भाव में दशम और तृतीय भाव का स्वामी शुक्र  नीच का है जो धन का नाश और धन के कारण बहन सहेलियों के साथ मनमुटाव दर्शा रहा है।

[3] पँचम भाव का स्वामी बृहस्पति छठे भाव में नीच है जो पढ़ाई की हानि और अल्पबुद्धि दर्शा रहा है, इसने अपना समेस्टर बर्बाद किया और काफी टेंशन झेली।

[4] सप्तम के केतु और सप्तमेश शनि के अष्टम में होने से लव अफेयर में धोखा हुआ।

[5] लग्न के सूर्य ने अहंकार बढ़ा दिया कि मेरा अपमान कर दिया मुझे छोड़ कर चला गया तो बदला लेकर रहूँगी चाहे कुछ भी हो जाये।

[6] तन्त्र मन्त्र छलावे के कारक ग्रह राहु ने आग में घी डाला और अष्टमस्थ शनि के प्रभाव से वशीकरण की बुद्धि लगी।

[7] राहु चन्द्रमा ने मानसिक तनाव दिया, सुसाइड की वृत्ति हो गई।

[8] नीच बृहस्पति और खराब चन्द्रमा के कारण साइकेट्रिक ट्रीटमेंट लेना पड़ा।

[9] बुद्धि का स्वामी बृहस्पति नीच, तर्क का स्वामी बुध राहु के कारण जड़त्व योग में और मन का कारक चन्द्रमा खराब होने से एक बार अड़ गई तो अड़ गई।

[10] लग्न का सूर्य और अहंकारी, बुध राहु का जड़त्व योग इसे जिद्दी और किसी की बात ना सुनने वाला बना रहा है जिसके कारण ये लड़की किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गई।

[11] धन हानि के सारे जुगाड़ इस निःस्व योग के कारण बने की इसका पैसा हर कोई ऐसा गैरा ले गया, परिवार में इज्जत कम हो गई।



दूसरे लड़के को शादी जोड़ने के नाम पर ठगा गया इसी प्रोसीजर के जरिये।


तीसरे बन्दे को तो ऐसा लूटा कि जिन्दगी भर बाबा का भूत नहीं उतरेगा सिर से।


लड़का मिडल क्लास का था, उसके ₹30000/- लूटे गए।


उसके पड़ोस में कोई शादीशुदा औरत थी, देखने में अच्छी थी, और वो उसपर वशीकरण कराने के लिए फोन किया।


बाबा बोला - ₹21000/- सारी क्रिया मैं करूँगा, क्रिया के लिए उसका वो नम्बर देना जिस पे वो व्हाट्स चलाती है।

नम्बर पर क्रिया मैं कर दूँगा, उसी व्हाट्सएप से तेरे पास आएगी वो।

तेरे को सिर्फ एक मन्त्र दूँगा।

तूने हथेली पर उस औरत का नाम लिखना है और उस औरत के घर की तरफ मुँह के कर के अपने कमरे में बैठ के मन्त्र जपना है।

मन्त्र जपते जपते जब तेरे हाथ से वो लिखा नाम गायब हो जाए तो समझ लेना वो वश में है।

फिर वो तुझे व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करेगी और फोन पर अपना जलवा दिखायेगी।

वही शुरुआत है, उसके साथ फिर जो चाहे करना वो तेरी ही हो जाएगी।


उस बन्दे ने फुदक फुदक कर पैसे तान्त्रिक को दिए और पड़ोस की उस औरत का नम्बर दे दिया।

तान्त्रिक ने कहा शाम को क्रिया कर दूँगा, शाम को फोन करना।


दिन को उस बन्दे ने उस औरत के पता नहीं क्या क्या ख्वाब देख लिए खुश होकर।


जब शाम को उस बन्दे ने फोन किया तो तान्त्रिक ने जो बोला उसे सुनकर उसकी खाट बाट उड़ गई।


तान्त्रिक ने बोला - जो नम्बर तुमने दिया था मैंने उसपर फोन किया था और उस औरत से बात की।

उसको रॉन्ग नम्बर बोल दिया।

अब मेरे अकाउंट में ₹10000/- डाल नहीं तो उस औरत को फोन कर के उसके पति का नम्बर ले लूँगा और उसको बता दूँगा की तूने उस औरत पर वशीकरण करवाने को फोन किया है।


बस यही सुनना था कि लड़का ब्लडप्रेशर लो होने की वजह से चक्कर खाकर गिर पड़ा था।

थोड़ी देर बाद जब लड़का थोड़ा नॉर्मल हो गया तो उसने उस तान्त्रिक को फोन किया और बहुत मिन्नतें की।

तान्त्रिक ने उससे ₹10000/- और वसूल कर ही लिए।


[ अखबार पर ऐसे विज्ञापनों से दूर रहें। ]